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वैक्सीन पर गरमाई राजनीति

राज्यों की ओर से शिकायतें आ रही हैं कि उन्हें कोरोना वैक्सीन नहीं मिलने के कारण टीकाकरण रोक देना पड़ रहा है। दूसरी तरफ केंद्र का कहना है कि राज्य अनावश्यक राजनीति करने के बजाए अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान दें

पिछले एक साल से पूरा देश निरंतर कोरोना महामारी के खिलाफ जंग लड़ रहा है। एक बार फिर से कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ने लगे हैं। इनमें पांच राज्यों का सबसे ज्यादा बुरा हाल है। चिंता का विषय यह है कि कोरोना वायरस के मामले नए रिकाॅर्ड बना रहे हैं, लेकिन कोरोना टीकाकरण को लेकर राज्यों और केंद्र सरकार के बीच विवाद गहराता जा रहा है। राज्यों से वैक्सीन की कमी की शिकायतें आ रही हैं, तो केंद्र का कहना है कि राज्य सरकारें राजनीति करने के बजाए अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान दें तो बेहतर होगा। वैक्सीन की किल्लत की शिकायतें राज्यों की तरफ से आ रही हैं। वैक्सीन नहीं होने के चलते महाराष्ट्र, ओडिशा, दिल्ली उत्तर प्रदेश समेत झारखंड में कई टीकाकरण केंद्रों को बंद कर दिया गया है। महाराष्ट्र में कई जिला प्रशासन ने दावा किया है कि उनके पास वैक्सीन का स्टाॅक पूरी तरह से खत्म हो चुका है। राज्य के सतारा में तो वैक्सीन लेने के लिए लाइन में खड़े लोगों को बिना टीका लगाए घर वापस लौटना पड़ा। जिला प्रशासन ने वैक्सीन नहीं होने की बात कहकर लोगों को वापस कर दिया।

महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा कि वैक्सीन वितरण में महाराष्ट्र के साथ भेदभाव हुआ है। हालांकि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डाॅ हर्षवर्धन ने महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ पर गलत सूचना और भय फैलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के नेताओं द्वारा टिप्पणियां प्राप्त हुई हैं जिनका उद्देश्य टीकाकरण पर गलत सूचना देना और भय फैलाना है। बेहतर होगा कि राज्य सरकार राजनीति पर ध्यान देने की बजाय अपनी आधारभूत स्वास्थ्य संरचना पर जोर दें। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा जिम्मेदारी से कार्य न करना समझ से परे है। लोगों में दहशत फैलाना मूर्खता है। वैक्सीन आपूर्ति की निगरानी लगातार की जा रही है और राज्य सरकारों को इसके बारे में नियमित रूप से अवगत कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई अन्य राज्यों को अपनी स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों को चिन्हित करने की आवश्यकता है। कर्नाटक, राजस्थान और गुजरात में परीक्षण की गुणवत्ता में सुधार करने की आवश्यकता है। पंजाब में गंभीर रूप से बीमार लोगों को जल्द से जल्द अस्पताल में भर्ती कर उनके स्वास्थ्य में सुधार करने की आवश्यकता है।

डाॅ हर्षवर्धन ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने डीसीजीआई द्वारा आपातकालीन उपयोग प्राधिकरण दिए जाने के बावजूद कोवैक्सीन का उपयोग करने से इनकार कर दिया। राज्य सरकार अपने कार्यों से लोगों की जान संकट में ही नहीं डाल रही, बल्कि दुनिया में गलत संदेश भी दे रही है। छत्तीसगढ़ में पिछले 2-3 हफ्तों में असामयिक रूप से मौतों की संख्या अधिक आ रही हैं। ऐसे में राज्य सरकार की जांच केवल रेपिड एंटीजन टेस्ट पर टिकी है, जो कि सही कदम नहीं है। अब ओडिशा और राजस्थान ने भी केंद्र से मदद मांगी है। ओडिशा के स्वास्थ्य मंत्री नाबा किशोर ने कहा, अभी राज्य में 5.34 लाख खुराकें बची हैं। हम रोजाना 2.5 लाख वैक्सीन देते हैं। हमने केंद्र को इस बारे में चिट्ठी लिखी है और कहा है 10 दिन के लिए कम से कम 25 लाख खुराकें भेजें। केंद्र से वैक्सीन आना जरूरी है। अगर हमें दो दिनों के अंदर वैक्सीन नहीं मिलेगी तो हमें टीकाकरण रोकना पड़ेगा। हमारे 1400 में से 700 टीकाकरण केंद्र पहले ही बंद हो चुके हैं। हमें उम्मीद है कि जल्द ही टीके भेजे जाएंगे।

दिल्ली में भी वैक्सीन की कमी

इस बीच दिल्ली में भी वैक्सीन स्टाॅक की कमी का दावा किया गया है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि दिल्ली में भी अब 4 से 5 दिन का वैक्सीन स्टाॅक बचा हुआ है। सत्येंद्र जैन ने कहा कि दिल्ली में केंद्र सरकार के अस्पतालों में टीका लगाने की रफ्तार धीमी है। केंद्र के अस्पतालों में सिर्फ 30 से 40 फीसदी वैक्सीन लगाई गई है। इसी वजह से दिल्ली में आंकड़े कम दिख रहे हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि यह वक्त राजनीति करने का नहीं है, बल्कि एक साथ मिलकर कोरोना के खिलाफ लड़ने का है। राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि केंद्र सरकार की ओर से राज्य को 1000 वेंटिलेटर भेजे गए थे, लेकिन इन्होंने दो-ढ़ाई घंटे बाद ही काम करना बंद कर दिया। सीएम गहलोत ने समीक्षा बैठक के दौरान यह मुद्दा उठाया था। केंद्र को इसकी जानकारी होनी चाहिए थी और हमने उन्हें सूचित कर भी दिया है। इसमें कोई राजनीति नहीं है, हम उन्हें तकनीकी खामी के बारे में बता रहे थे।
महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने राज्य में टीके की किल्लत होने का दावा किया था। उन्होंने कहा था कि राज्य में सिर्फ 3 दिनों के लिए ही टीके का स्टाॅक बचा है। दूसरी तरफ, एनसीपी नेता सुप्रिया सुले ने भी यह दावा किया कि पुणे के सौ से ज्यादा टीकाकरण केंद्र सिर्फ इसलिए बंद कर दिए गए हैं, क्योंकि वहां टीके ही उपलब्ध नहीं हैं। महाराष्ट्र के सतारा में भी वैक्सीन की कमी के बाद टीकाकरण रोक दिया गया है।

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