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अमर्यादित बयानबाजी में एक-दूसरे को पीछे छोड़ते जा रहे हैं राजनेता

जुबान से निकले शब्द और कमान ने निकला तीर कभी वापिस नहीं आते। माना जाता है कि तीर उतना घायल नहीं करता, जितने शब्द घायल करते है। तीर का जख्म बाहरी होता है, लेकिन शब्दों के वार अंदर तक जख्म करते हैं। देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव चल रहे है, चुनाव है तो आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। पंरतु आजकल आरोपों की जगह गाली-गलौच और अमर्यादित भाषा का प्रयोग ज्यादा हो रहा है। भाजपा के बंगाल प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लेकर बेहद शर्मनाक बयान दिया। घोष ने ममता बनर्जी की चोट पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ममता को साड़ी की जगह बरमूडा पहनना चाहिए। ताकि उनका पैर ठीक से दिखे। ममता दी ने साड़ी क्यों पहनी है, उन्हें अपने पैर बेहतर दिखाने के लिए “बरमूडा” शॉर्ट्स पहनने चाहिए। दिलीप घोष के बयान पर टिप्पणी करते हुए टीएमसी की सांसद महुआ मोइत्रा ने ट्ववीटर पर ट्वीट कर कहा कि “बीजेपी पश्चिम बंगाल के अध्यक्ष ने सार्वजनिक सभा में पूछा कि ममता दी ने साड़ी क्यों पहनी है, उन्हें अपने पैर बेहतर दिखाने के लिए “बरमूडा” शॉर्ट्स पहनने चाहिए, और इन बंदरो को लगता है कि वे बंगाल चुनाव जीत रहे है।

यह पहली बार नहीं हुआ जब किसी महिला के लिए किसी नेता ने ऐसी बयानबाजी की हो। इससे पहले समाजवादी पार्टी के नेता और सांसद आजम खान ने लोकसभा चुनाव में अपनी एक चुनावी रैली के दौरान जया प्रदा को लेकर काफी अपमानजनक टिप्पणी की थी। उन्होंने जया पर बयानबाजी करते हुए कहा था कि आप लोगों ने 10 साल जिनसे अपना प्रतिनिधित्व कराया, उसकी असलियत समझने में आपको 17 साल लगे, मैं 17 दिन में पहचान गया कि इनके नीचे का अंडरवियर खाकी रंग का है। कोई भी पार्टी हो सबने महिलाओं का अपमान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। अतीत में भाजपा ने इंदिरा गांधी से लेकर सोनिया गांधी के लिए विवादित बयान दिया है। आम आदमी पार्टी के नेता सोमनाथ भारती ने कई बार महिलाओं का अपमान किया है। कांग्रेस के सांसद शशि थरुर और दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं ने भी महिलाओं का अपमान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। कई बार नेता अपने पद की परवाह किए बगैर ही अभद्र भाषा का प्रयोग करते है। हरियाणा में भाजपा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी महिलाओं पर ऐसी अपमानजनक टिप्पणी की थी। सोनीपत के खरखोदा में एक चुनावी रैली के दौरान मनोहर लाल खट्टर ने सोनिया गांधी को कांग्रेस की अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर एक विवादित टिप्पणी की थी। मनोहर लाल खट्टर ने कहा था, “लोकसभा चुनाव में हार के बाद राहुल गांधी ने पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ दिया और कहा कि नया कांग्रेस अध्यक्ष गांधी परिवार से नहीं होगा। हमने इस निर्णय का स्वागत किया था। वंशवाद की राजनीति को ख़त्म करने के लिए यह अच्छा फ़ैसला था। लेकिन फिर इन लोगों ने देशभर नें तालशी शुरू की। तीन महीने बाद उन्होंने सोनिया गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बना दिया। यह तो ऐसा हुआ जैसे खोदा पहाड़, निकली चुहिया वो भी मरी हुई।

जब मध्यप्रदेश में उपचुनाव हो रहे थे। उस दौरान कांग्रेस नेता कमलनाथ ने भाजपा प्रत्याशी इमरती देवी के लिए आइटम शब्द का प्रयोग किया था। हालांकि बाद में कांग्रेस पार्टी के आलाकमान ने कमलनाथ को अपने बयान के लिए माफी मांगने को भी कहा था। लेकिन जो पानी बह गया वह वापस नहीं आता। राजनीति में इस तरह की भाषा आजकल आम हो गई है। आमतौर पर अपने भाषण में डेवलपमेंट की बात करने वाले राजनेताओं की जुबान से समय-समय पर लगाम हटती रहती है। इन नेताओं की पहचान मंत्री, सांसद और विधायक के रुप में की जाती है। जो हमारे समाज को स्वच्छ, भयमुक्त और अभ्रद्र भाषा को समाज से हटाने की बात करते है। लेकिन अपनी जुबान का कंट्रोल खो देते हैं।

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