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सीमा विवाद को लेकर चरम पर राजनीति , राहुल के वार पर शाह का पलटवार 

भारत -चीन के बीच पिछले कुछ महीनों से चल रही तना -तनी  कम होने के बजाय बढ़ती ही जा रही है।इस  तना -तनी को लेकर देश में राजनीति भी चरम पर है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ चल रहे तनाव को  लेकर  मोदी सरकार पर हमलावर हैं।

मई में तनाव की शुरुआत के बाद से ही वह भारत की जमीन पर चीन के कब्जा करने के आरोप लगा रहे हैं। कुछ दिन पहले ही  उन्होंने पीएम मोदी को ‘कायर’ करार देते हुए दावा किया था  कि अगर उनकी सरकार होती तो 15 मिनट नहीं लगते चाइना को उठाकर फेंकने में।इस बयान पर अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी को वर्ष 1962 में दी गई अपनी खुद की सलाह सुननी चाहिए। उस समय भारत और चीन के बीच हुए युद्ध की वजह से भारत को अपनी कई हेक्टेयर जमीन गंवानी पड़ी थी।  हरियाणा में सात अक्तूबर को कृषि कानूनों के विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने भारत और चीन के बीच सीमा पर जारी तनाव को लेकर टिप्पणी की थी।

 

इसके बाद अब  शाह ने पलटवार करते हुए कहा, ‘15 मिनट के अंदर चीनियों को बाहर निकालने के फॉर्मूले को वर्ष 1962 में ही लागू किया जा सकता था। यदि ऐसा किया गया होता तो हमें कई हेक्टेयर भारतीय भूमि को गंवाना न पड़ता। तत्कालीन प्रधानमंत्री ने आकाशवाणी पर ‘बाय – बाय असम’ तक कह दिया था। अब कांग्रेस हमें इस मुद्दे पर कैसे शिक्षा दे सकती है? जब आपके परनाना सत्ता में थे, तब हम चीनी सरकार के हाथों अपने क्षेत्र खो रहे थे।’

 

चार महीने पहले बिहार रेजीमेंट के जवानों ने 15-16 जून की दरम्यानी रात को गलवां घाटी में चीनियों को अतिक्रमण करने से रोका था, इसे लेकर शाह ने कहा, ‘मुझे 16 बिहार रेजिमेंट के सैनिकों पर बहुत गर्व है। कम से कम हमारे कार्यकाल के दौरान, हम मैदान में डटे रहे और हमने संघर्ष किया। इन सैनिकों ने विपरीत  मौसम की स्थिति का सामना किया और हमारे देश की रक्षा की। इस दौरान हुई हिंसक झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे।

 

शाह ने आगे  कहा कि भारत को उम्मीद है कि कूटनीतिक वार्ता के माध्यम से दोनों देशों के बीच तनाव का सौहार्दपूर्ण समाधान निकल सकता है। गौरतलब है कि सात अक्तूबर को राहुल गांधी ने कहा था, ‘अगर हम सत्ता में होते तो चीन हमारे क्षेत्र के अंदर कदम रखने की हिम्मत नहीं करता। नरेंद्र मोदी कहते हैं कि भारत की जमीन पर कोई कब्जा नहीं हुआ। अगर हमारी सरकार होती तो चीन की सेना को उठाकर बाहर फेंक देती। अब वह यही देख रहे हैं कि ये काम मोदी कब करेंगे लेकिन जब हमारी सरकार आएगी तो देश की सेना 15 मिनट में चीनी सेना को बाहर पटक कर मारेगी।

राहुल ने भाजपा सरकार पर हमला तो किया ,लेकिन लगता है कि उनकी स्थिति उस शिकारी की तरह हो गई वो खुद शिकार बन जाता है। भाजपा कांग्रेस शासन काल में चीन द्वारा भारतीय जमीन कब्जा किये जाने और चीन के प्रति कांग्रेस के रुख को लेकर जबर्दस्त तंज कस रही है। भाजपा याद दिला रही है कि वर्ष 1962 में चीन ने भारत पर हमला किया था। वह युद्ध लगभग एक महीने तक चला था। उस युद्ध में चीन की सेना ने भारत की बड़ी जमीन पर कब्जा कर लिया था। उस समय जवाहर लाल नेहरू भारत के प्रधानमंत्री थे।  वो भारत के सबसे मजबूत प्रधानमंत्रियों में से एक थे, लेकिन वो कुछ भी नहीं कर पाए थे।  लेकिन जवाहरलाल नेहरू के पर-नाती राहुल गांधी का कहना है कि वो सत्ता में होते तो सिर्फ 15 मिनट में चीन की सेना को भगा देते, सिर्फ भगा नहीं देते, बल्कि उसे उठाकर 100 किलोमीटर पीछे फेंक देते। लेकिन राहुल गांधी को उस दौर के बारे में याद रखना चाहिए  जब उनकी पार्टी सत्ता में हुआ करती थी। तब के रक्षा मंत्री एके एंटनी ने  6 ,सितंबर 2013 को संसद में माना था कि आजादी के बाद से ही कांग्रेस पार्टी की सरकारों की नीति रही है कि सीमा से लगे इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर  का ज्यादा विकास नहीं कराया जाए।  तब एके एंटनी ने यह भी माना था कि ये नीति सही साबित नहीं हुई और चीन ने इसका फायदा उठाकर भारत में घुसपैठ की।

