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प्रधानमंत्री की अपील: 5 अप्रैल की रात 9 बजे घर की लाइट बंदकर मोमबत्ती, दीया या टॉर्च जलाएं

प्रधानमंत्री मोदी ने किया देश को संबोधित, 3 मई तक बढ़ा लॉकडाउन का समय

कोरोना महामारी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने 12 मिनट का एक वीडियो संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि कोरोना के खिलाफ अब तक 9 दिन के लॉकडाउन में लोगों ने अनुशासन का परिचय दिया।

5 अप्रैल के रात 9 बजे 9 मिनट पर

प्रधानमंत्री ने अपने वीडियो संदेश में जनता से कहा कि 5 अप्रैल को रात के 9 बजे 9 मिनट तक घर की लाइटें बंद करके घर के दरवाजे पर या बालकनी में मोमबत्ती, दीया, टॉर्च या मोबाइल फ्लैशलाइट जलाएं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि महामारी के दौरान निरंतर प्रकाश की ओर जाना है, सबसे ज्यादा प्रभावित गरीबों को निराशा से आशा की ओर ले जाना है।

उन्होंने कहा, “इस संकट से अंधकार और अनिश्चितता जो पैदा हुई है उससे उजाले की ओर बढ़ना है। इसे पराजित करने के लिए प्रकाश के तेज को चारों दिशाओं में फैलाना है इसलिए इस रविवार को 5 अप्रैल को हम सबको मिलकर कोरोना के संकट के अंधकार को चुनौती देनी है।”

इसके बाद प्रधानमंत्री ने कहा, “5 अप्रैल को 130 करोड़ देशवासियों के संकल्प को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। 5 अप्रैल रविवार को रात 9 बजे मैं आप सबके नौ मिनट चाहता हूं। 5 अप्रैल को घर की लाइटें बंद करके दरवाज़े या बालकनी पर खड़े होकर मोमबत्ती, दीया, टॉर्च या मोबाइल फ्लैशलाइट 9 मिनट तक जरूर जलाएं। इससे प्रकाश की महाशक्ति उजागर होगी। इस उजाले से हम संकल्प करें कि हम अकेले नहीं हैं।”

सोशल डिस्टेंसिग की लक्ष्मण रेखा

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “इस दौरान किसी भी हालत में सोशल डिस्टेंसिग की लक्ष्मण रेखा को लांघना नहीं है। सोशल डिस्टेंसिग ही कोरोना की बीमारी का रामबाण इलाज है।” अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने नौ दिनों के लॉकडाउन में लोगों के अनुशासन और हौसले की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि देश की सामूहिकता ही सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि हममें से कोई अकेला नहीं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “देश वासियों की इस सामूहिक शक्ति की विराटता, भव्यता और दिव्यता की अनुभूति करना आवश्यक है।” उन्होंने कहा, “हमारे यहां माना जाता है कि जनता-जनार्दन ईश्वर का रूप होती है। जब हमारे यहां इतनी बड़ी लड़ाई लड़ी जा रही है तो इस लड़ाई में बार-बार जनता रूपी महाशक्ति का और विराट स्वरूप का आह्वान करें।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “आज देश के करोड़ों लोग घरों में हैं तो किसी को भी लग सकता है कि कितने दिन और काटने पड़ेंगे। लेकिन यह अपरिहार्य है। कोरोना के अंधकार के बीच हमें प्रकाश की ओर जाना है। गरीब भाई-बहनों को कोरोना से पैदा हुई निराशा से आशा की ओर लेकर जाना है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने 24 मार्च के अपने संबोधन में कहा था कि हिंदुस्तान को बचाने के लिए 21 दिन का यह लॉकडाउन बेहद जरूरी है। यह जनता कर्फ्यू से ज्यादा सख्त होगा और यह एक तरह से कर्फ्यू ही है। बाहर निकलना क्या होता है, यह 21 दिन के लिए भूल जाइए। 21 दिन नहीं संभले तो आपका देश और आपका परिवार 21 साल पीछे चला जाएगा। कोरोना से मुकाबले के लिए सोशल डिस्टेंसिंग जरूरी है। हमें संक्रमण के चक्र को तोड़ना होगा। कोरोना से तभी बचा जा सकता है, जब घर की लक्ष्मण रेखा न लांघी जाए।

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