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हिंसा की चपेट में किसान आंदोलन

किसान आंदोलन

लखीमपुर खीरी हिंसा का विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक लोगों का आक्रोश देखने को मिल रहा है। इसी बीच पीड़ित किसान परिवार से मिलने जा रहीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्हें गिरफ्तार करके सीतापुर पुलिस लाइन ले जाया गया है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के आधिकारिक ट्वीट द्वारा इसकी जानकारी दी गई।

दरअसल, प्रियंका गांधी जैसे ही दिल्ली से लखनऊ पहुंची तो उन्हें लखनऊ स्थित उनके घर में प्रशासन ने नजरबंद कर दिया। लेकिन कुछ समय बाद प्रियंका गांधी पुलिस को चकमा देते हुए घर से लखीमपुर के लिए रवाना हो गई। जैसे ही पुलिस को इसकी सूचना मिली वैसे ही लखनऊ से बाहर उन्हें रोक लिया गया। प्रियंका गांधी किसी तरह एक बार फिर पुलिस की आँखों से बच लखीमपुर खीरी के लिए निकल गई। इस दौरान प्रियंका गांधी किसानों के पक्ष में और वहां जाने को लेकर संबंधित कई वीडियो भी जारी करती रहीं।

जिसमें उन्होंने बीजेपी और योगी पर लोकतंत्र को हड़प लेने और अपनी तानाशाही को स्थापित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह देश किसानों का है और उन्हीं के देश में उनकी हत्या की जा रही है। और यह सब कुछ सरकार और उसमें शामिल लोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह चुप बैठने वाली नहीं हैं। इस समय जब पीड़ितों को उनकी जरूरत है तो वह उनसे मिलकर ही रहेंगी और ऐसा करने से उन्हें कोई नहीं रोक सकता है।

घटना स्थल पर रात में ही पहुंचे राकेश टिकैत

इस घटना की खबर मिलते ही भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत भी रात में ही घटनास्थल पहुंचे। उन्होंने कहा कि लखीमपुर खीरी में हुई घटना बहुत दुखद है। इस घटना ने सरकार के क्रूर और अलोकतांत्रिक चेहरे को एक बार फिर उजागर कर दिया है। किसान आंदोलन को दबाने के लिए सरकार किस हद तक गिर सकती है। सरकार और सरकार में बैठे लोगों ने आज फिर बता दिया। लेकिन सरकार भूल रही है कि अपने हक के लिए हम मुगलों और फिरंगियों के आगे भी नहीं झुके।

सरकार किसान के धैर्य की और परीक्षा न लें। किसान मर सकता है पर डरने वाला नहीं है। सरकार होश में आए और किसानों के हत्यारों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी करे। साथ ही राकेश टिकैत ने किसानों से अपील है कि शांति बनाएं रखें जीत किसानों की ही होगी। सरकार होश में ना आई तो भाजपा के नेताओं के लिए घर से निकलना मुश्किल हो जायेगा।

क्या है पूरा मामला ?

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य पहुंचे थे। इसकी जानकारी जैसे ही संयुक्त किसान मोर्चा के किसानों को मिली वह विरोध करने पहुंच गए। वहां पहुंचते ही सबसे पहले किसानों ने हेलीपैड पर कब्जा कर लिया। जिसके कारण सड़क के रास्ते अजय मिश्र और केशव मौर्य का काफिला तिकोनिया चौराहे से गुजरा। लेकिन वहां भी किसान उन्हें काले झंडे दिखाने दौड़ पड़े। इसी दौरान अजय मिश्रा के बेटे आशीष ने किसानों पर गाड़ी चढ़ा दीं। जिसमें 8 लोगों की मौत गई और लगभग 18 लोग घायल बताएं जा रहे हैं।

गौरतलब है कि किसान हफ्ते भर पहले दिए केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र टेनी के बयान से बेहद नाराज थे। किसानों का कहना है कि मंत्री बनने के बाद अजय मिश्रा ने कहा था कि हम अपनी पर आ गए तो हम क्या कर सकते हैं यह सब जानते हैं। 26 सितंबर को अजय मिश्रा को लखीमपुर के संपूर्णानगर में काले झंडे दिखाए गए थे। जनसभा में तब उन्होंने मंच से किसानों को धमकी दी थी और कहा था कि 10 महीने हो गए पर किसानों के अगुवा यानी संयुक्त किसान मोर्चा के लोग प्रधानमंत्री का सामना नहीं कर पा रहे हैं।

अजय मिश्र टेनी ने संयुक्त मोर्चा के किसानों से कहा था कि सुधर जाओ नहीं तो सामना करो वरना हम सुधार देंगे, सिर्फ 2 मिनट लगेंगे। विधायक, सांसद बनने से पहले से लोग मेरे विषय में जानते होंगे कि मैं किसी भी चुनौती से कभी नहीं भागता हूं। इन्हीं सब बातों से नाराज किसान विरोध कर रहे थे।

इससे पहले भी किसान आंदोलन हिंसा की चपेट में आता रहा है। आइये लखीमपुर हिंसा से पहले हुई घटनाओं पर एक नजर डालते हैं।
दो अक्तूबर 2018, यूपी-दिल्ली के बीच गाजीपुर बॉर्डर

हरिद्वार से 23 सितंबर को चली किसानों की पदयात्रा 2 अक्तूबर 2018 को यूपी-दिल्ली स्थित गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंची। लेकिन तब दिल्ली पुलिस ने किसानों को राजधानी में एंट्री करने से रोक दिया था। साथ ही पर किसानों पर आंसू गैस के गोले बरसाए। पानी की बौछार की। किसानों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठियां भी चलाईं।

26 जनवरी 2021, लाल किला, दिल्ली

दिल्ली के सभी बॉर्डरों पर धरने पर बैठे किसानों ने 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में ट्रैक्टर परेड निकाली। इसी दौरान पुलिस ने लाल किला जा रहे किसानों को रोकने के लिए कई जगह आंसू गैस के गोले छोड़े थे। इस दौरान दिल्ली आईटीओ पर ट्रैक्टर पलटने से एक किसान की मौत हो गई। आंदोलन में 500 से ज्यादा किसानों पर करीब 48 मुकदमे दर्ज हुए। इस घटना में डेढ़ दर्जन से ज्यादा किसानों को जेल जाना पड़ा।और उन पर देशविरोधी गतिविधियों का आरोप लगाया गया था।

28 अगस्त 2021, करनाल, हरियाणा

हरियाणा के करनाल में टोल प्लाजा के नजदीक भी तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर लाल का विरोध कर रहे थे। इस दौरान पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज कर दिया, जिसमें एक किसान की मौत हो गई। इसे लेकर चार दिन तक हजारों किसानों ने करनाल में लघु सचिवालय का घेराव किया गया था।

अब तक किसान आंदोलन में 605 किसानों की मौत हो चुकी है। लगभग एक साल से चल रहे है इस आंदोलन का अभी तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है।

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