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रेप की घटना के 10 साल बाद बयान लेने पहुँची पुलिस, पिता ने कहा नही चाहिए अब न्याय

एक बहुत प्रचलित कहावत है कि ‘देर से मिला न्याय’ असल में न्याय देने से इनकार के समान है। इस दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति पर संसद से लेकर गांवों-कस्बों के नुक्कड़ों-चौराहों पर बहसें होती रहती हैं। लेकिन परिणाम कुछ नहीं निकल पाता है। त्वरित न्याय के लिए वैसे तो देश में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाई हुई है। लेकिन इसके बावजूद भी पीड़ितों को दशकों तक न्याय नहीं मिल पाता है।

 

बिहार के मुजफ्फरपुर में एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिसमें एक नाबालिग रेप पीड़िता का परिवार पूरे 10 साल तक न्याय का इंतजार करता रहा। यही नहीं, बल्कि पीड़ित बालिका का परिवार वर्षों तक न्याय के लिए दर-दर भटकता रहा। लेकिन अंततः उन्हें निराशा ही मिलीं। हालांकि घटना के दस साल बाद जब पुलिस केस की समीक्षा कर रही थी तो इस केस की याद आई तब पुलिस पीड़िता के घर पहुंची। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

 

जानकारी के अनुसार मुजफ्फरपुर के अखाड़ाघाट रोड इलाके के एक मोहल्ले में 10 साल पहले 17 साल की एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म हुआ था । तब आरोपी ने बालिका के साथ दुष्कर्म करने के अलावा जानलेवा हमला भी किया था। आरोपी किराए के मकान में रहता था। तब 22 अगस्त 2010 को नगर थाने में रेप का मामला दर्ज हुआ ।

 

धारा 376 के साथ ही जानलेवा हमले का भी मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके बाद एफआईआर दर्ज हो गई । लेकिन पुलिस कार्रवाई करना भूल गई। पीड़िता और उसके परिजन कार्रवाई कराने के लिए पुलिस और प्रशासन के चक्कर काटते रहे। लेकिन पुलिस ने उस फाइल को आगे करने की बजाय रद्दी की टोकरी में डाल दिया।

 

अचानक 10 साल बाद मुजफ्फरपुर पुलिस अधीक्षक नीरज सिंह की समीक्षा में जब यह केस खुला तो आनन-फानन में जांच शुरू की गई । पुलिस अधीक्षक ने रेप पीड़िता का बयान लेने के आदेश दिए। जिसके चलते मामले के जांच अधिकारी इंस्पेक्टर राजपत कुमार को वहा भेजा गया।

 

जांच अधिकारी ने काफी मशक्कत की। उसके बाद दारोगा की पीड़िता के पिता से मुलाकात हुई। जब दस साल पहले हुए रेप केस की जांच के लिए पहुंचने की बात इंस्पेक्टर राजपत कुमार ने बताई तो पीड़िता के पिता का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। बताया जा रहा है कि वह पुलिस के सामने हाथ जोड़ कर खड़े हो गए।

 

इसके बाद पीड़िता के पिता ने जांच अधिकारी से कहा कि हमें बख्श दीजिए। वापिस चलें जाईए। अब हमें न्याय नहीं चाहिए। उनकी बेटी की शादी हो चुकी है। इस केस के चक्कर में उसका बसी-बसाई जिंदगी उजड़ जाएगी। जो रेप आरोपित था वह भी कब इलाके को छोड़कर जा चुका।

 

पीड़िता के पिता ने हाथ जोड़कर कहा कि अब आप किसे गिरफ्तार करेगे । इसलिए आप अब केस को ही छोड़ जाए। अब केस खत्म कर दीजिए। बताया जा रहा है कि पिता का बयान लेकर इंस्पेक्टर राजपत कुमार वापिस लौट गए। बताया जा रहा है कि अब इस केस की साक्ष्य की कमी के आधार पर क्लोजर रिपोर्ट लगाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए केस डायरी को फाइनल रूप दे दिया गया है।

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