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पतंजलि ने कहा, कोरोनिल से जुड़ी जानकारी सरकार को दी गई, कम्युनिकेशन गैप हुआ दूर

कोरोनिल: बाबा रामदेव और 4 अन्य लोगों के खिलाफ जयपुर में FIR दर्ज

दुनिया भर के वैज्ञानिक कोरोनो वायरस की वैक्सीन की खोज करने में जुटे हैं। इसी योगगुरु बाबा रामदेव ने दावा किया है कि उन्होंने कोरोना का दवा खोज लिया है। उन्होंने मंगलवार को कोरोनिल नाम से एक लॉन्च किया। लेकिन दाला के लॉन्च होते ही कुछ घंटों के भीतर केंद्र सरकार ने इसपर जांच बैठा दी।

हालांकि, पतंजलि ने दावा किया कि कोरोनिल कोरोना के लिए 100% इलाज है। आयुष मंत्रालय की ओर से इसपर विस्तृत जानकारी दिए जाने तक विज्ञापन को रोकने का आदेश दिया गया था। उसके कुछ घंटों के भीतर ही पतंजलि की तरफ से दावा किया गया कि सरकार ने जो जानकारी मांगी थी उनकी तरफ से मुहैया करा दी गई है।

पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर आचार्य बालकृष्ण ने इस संबंध में एक ट्वीट किया है। उन्होंने अपने ट्वीट में बताया है कि सरकार की तरफ से जो भी जानकारी उनसे मांगी गई थी, वह उनकी तरफ से आयुष मंत्रालय को दे दी गई है।

बालकृष्ण ने ट्वीट किया, “यह सरकार आयुर्वेद को प्रोत्साहन और गौरव देने वाली है। जो कम्युनिकेशन गैप था, वह दूर हो गया है। क्लीनिकल ट्रायल के जितने भी स्टैंडर्ड पैरामीटर्स हैं, उन सभी को 100 फीसदी पूरा किया है। इसकी सारी जानकारी हमने आयुष मंत्रालय को दे दी है।” ट्वीट के साथ कोरोनिल से जुड़ी एक पैम्फ्लेट भी उन्होंने शेयर की है।

कंपनी का दावा है कि कोरोनिल औषधि का परीक्षण 280 कोरोना रोगियों पर किया गया। जिसके बाद 69 प्रतिशत कोरोना रोगी 3 दिनों के भीतर ठीक हो गए। जबकि 100 प्रतिशत कोरोना रोगियों को सात दिनों में ठीक किया गया।

आयुष मंत्रालय ने दवा के विवरण पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था, जहां यह चिकित्सकीय रूप से परीक्षण किया गया था, जिन्होंने इसे मंजूरी दी थी और परिणाम क्या थे। उत्तराखंड राज्य के संबंधित लाइसेंसिंग प्राधिकरण को भी इस उत्पाद के लिए अनुमति का विवरण प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था।

पतंजलि ने कहा कि कोरोनिल में गिलोय, अश्वगंधा, तुलसी, कुसुम का रस और परमाणु तेल का मिश्रण है। दवा में निहित अश्वगंधा वायरस के रिसेप्टर बाइंडिंग डोमेन को शरीर में प्रवेश करने से रोकता है। पतंजलि रिसर्च सेंटर और नेशनल मेडिकल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस निम्स द्वारा संयुक्त रूप से परीक्षण किया गया था।

पतंजलि आयुर्देव के दावे पर आयुष मंत्री श्रीपद नायक ने कहा कि यह अच्छी बात है कि योग गुरु बाबा रामदेव ने देश को नई दवा दी है। लेकिन नियम के अनुसार पहले आयुष मंत्रालय में जांच के लिए देना होगा।

सरकार ने कहा कि दवा की वैज्ञानिक जांच नहीं हुई है। आयुष मंत्रालय ने दवा के लाइसेंस सहित पूरा ब्योरा मांगा है। मंत्रालय ने दवा में इस्तेमाल सामग्री, दवा पर रिसर्च की जगहों, अस्पतालों, प्रोटोकॉल, सैंपल का आकार, इंस्टीट्यूशनल एथिक्स कमेटी क्लीयरेंस, क्लीनिकल ट्रायल रजिस्ट्रेशन और ट्रायल के परिणाम का डेटा मांगा है।

केंद्र ने पतंजलि आयुर्वेद से कहा कि आयुर्वेदिक दवाओं समेत सभी दवाओं का प्रचार ड्रग्स एंंड मैजिक रेमेडिज एक्ट-1954 और कोविड-19 महामारी के मद्देनजर केंद्र सरकार द्वारा जारी नियमों और निर्देशों के अनुसार नियमित होता है।

आयुष मंत्रालय ने 21 अप्रैल को जारी नोटिफिकेशन में कोविड-19 पर किए जाने वाले शोध की जरूरतों और तरीकों के बारे में बताया था। यह नोटिफिकेशन कंपनियों को सरकारी मंजूरी के बिना इलाज के दावे करने से रोकता है।

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