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संसद के भीतर बहस तो बाहर चलेगा किसान आंदोलन 

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर तीनों कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों का आंदोलन जारी है। ऐसे में 22 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सेशन में गरमाहट के आसार अभी से नजर आने लगे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि वो सभी विपक्षी दलों को चेतावनी पत्र  भेजेगा। किसान मोर्चा विपक्षी दलों से यह निश्चित करने के लिए कहेगा कि मानसून सेशन का इस्तेमाल किसान आंदोलन के समर्थन के लिए किया जाए। मोर्चा ने कहा कि सत्र शुरू होने के दिन से 200 किसान संसद के बाहर सत्र चलने तक रोज प्रदर्शन करेंगे। ऐसे में अब जहां  संसद के भीतर मानसून सत्र पर बहस चलेगी तो बाहर किसानों का आंदोलन और मुखर होगा।

वहीं, भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि केंद्र सरकार को कोई राजनीतिक पार्टी नहीं, बल्कि एक कंपनी चला रही है। तभी तो अब तक मामला सुलझाने के लिए क्यों कोई बातचीत शुरू नहीं की गई।दरअसल , हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को प्रचंड जीत मिली। बंगाल की मुख्यमंत्री बनने के बाद ममता बनर्जी ने राकेश टिकैत से मुलाकात की थी।इस मुलाक़ात में  तय हुआ था कि गैर राजनीतिक कहे जा रहे किसानों के धरना स्थल को अब राजनीतिक रंग दिया जाएगा।

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ममता का यह मंच किसानों के लिए बने मंच से अलग होगा। इसके अलावा तृणमूल सदन में भी किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरेगी। बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ प्रचार कर चुके राकेश टिकैत उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी भाजपा की मुखालफत करेंगे।

सूत्रों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में तृणमूल कांग्रेस बहुजन समाज पार्टी के कई नेताओं से संपर्क में है। मायावती के बेहद करीबी सतीश चंद्र मिश्रा भी इनमें शामिल हैं। अभी यह साफ नहीं है कि तृणमूल अकेले चुनाव लड़ेगी या किसी के साथ।

संसद के बाहर किसान और अंदर विपक्षी सांसद सरकार को घेरेंगे

संसद का मानसून सेशन शुरू होने जा रहा है। किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि हम संसद के बाहर बैठेंगे और सांसदों से अंदर मामला उठाने के लिए कहेंगे। सांसदों से कहेंगे कि वे पार्लियामेंट छोड़कर न जाएं, बल्कि समाधान नहीं मिलने तक सेशन न चलने दें। अगर विपक्षी सांसद हमारा मुद्दा नहीं उठा सकते तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।

तीन  कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे किसान

किसान महीनों से दिल्ली में डेरा जमाए बैठे हैं और केंद्र सरकार से तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर विरोध जता रहे हैं। यह तीन कानून कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य विधेयक 2020, कृषक कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020 है।

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