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पुलिस-वकील विवादःदिल्ली पुलिस को आई किरण बेदी की याद 

दिल्ली पुलिस में सीनियर ऑफिसर रह चुकीं किरण बेदी दिल्ली पुलिस के जवानों के समर्थन में आ गई हैं। उन्होंने तीस हजारी कोर्ट में पुलिस-वकीलों की हिंसक झड़प पर दिल्ली पुलिस को सलाह दी है कि पुलिस अपने रुख पर मजबूती से कायम रहे चाहे नतीजा कुछ भी हो। दिल्ली से बहुत दूर बैठीं किरण बेदी के पोस्टर मंगलवार को पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्सन कर रहें पुलिसकर्मियों ने थमा रखा था। ये पुलिसकर्मी नारा लगा रहे थे, ‘किरण बेदी शेरनी हमारी’, ‘हमारा पुलिस कमिश्नर कैसा हो, किरण बेदी जैसा हो’. किरण बेदी अभी पुदुचेरी की उपराज्यपाल हैं। आखिर वकीलों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मी किरण बेदी को क्यों याद कर रहे थे?
दरअसल किरण बेदी को याद करने के पीछे एक कहानी है। आज से 32 साल पहले की एक घटना से है, जब किरण बेदी नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट की डीसीपी थीं. उस समय भी पुलिस और वकीलों के बीच बड़े स्तर पर संघर्ष हुआ था।
यही कारण है कि 2015 में दिल्ली के विधानसभा चुनावों के दौरान जब भारतीय जनता पार्टी ने किरण बेदी को सीएम कैंडिडेट बनाया था,
15 जनवरी 1988 को पुलिस ने एक वकील को सेंट स्टीफेंस कॉलेज से एक लड़की का पर्स चुराते हुए गिरफ्तार किया था। जब 16 जनवरी को इस वकील को हथकड़ी लगाकर तीस हजारी कोर्ट में मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया तो वहां के वकील भड़क गए और उन्होंने तत्काल आरोपी वकील को छोड़ने की मांग की और पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
मजिस्ट्रेट ने वकील को उसी दिन छोड़ दिया और दिल्ली पुलिस के कमिश्नर को आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ एक्शन लेने को कहा। 18 जनवरी को वकील अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गए। किरण बेदी ने 20 जनवरी को एक बयान जारी किया और पुलिस के एक्शन को सही करार दिया, उन्होंने कथित ‘चोर’ को छोड़ने के लिए मजिस्ट्रेट की आलोचना भी की।

1988 में जब किरण बेदी उत्तरी दिल्ली की डिप्टी कमिश्नर थीं, तब पुलिस ने उनके दफ़्तर के बाहर इकट्ठा दिल्ली बार एसोसिएशन के सदस्यों पर लाठीचार्ज कर दिया था।

ये वकील अपने एक साथी को चोरी के आरोप में पुलिस के हथकड़ी पहनाए जाने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे तब लाठी चार्ज का आदेश दे दिया गया।  इसमें कई वकील घायल हो गए थे।  इसके बाद दिल्ली में हंगामा हो गया। वकील किरण बेदी के इस्तीफे की मांग करते रहे, और 2 महीने तक काम नहीं किया।

1988 में जो हुआ था, वह भीड़ द्वारा किया गया एक पूर्व नियोजित हमला था। लेकिन इस बार पार्किंग को लेकर हुई एक मामूली घटना ने बाद में बड़ा रूप ले लिया। पहली बार शायद ऐसा हुआ है जब सैकड़ों की तादाद में पुलिसकर्मियों ने इंडिया गेट और पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया है। वे कह रहे हैं कि किरण बेदी जैसा पुलिस कमिश्नर होना चाहिए। पुलिस के अंदर ऐसा माहौल पैदा हो जाना, इस मामले का सबसे गंभीर पहलू है।

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