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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्टैचू ऑफ यूनिटी के लिए आठ ट्रेनों को दिखाई हरी झंडी, कहा इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केवडिया में बनी सरदार पटेल की सबसे ऊंची प्रतिमा को विश्व पर्यटन के नक्शे पर लाने के लिए केवड़िया के लिए आठ ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई हैं। स्टैचू ऑफ यूनिटी के नाम से प्रसिद्ध सरदार पटेल की प्रतिमा गुजरात के केवड़िया में बनी हुई है। लाखों की संख्या में पर्यटक इसे हर साल देखने के लिए आते है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि रेलवे के इतिहास में संभवत: पहली बार ऐसा हो रहा है जब एक साथ देश के अलग-अलग कोने से एक ही जगह के लिए इतनी ट्रेनों को हरी झंड़ी दिखाई गई हो। केवड़िया जगह भी ऐसी है जिसकी पहचान एक भारत-श्रेष्ठ भारत का मंत्र देने वाले, देश का एकीकरण करने वाले सरदार पटेल की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, सरदार सरोवर बांध से है।

भारत रत्न एमजी रामचंद्रन के बारें में बात करते हुए पीएम ने कहा कि आज केवड़िया के लिए निकल रही ट्रेनों में एक ट्रेन पुरैच्ची तलैवर डॉ. एमजी रामचंद्रन सेंट्रल रेलवे स्टेशन से भी आ रही है। ये भी सुखद संयोग है कि आज भारत रत्न एमजी रामचंद्रन की जयंती भी है। इस रेल कनेक्टिविटी का सबसे बड़ा लाभ स्टैच्यू ऑफ यूनिटी देखने आने वाले पर्यटकों को तो मिलेगा ही, साथ ही ये केवडिया के आदिवासी भाई बहनों का जीवन भी बदलने जा रही है। आज केवड़िया गुजरात के सुदूर इलाके में बसा एक छोटा सा ब्लॉक नहीं रह गया है, बल्कि केवड़िया विश्व के सबसे बड़े पर्यटक क्षेत्र के रूप में आज उभर रहा है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को देखने के लिए अब स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से भी ज्यादा पर्यटक पहुंचने लगे हैं। अपने लोकार्पण के बाद करीब-करीब 50 लाख लोग स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को देखने आ चुके हैं।

अपने संबोधन में उन्होंने आगे कहा कि छोटा सा खूबसूरत केवड़िया इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे प्लान तरीके से पर्यावरण की रक्षा करते हुए इकोनॉमी और इकोलॉजी दोनों का तेजी से विकास किया जा सकता है। बढ़ते हुए पर्यटन के कारण केवड़िया के आदिवासी युवाओं को रोजगार मिल रहा है। यहां के लोगों के जीवन में तेजी से आधुनिक सुविधाएं पहुंच रही हैं। बीते वर्षों में देश में रेलवे के पूरे तंत्र में व्यापक बदलाव करने के लिए काम किया गया। ये काम सिर्फ बजट बढ़ाना, घटाना, नई ट्रेनों की घोषणा करने तक सीमित नहीं रहा। ये परिवर्तन अनेक मोर्चों पर एक साथ हुआ है। अब जैसे केवडिया को रेल से कनेक्ट करने वाले इस प्रोजेक्ट का ही उदाहरण देखें तो इसके निर्माण में मौसम और कोरोना महामारी जैसी अनेक बाधाएं आई। लेकिन रिकॉर्ड समय में इसका काम पूरा किया गया। कुछ ही समय पहले मुझे पूर्वी और पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के एक बड़े सेक्सन का लोकार्पण करने का मौका मिला। इस प्रोजेक्ट पर 2006 से लेकर 2014 तक यानी लगभग 8 वर्षों में सिर्फ कागजों पर ही काम हुआ, 2014 तक 1 किमी तक भी ट्रैक नहीं बिछाया था। ये आठ ट्रेनें केवड़िया को वाराणसी, दादर, अहमदाबाद, हजरत निजामुद्दीन, रीवा, चेन्नई और प्रतापनगर से जोड़ेंगी।

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