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पायलट – गहलोत समन्वय समिति: 10 माह बाद भी क्यों नहीं आई जांच रिपोर्ट?

राजस्थान की कांग्रेस राजनीति में दो ध्रुव आपस में एक दूसरे से पिछले साल टकराए थे । तब डिप्टी सीएम और प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट अपनी ही सरकार के खिलाफ बगावत कर गए थे। सचिन के साथ उस समय उनकी पार्टी के 19 विधायक थे। तब कयास लगाए जाने लगें थे कि ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरह ही सचिन पायलट भी भाजपा में चले जाएंगे ।

लेकिन एक महीने तक चले घटनाक्रम के बाद आखिर कांग्रेस हाईकमान ने इस मामले पर 3 सदस्यों की समन्वय समिति का गठन किया था। इस समिति के गठन करते ही कहा गया था कि यह समिति सचिन पायलट और उनके साथी विधायको के अलावा प्रदेश में कांग्रेस में आ रही दरार की जांच करेगी। साथ ही उन मुद्दों की भी तह में जाएगी जिन को लेकर सचिन पायलट मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के विरोध में मुखर हुए थे। लेकिन आज समिति को गठित हुए 10 माह हो गए हैं। अभी तक भी समिति ने इस मामले में एक कदम भी नहीं बढ़ाया है।

शायद यही वजह है कि एक बार फिर से राजस्थान कांग्रेस में पायलट और गहलोत गुट के बीज सियासी आग लगनी शुरू हो गई है। हाल ही में विधायक हेमाराम चौधरी का इस्तीफा इस आग को सुलगाता हुआ नजर आ रहा है। राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर कांग्रेस के दो दिग्गज नेता आमने सामने आते दिख रहे हैं।

14 जुलाई को सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बाद से राजस्थान की सियासत में भूचाल आया था और करीब एक महीने तक सियासी ड्रामा चलता रहा था।

अशोक गहलोत के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलने वाले सचिन पायलट के साथ क़रीब 19 विधायक थे। राज्य सरकार ने उनपर सरकार गिराने की साज़िश रचने का आरोप लगाया था। जिससे सचिन पायलट ख़ासे नाराज़ हुए थे और उन्होंने अपने समर्थकों के साथ बग़ावत कर दी थी। जिसके बाद कांग्रेस ने सचिन पायलट से राजस्थान के उप-मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष का पद छीन लिया था।

जो कुछ हुआ, उसके लिए कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व ज़िम्मेदार बताया गया। क्योंकि पार्टी हाई कमान ने राजस्थान में सत्ता के दो शक्ति केंद्र खड़े कर दिए थे। इससे दोनों केंद्रों में लगातार मनमुटाव और वर्चस्व की लड़ाई चलती रही। लेकिन हाई कमान ख़ामोशी से देखता रहा। जिसका परिणाम पायलट और गहलोत की आपसी खींचतान सामने आई।

आखिरकार राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए 10 अगस्त 2020 को हाई कमान को फैसला लेना पडा। अहमद पटेल, केसी वेणुगोपाल, अजय माकन के रूप में तीन सदस्यीय कमेटी नियुक्त की गई। इसके अलावा अजय माकन को अविनाश पांडे की जगह राजस्थान मामलों का प्रभारी महासचिव नियुक्त किया गया है। हालांकि समिति के एक सदस्य अहमद पटेल की मौत हो गई है।

राजस्थान कांग्रेस और सरकार में पायलट और गहलोत गुट के बीच मचे घमासान को खत्म करने के लिए ये फैसले किए गए। इसके बाद कांग्रेस सचिन पायलट को मनाने में कामयाब हो गई थी और 14 अगस्त 2020 को शुरू होने वाले राजस्थान विधानसभा सत्र से पहले सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ मिलकर काम करने की घोषणा की थी।

याद रहे कि पिछले महीने ही पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने खुलकर कहा था कि कई माह पहले एक कमेटी बनी थी। मुझे विश्वास है कि अब और ज्यादा विलंब नहीं होगा। जो चर्चाएं की गई थीं और जिन मुद्दों पर आम सहमति बनी थी, उन पर तुरंत प्रभाव से कार्रवाई होनी चाहिए। सचिन की इन बातों का संकेत कांग्रेस हाईकमान को तुरंत समझ जाना चाहिए। अभी भी समय है समिति इस मामले में अपनी स्पष्ट  जांच सबके सामने रख उनका समाधान कराए।

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