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सियासी जमीन के लिए आज से पायलट की उड़ान

पूरे देश में जब किसान आंदोलन अपने उफान पर है , ऐसे में किसान नेता भी अपना दम खम दिखाना चाहते हैं । इसके चलते कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे राजेश पायलट के पुत्र सचिन पायलट अब किसानों के लिए मैदान में उतर चुके हैं । जिस तरह उत्तर प्रदेश में किसानों के नेता रहे महेंद्र सिंह टिकेट के पुत्र राकेश टिकैत ने कितने मोर्चा संभाल रखा है ठीक उसी तरह सचिन पायलट भी अपने पिता के पदचिन्ह पर चल चुके है। आज उनकी राजस्थान के दौसा में किसान रैली है। जहा एक लाख किसान जुटने का दावा किया जा रहा है। इसके बाद पायलट प्रदेश में लगातार किसान रैली करेंगे।

जग जाहिर है कि राजेश पायलट किसान नेता के तौर पर पूरे देश में उठे थे । उन्हें किसानों की कोई भी कार्यक्रम हो तो सबसे पहले बुलाया जाता था । लेकिन उनकी मौत के बाद उनके बेटे सचिन पायलट में जब सियासी पारी शुरू की तो वह किसान नेता बनने की बजाए युवा तुर्क बन गए।

हालांकि, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सचिन पायलट का 36 का आंकड़ा जगजाहिर है। कोरोनकाल के दौरान पायलट और अशोक गहलोत की सियासी जंग में पायलट को पीछे लौटने पर मजबूर कर दिया था । इसके बाद वह चुप्पी साध गए थे। कांग्रेस ने सचिन पायलट को आश्वासन की घुट्टी पिलाई। राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी अजय माकन ने पायलट को कांग्रेस की मुख्य धारा में जोड़ने के प्रयास किए जो अभी भी जारी है।

राजस्थान की कॉन्ग्रेस राजनीति में पायलट को अपना वजूद कायम करने के लिए संघर्ष के लिए मैदान में उतरना पड़ा है। वह चाहते हैं कि आगामी मंत्री परिषद गठन में उनके कुछ समर्थक शामिल हो । इसके लिए खुद प्रदेश प्रभारी अजय माकन भी मुख्यमंत्री गहलोत के सामने जोर लगा चुके हैं। लेकिन माकन और गहलोत की तीन घंटे तक चली इस मीटिंग कोई सकारात्मक परिणाम नही निकला ।

यहां तक कि बाद में अजय माकन यह कहते दिखे की पायलट के तीन समर्थक मंत्री तो बना दीजिए। लेकिन मुख्यमंत्री इसके लिए भी सहमत नहीं हुए । यहां तक कि प्रदेश के एक कैबिनेट मंत्री जो गहलोत के करीबी बताई जाते हैं ने भी यह तक यह दिया कि मुख्यमंत्री को स्वतंत्र निर्णय लेने चाहिए। संकेत साफ है कि मुख्यमंत्री गहलोत अब मंत्रिमंडल विस्तार में किसी का दवाब नही सहेंगे। पायलट की इन किसान रैलियों को इसी दवाब की राजनीति के तहत देखा जा रहा है।

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