राहुल गांधी कह रहे हैं कि वो चीन को 15 मिनट में उठाकर फेंक सकते हैं, लेकिन चीन ने जब भी भारत की जमीन पर कब्जा किया, तब केंद्र में कांग्रेस पार्टी की ही सरकारें थी।

1 – सबसे पहले वर्ष 1962 में चीन की सेना ने भारत का पूरा अक्साई चिन   इलाका अपने कब्जे में ले लिया था।  ये लगभग 38 हजार वर्ग किलोमीटर का इलाका है।  अगर क्षेत्रफल के हिसाब से देखें तो ये दक्षिण कोरिया और UAE जैसे देशों के बराबर है।
2 – इसके एक साल बाद ही वर्ष 1963 में पाकिस्तान ने POK की लगभग 5180 वर्ग मीटर जमीन चीन को तोहफे में दे दी थी।  ये दोनों वो समय थे, जब राहुल गांधी के पर-नाना जवाहरलाल नेहरू भारत के प्रधानमंत्री हुआ करते थे।
3 – वर्ष 1962 से पहले ही चीन अरुणाचल प्रदेश की लगभग 90 हजार वर्ग किलोमीटर जमीन पर अपना दावा करता है।  हालांकि यहां पर भारत की सेना मुस्तैद है, जिससे चीन यहां कोई दुस्साहस नहीं दिखा पाया है।
4 – चीन समय-समय पर लद्दाख में छोटी-मोटी घुसपैठ करता रहा है।  हालांकि उसने कोई बहुत बड़ी जमीन कब्जा नहीं की।  वर्ष 2010 से 2013 के बीच चीन की सेना ने एक बार फिर से घुसपैठ तेज की।
5 – National Security Advisory Board ने 2013 में इस बारे में एक रिपोर्ट दी।  जिसमें दावा किया गया कि चीन की सेना पूर्वी लद्दाख के 640 वर्ग किलोमीटर इलाके पर कब्जा कर चुकी है।  इस रिपोर्ट पर तब बहुत हंगामा मचा था, लेकिन तब UPA सरकार ने इसे खारिज कर दिया था।

यह  वो समय था जब केंद्र में मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे और राहुल गांधी की मां सोनिया गांधी को  सुपर-प्राइम मिनिस्टर कहा जाता था।  खुद राहुल गांधी भी वर्ष 2004 से ही सक्रिय राजनीति में हैं।  वर्ष 2013 में वो सांसद थे और कांग्रेस पार्टी ने उन्हें प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर प्रोजेक्ट करना शुरू कर दिया था।  वर्ष 2013 में राहुल गांधी के पास मौका था कि वो चीन को उठाकर 100 किलोमीटर पीछे फेंक देते, लेकिन तब राहुल गांधी ने ऐसा कुछ नहीं किया।

राहुल गांधी आज जब विपक्ष में हैं तो बहादुरी की बातें कर रहे हैं।  वो जो कुछ कह रहे हैं उसका मतलब शायद खुद उन्हें नहीं पता है।  उन्हें अगर इतिहास के बारे में जानकारी होती तो शायद ऐसी बातें बोलने से पहले वो एक बार जरूर सोचते।

राहुल गांधी के पर-नाना जवाहरलाल नेहरू लगभग 16 वर्ष तक देश के प्रधानमंत्री रहे। वर्ष 1962 के युद्ध के बाद भी जवाहरलाल नेहरू लगभग 2 वर्ष तक अपने पद पर रहे।  वर्ष 1964 में उनका निधन हो गया था। नेहरू हमेशा चीन से अच्छे रिश्तों के समर्थक थे।  उन्होंने चीन पर विश्वास किया, लेकिन बदले में उन्हें धोखा मिला लेकिन उन्होंने इस धोखे से भी शायद कोई सबक नहीं सीखा।

भारत-चीन युद्ध समाप्त होने के बाद संसद में इस मुद्दे पर बहस हुई थी।  उस बहस में तब के कांग्रेस सांसद महावीर त्यागी ने जवाहरलाल नेहरू से पूछा कि वो अक्साई चिन वापस पाने के लिए क्या कर रहे हैं? इस पर नेहरू का जवाब था कि अक्साई चिन में घास का तिनका भी नहीं उगता। इस पर महावीर त्यागी ने अपने सिर से टोपी उतारी और कहा कि ‘यहां पर भी कुछ नहीं उगता, तो क्या मैं अपना सिर कटवाकर किसी और को दे दूं?’ तब इस बात पर संसद में जोर का ठहाका लगा था, लेकिन कांग्रेस सांसद महावीर त्यागी के उस सवाल का जवाब आज 58 साल के बाद भी देश ढूंढ नहीं पाया है। यही कारण है कि आज जब राहुल गांधी चीन को लेकर बड़बोलापन दिखाते हैं तो उनकी बातें लोगों को चुभती हैं।

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