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पालघर मॉब लिंचिंग में सांप्रदायिक रंग, देशमुख ने कहा अलग धर्म के नहीं आरोपी

पालघर मॉब लिंचिंग में सांप्रदायिक रंग, देशमुख ने कहा अलग धर्म के नहीं आरोपी

मुंबई से करीब 130 किलोमीटर दूर पालघर मॉब लिंचिंग की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर दिया है। तीन साधुओं की जिस तरह निर्मम तरीके से हत्या की गई वह बेहद ही चौंकाने वाली घटना है। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि 4 दिन तक मीडिया इस मामले में चुप्पी साधे रहा।

जो मीडिया बेवजह की बातों को सांप्रदायिक रूप से रंग कर उसे पेश करता है, उसे शायद इस मामले में न्यूज नजर नहीं आई। एक जमाती भी अगर कॉरेंटाइन से गायब हो जाता है तो मीडिया पूरा आसमान सर पर उठा लेती हैं। लेकिन तीन साधुओं की मॉब लिंचिंग मामले में मीडिया की चुप्पी सवालों और संदेशों में हैं।

हालांकि, कल इस मामले से जुड़े दो वीडियो सामने आने के बाद कुछ चैनल ने थोड़ा बहुत इसे दिखाकर खबर चलाने की औपचारिकता पूरी कर ली। लेकिन फिर भी यह सच सामने नहीं लाया गया कि मारने वाले और मरने वाले दोनों ही एक ही धर्म संप्रदाय से जुड़े हैं। ऐसा करके शायद मीडिया उन सांप्रदायिक लोगों को भरपूर मौका देना चाहते हैं जो आजकल हर मामले को एक धर्म विशेष से जोड़कर उसके खिलाफ दुष्प्रचार करने में लग जाता है।

पालघर मॉब लिंचिंग मामले में भी ऐसा ही हुआ। कल वीडियो जारी होते ही उन लोगों को मौका मिल गया जो सांप्रदायिकता की राजनीति पर रोटियां सेकने के लिए अपने तवे हर वक्त गरम रखते हैं। सोशल मीडिया पर यह मामला अब हत्यारों या हमलावरों की गिरफ्तारी या उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग करने की बजाए एक धर्म संप्रदाय के लोगों को निशाना बनाने की ओर जाता हुआ प्रतीत हो रहा है।

शायद यही वजह है कि महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री अनिल देशमुख को इस मामले में ट्वीट करके कहना पड़ा कि यह मामला दो अलग-अलग धर्म संप्रदाय का नहीं बल्कि एक का ही है। मरने वाले और मारने वाले दोनों अलग-अलग धर्म के नहीं है।

इसी के साथ ही महाराष्ट्र के गृह राज्यमंत्री में अपने ट्वीट में उन लोगों को भी साफ चेताया है जो इस मामले को संप्रदायिक रंग में रंगना चाहते हैं। अनिल देशमुख ने कहा है कि किसी भी तरह का धार्मिक भड़काने और समाज विरोधी काम किया गया तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, इस मामले में हमलावरों के खिलाफ जांच बिठा दी गई है और साथ ही 101 लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। जिनमें 9 नाबालिग भी शामिल है।

गौरतलब है कि गुरूवार (17 अप्रैल) को रात को 10 बजे 3 साधुओं को करीब 200 लोगों की भीड़ ने तलवार, लाठी-डंडों, ईटों से पीट-पीटकर सरेआम मौत के घाट उतार दिया। यह मामला महाराष्ट्र के पालघर जिले के गढ़चिचले गांव में हुआ।

जहां मुंबई के कांदीवली से गुजरात के सूरत में तीन साधु अंतिम संस्कार में भाग लेने जा रहे थे। ग्रामीणों ने तीनों लोगों को बच्चा चोर समझा और उनपर हमला कर दिया। जबकि इस मामले से जुड़े दो वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए हैं।

जिसमें एक वीडियो में पुलिसकर्मी साधु को कमरे के अंदर से निकालकर साथ लाते हुए दिख रहे हैं। साधु पुलिसकर्मी के साथ डरा-सहमा बाहर निकल रहा है और लोगों से हाथ जोड़कर अपने ऊपर रहम की भीख मांग रहा है।

