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कांग्रेस का ‘हाथ’ थाम नई सियासी पारी शुरू करेंगे पीके

“बीजेपी कई दशकों तक कहीं जाने वाली नहीं है और राहुल गांधी के साथ समस्या यह है कि उन्हें लगता है कि ये बस कुछ समय की बात है और लोग खुद ही नरेंद्र मोदी को सत्ता से बाहर कर देंगे”
” कांग्रेस को यूपीए के अध्यक्ष का पद छोड़ देना चाहिए, क्योंकि पूरे विपक्ष का मतलब कांग्रेस नहीं है, उसमें और भी पार्टियां हैं। इसलिए उन्हें साथ मिलकर तय करना चाहिए कि अध्यक्ष कौन होगा? कांग्रेस को हटकर दूसरे को मौका देना चाहिए। कांग्रेस ने 1984 के बाद कोई भी आम चुनाव नहीं जीते है बल्कि गठबंधन के सहारे सरकार चलाई है।”
 ” कांग्रेस जिसके नेतृत्व में पिछले 10 साल से चुनाव लड़े गए हैं और 90 फीसदी में हार मिली है। अब जो भी लीडर था, नैतिकता और रणनीतिक भावना यह कहती है कि आप दूर हो जाएं और किसी और को मौका दें।”
कांग्रेस और खासकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और युवराज राहुल गांधी के लिए अपरोक्ष रूप से कही गई यह बातें किसी और ने नहीं बल्कि पीके यानि प्रशांत किशोर ने कही है। वही प्रशांत किशोर जिनकी आजकल कांग्रेस में जाने की चर्चा जोरों पर चल रही है। अब तक रणनीतिकार के रूप में पहचान बनाए हुए पीके अब एक राजनीतिकार के रूप में स्थापित होना चाहते हैं।
 इसके लिए उन्हें कांग्रेस के अलावा कोई ऑप्शन भी दिखाई नहीं दे रहा है। हालांकि कांग्रेस को भी अब प्रशांत किशोर जैसे युवा नेतृत्व की जरूरत है। ऐसे में कहा भी जा सकता है कि प्रशांत किशोर को कोई और नहीं तो कांग्रेस को कोई ठौर नहीं।
 पहले भाजपा और फिर जेडीयू में नंबर दो कि स्थिति में रहकर अपने राजनीतिक कौशल का परिचय दे चुके प्रशांत किशोर फिलहाल कांग्रेस में अपने पैर जमाने की कोशिश में लगे हुए हैं । हालांकि उनकी यह कोशिश पिछले 1 साल से जारी है। लेकिन 2 दिन पहले जिस तरह से उनकी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ 4 घंटे तक बैठक हुई और गहन विचार विमर्श हुआ उससे लग रहा है कि इस बार प्रशांत किशोर और कांग्रेस पार्टी दोनों ही गंभीर है।
फिलहाल, प्रशांत किशोर को पार्टी में लेकर कांग्रेस 2024 का लक्ष्य निर्धारित करना चाहती है। आगामी 2024 में लोकसभा चुनाव होने हैं ।ऐसे में कांग्रेस को अपने आप को एक बार फिर खड़ा करने की तैयारी करनी है। इसके लिए पार्टी युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाना चाहती है।
 गत विधानसभा चुनाव में जिस तरह कांग्रेस ने प्रियंका गांधी के सहारे यूपी का चुनाव लड़ा और पार्टी में युवराज राहुल गांधी को आगे किया जा रहा है उससे लग रहा है कि अब देश की यह सबसे पुरानी पार्टी पर कुंडली मारे बैठे वयोवृद्ध नेताओं को साइड करना चाहती है। पिछले दिनों प्रशांत किशोर को कांग्रेस में शामिल करने के साथ ही यह भी चर्चा जोरों पर चली थी कि वह पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनना चाहते हैं। तब पार्टी हाईकमान ने इसके लिए हरी झंडी नहीं दी थी ।
लेकिन इस बार प्रशांत किशोर ने खुद कहा है कि वह कांग्रेस में ना कोई पद लेंगे और ना ही उनकी पार्टी में शामिल होने की कोई शर्त होगी । लेकिन इसके साथ ही प्रशांत किशोर यह चाहते हैं कि उनके प्लान 2024 के साथ कोई समझौता नहीं होगा ।
प्रशांत किशोर का यह प्लान आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बनाया गया है। जिसमें वह अपनी बातों को स्पष्ट करते हुए हाईकमान के सामने कह चुके हैं कि कैसे मुख्यधारा की मीडिया की परवाह किए बिना कांग्रेस अपनी बात रोजाना कम से कम 50 करोड़ लोगों तक सफलतापूर्वक पहुंचा सकती है। प्रशांत किशोर के इस दावे को सुनकर वहां मौजूद सभी नेता खासा प्रभावित हुए थे।
गौरतलब है कि 2 दिन पहले जब प्रशांत किशोर सोनिया गांधी, राहुल गांधी प्रियंका गांधी से मिलने गए तो उनके साथ 15 शीर्ष नेताओं की बैठक कराई गई थी। इस बैठक में एक तरफ शीर्ष नेताओं के साथ प्रशांत किशोर का संवाद भी हुआ तो दूसरी तरफ पार्टी नेताओं की शंका और आशंकाओं का भी समाधान किया गया। इससे प्रशांत किशोर और कांग्रेस नेताओं के बीच वर्षों से जमी बर्फ पिघली नजर आई है। इससे लग रहा है कि भविष्य में प्रशांत किशोर और कांग्रेस पार्टी का आपसी तालमेल का रास्ता भी साफ हो सकता है।

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