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मंदिर की रखवाली करने वाले उस्मान को उठा ले गई पुलिस, पुजारी ने लगाई रिहाई की अर्ज़ी

मंदिर की रखवाली करने वाले उस्मान को उठा ले गई पुलिस, पुजारी ने लगाई रिहाई की अर्ज़ी

पिछले महीने हुए दिल्ली हिंसा के बाद से लग रहा था कि लोग उस खौफनाक हादसे से उभर रहे हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। अभी भी कई ऐसे मामले समाने आ रहे हैं जो शासन और प्रशासन के रवैये पर सवाल खड़े कर रहे हैं। ऐसा ही एक मामला मुस्तफाबाद में रहने वाले उस्मान सैफी की है। उस्मान सैफी नेहरू विहार के गली नंबर 18 में रहते हैं। जब उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगा हुआ, तब उस्मान ने अपने गली के राम मंदिर की रखवाली की। उस्मान और उनके पड़ोसी बहुत तनाव में थे। इसलिए बहुत सचेत थे। उन्हें लगता था कि अगर मंदिर को कुछ हो गया तो उसका इल्जाम क्षेत्र के मुसलमानों पर लगेगा।

नेहरू विहार मुस्लिम बहुल इलाका है। उस इलाके में लगभग 10 हिंदू परिवार रहते हैं। दंगे के समय रात-रात भर जाग कर उस्मान मंदिर की रक्षा करते रहे। लेकिन 45 वर्षीय उस्मान सैफी को पुलिस ने अब गिरफ्तार कर लिया है। उस्मान सैफी को दिल्ली पुलिस ने रविवार को देर रात मंदिर के बाहर से हिरासत में ले लिया। उनके पड़ोसियों ने बताया है कि पुलिस ने उन पर दंगा करने का आरोप लगाया है। लगभग 12:45 बजे पुलिस आई और उन्हें दयालपुर स्टेशन ले गई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस अचानक कार से आई। पुलिस ने सैफी के सिर पर पिस्तौल रखा और उन्हें उठा ले गई। उस्मान को अपना बचाव करने का मौका नहीं दिया गया। उस्मान की बीवी सलमा ने बताया, “इतने लोग मंदिर की रक्षा करते हैं, न कि सिर्फ वे। मुझे नहीं पता कि उन्होंने केवल उन्हें ही क्यों निशाना बनाया।”

वहीं उस्मान के पड़ोस में रहने वाले मुस्लिमों का कहना है कि दंगें की शुरुआत के बाद से ही वे मंदिर के बाहर बैठे हैं। ये दो दशक पुराना राम मंदिर है। उस्मान सैफी के साथ मंदिर रखवाली कर रहे लोगों ने बताया, “हम किसी भी तरह की बदनामी या किसी भी तरह के आरोपों को बर्दाश्त नहीं कर सकते। इसलिए, हम हर रात मंदिर के बाहर बैठते हैं और इसकी रखवाली करते हैं।” मंदिर के गार्ड का कहना है कि उन्होंने दंगों के बाद से हर रात मंदिर की रखवाली करते सैफी को देखा था।

नेहरू विहार इलाके के हिंदू परिवारों और श्रीराम मंदिर समिति के पुजारी ने उनको रिहा करने के लिए कड़कड़डूमा कोर्ट में अर्ज़ी दी है। उन्होंने कड़कड़डूमा के मजिस्ट्रेट को एक पत्र लिखा है। जिसमें बताया है कि किस तरह उस्मान सैफी दंगे के दौरान दिन-रात वहीं थे, ताकि कोई बाहरी लोग मंदिर या हिन्दू परिवार को नुकसान न पहुंचा पाए।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, दिल्ली दंगों के सिलसिले में अब तक कम-से-कम 150 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तारियों पर कोई आधिकारिक आंकड़े सामने नहीं आए हैं। सूत्रों के मुताबिक, हर दिन एक व्यक्ति को दंगे के नाम पर उठाया जाता है। जबकि राहत कैम्प में रह रहे लोगों ने इसकी शिकायत कर चुकी है। उनका कहना है कि हमें मनमानी गिरफ्तारियों की कई शिकायतें मिल रही हैं। हम इन लोगों को उन स्टेशनों का पता लगाने में मदद करने की कोशिश कर रहे हैं, जहां उनके गिरफ्तार या हिरासत में रखे गए लोगों को रखा गया है।

फातिमा नाम की एक महिला ने बताया कि उनके पति और 17 वर्षीय बेटे को पुलिस ने सोमवार दोपहर को उठा लिया जब वे तीनों शिव विहार पुल पार कर रहे थे। फातिमा ने बताया कि उनका पति और बेटा शिव विहार की पुलिया पर एक फल स्टाल लगाया करते थे। पुलिस निर्दोष होने के बावजूद उन्हें उठा ले गई। फातिमा ने आगे कहा, “वे मेरे बेटे को गिरफ्तार करने आए थे, लेकिन फिर मेरे पति की ओर मुड़े और कहा कि तू इसका बाप है? फिर पुलिस मेरे बेटे और पति को उठा ले गई।”

मोहम्मद उमैर मुस्तफाबाद के ही रहने वाले हैं। वे बताते हैं कि मोहम्मद यामीन मेरे पड़ोसी हैं। उन्हें रविवार रात को पुलिस ने उठा ले गई। जब हम पूछताछ करने के लिए दयालपुर स्टेशन गए तो पता चला कि दंगे करने के इल्जाम में उन्हें गिरफ्तार किया गया है। ऐसे कई मामले हैं जिसमें पीड़ितों के परिवार वालों ने दावा किया कि उनके परिवार के पुरुष सदस्यों को रविवार देर रात उठाया गया।

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