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देश के सबसे बड़े कूड़े के पहाड़ से लोगों को मिलेगी राहत !

गाजीपुर में 140 लाख टन के पहाड़ से लोगों को जल्द ही राहत मिलेंगी। इसे खत्म करने के लिए ट्रामल-कम-बैलेस्टिक मशीन  लगाई गई है। इस मशीन का उद्घाटन सांसद गौतम गंभीर ने किया है। यह  मशीन एक दिन में 640 मीट्रिक टन कूड़े का निस्तारण करेगी।ट्रामल-कम-बैलेस्टिक मशीन चार हिस्सों में काम करेगी। मशीन में लगे बैलेस्टिक सेपरेटर से कूड़े को तीन भागों में अलग किया जायेगा । प्रथम वर्ग में हल्के अपशिष्ट जैसे प्लास्टिक, पॉलिथिन और कपड़े आदि, दूसरे वर्ग में भारी अपशिष्ट जैसे शीशा और धातु से बने पदार्थ और तीसरे वर्ग में अन्य छोटे पदार्थों को अलग किया जाएगा। गाज़ीपुर लैंडफिल साइट करीब  9 एकड़ में फैली हुई है तथा इस बढ़ते कूड़े के पहाड़ को लेकर जो हमारे आस -पास का  पर्यावण वो इससे पूरी  तरह से प्रभावित है।  65 मीटर ऊंचे इस कूड़े के पाहड़ से यह कई बार इतना  घातक साबित हुआ है कि पिछली बार इसके फ़टने से  कूड़े का ढेर इतनी तेजी से नीचे आया कि वहां से गुजर रही जेसीबी और तीन कारों को नहर में खींच ले गया। कई बाइकें और स्कूटी भी उसकी चपेट में आने से नहर में जा समाईं। नहर के किनारे बनी लोहे की रेलिंग तक टूटकर बह गई। इस हादसे में  स्थानीय लोगों ने  मिलकर लोगों  की जान बचाई थी। इसमें दबे प्लास्टिक , सड़े -गलें मलबे से जो गैस उत्पन होती है वो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है।

ट्रामल-कम-बैलेस्टिक मशीन को ईस्ट एमसीडी के इंजीनियरों ने बनाया है। यह पहली ऐसी मशीन है जो एक ही बार में मिट्टी पत्थर कंस्ट्रक्शन मैटेरियल और कूड़ा अलग-अलग कर रही है। अभी भी गाजीपुर लैंडफिल साइट पर 140 लाख मैट्रिक टन कूड़ा पड़ा हुआ है। ऐसा अनुमान है यह प्रोजेक्ट 3 साल में पूरा हो जायेगा साथ ही इसमें कार्य बहुत तेजी से हो रहा है। क़ुतुब मीनार जितने ऊंचे इस पहाड़ को आसानी से नहीं हटाया जा सकता ईस्ट एमसीडी के इंजीनियरों द्वारा बनाई गई उच्च तकनीक की  मशीन इस कूड़े हटाने के साथ-साथ इसके कूड़े का उपयोग भी करेगी।

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