इसी दौरान भीड़ साधु के साथ मारपीट पर उतर आती है तो पुलिसकर्मी साधु को भीड़ में अकेला छोड़ देता है। लगता है कि पुलिसकर्मी अपनी जान बचाने के लिए पीछे हट गया। लेकिन जैसे ही साधु जान बचाकर भागने की कोशिश करता है तो उस पर भीड़ टूट पड़ती है। लाठिया-ठंडे, ईट-पत्थर बरसाने लगते हैं। साधु जमीन पर गिर जाता है।

जबकि दूसरे वीडियो में दिखाया गया है कि एक साधु के पीछे भीड़ भाग रही है और उसे उल्टी पड़ी गाड़ी के दूसरी तरफ ले जाकर मारने लगती है। जबकि दूसरी तरफ एक और व्यक्ति को भीड़ बुरी तरह मार रही है। उनमें से एक उन्मादी दूसरे से कहता है कि ‘बस अब मत मार, मर गया।

यह वीडियो के दृश्य देखकर अच्छे अच्छों का कलेजा कांप जाता है। आखिर इन तीनों लोगों का कसूर क्या था? महाराष्ट्र पुलिस की इस मामले में शुरू से ही लापरवाही सामने आ रही हैं। जानकारी के अनुसार, 17 अप्रैल की शाम को जब तीनो लोग वैन में जंगल के रास्ते से गुजरात के सूरत के लिए निकल रहे थे।

लॉकडाउन के बावजूद इन तीनों लोगों ने मुंबई के कांदीवली से करीब 120 किलोमीटर की दूरी तय कर दी थी। वहां से यह महाराष्ट्र और केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नागर हवेली की सीमा पर बसे गढ़चिचल गांव पहुंच गए थे। तभी एक वन विभाग के संतरी ने उनको रोक लिया। उनसे पूछताछ की।

इसी दौरान भीड़ बढ़ने लगी। भीड़ तीनों लोगों के साथ मारपीट करने लगी और इसके साथ ही उनकी गाड़ी की तलाशी लेने लगी। इस पर तीनों लोगों ने विरोध किया तो भीड़ उन्हें मारने पर आमादा हो गई।

बताया जाता है कि इसी दौरान वन विभाग के संतरी ने पुलिस को फोन किया। पुलिस के महज चार लोग घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने तीनों लोगों को घेरे में ले लिया था और काफी हद तक वह भीड से उन्हें बचाने में कामयाब भी हो गए थे।

हालांकि, जब तक पुलिसकर्मी वहा पहुंचे, तीनों लोग जख्मी हो चुके थे। लेकिन तीनों जख्मी लोगों को किसी प्रकार पुलिस ने अपनी गाड़ी में बिठाया तो फिर भीड़ ने पुलिस गाड़ी पर हमला कर दिया।

जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से इलाके में यह अफवाह चल रही थी कि रात में फसल काटने वाला गिरोह और बच्चे को उठाने वाले चोर गिरोह सक्रिय है। इनसे बचने के लिए ग्रामीणों में निगरानी दल का भी गठन किया था। बताया जाता है कि जब वन विभाग का संतरी तीनों लोगों के साथ बातचीत कर रहा था तो तभी निगरानी दल के लोग वहां पहुंच गए थे।

दल के लोग संतरी के सामने ही उनके साथ मारपीट करने लगे थे। इस मामले में पुलिस की लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब घटनास्थल पर ही 3 लोग मारे गए तो पुलिस उन्हें लेकर पोस्टमार्टम कराने आ गई। इसके बावजूद भी कई दिनों तक पुलिस यह कहती रही कि मृतको की पहचान नहीं हो पाई है।

हालांकि, इस मामले में पालघर के जिला अधिकारी कैलाश शिंदे ने बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सुशील गिरी महाराज जो कांदिवली में एक आश्रम में रहते हैं दो अन्य लोगों जयेश और नरेश येलगडे के साथ एक वेन में यात्रा कर रहे थे।

तीनों को ही गुजरात के सूरत में एक अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए जाना था। गाड़ी में सवार होकर यह तीनों जैसे ही गढचिचल गांव से निकल रहे थे इसी दौरान भीड़ ने उन्हें बच्चा चोर समझकर उन पर हमला कर दिया था।

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