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‘मौत की क्रियाओं’ से खत्म हुए ग्यारह जीवन

 

उत्तरी दिल्ली के बुराड़ी में एक ही परिवार के 11 लोगों की मौत। अब तक की जांच के मुताबिक यह परिवार ‘मौत की क्रियाओं’ के जरिए अपना जीवन खत्म किया। इसके पीछे ‘मोक्ष की प्राप्ति’ था उद्देश्य

पंद्रह अगस्त 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार लाल किला के प्राचीर से देश को संबोधित किया था। करीब घंटे भर के संबोधन में यहां सिर्फ वो लाइन ही जो इस घटना से संबंधित है। प्रधानमंत्री ने कहा था, ‘पूरे विश्व में हमारे देश के नौजवानों ने भारत की पहचान को बदल दिया है। विश्व भारत को क्या जानता था? ज्यादा नहीं, अभी 25-30 साल पहले तक दुनिया के कई कोने ऐसे थे जो हिन्दुस्तान के लिए यही सोचते थे कि ये तो ‘सपेरों का देश’ है। ये सांप का खेल करने वाला देश है। काले जादू वाला देश है। लेकिन भाइयो-बहनो, हमारे 20-22-23 साल के नौजवानों ने कम्प्यूटर पर अंगुलियां घुमाते-घुमाते दुनिया को चकित कर दिया। विश्व में भारत की एक नई पहचान आईटी प्रोफेशन के नौजवानों ने दी। इसलिए हमारा सपना ‘डिजिटल इंडिया’ है।’
इस भाषण को दिए चार साल गुजर गए हैं। मगर उत्तरी दिल्ली के एक परिवार के 11 सदस्यों की रहस्यमय मौत ने देश की नई पहचान पर फिर से सोचने को मजबूर कर दिया है। क्या वाकई 21 वीं सदी का भारत 15 वीं सदी से अभी तक बाहर नहीं निकल पाया है। अभी तक की पुलिसिया जांच और मजिस्ट्रेट जांच इसे ‘सामूहिक आत्महत्या’ की ओर ही इशारा करती हैं। इन जांचों का आधार यह है कि बुराड़ी में भाटिया परिवार की तीन पीढ़ियों ने ‘मौत की क्रियाओं’ से अपनी जीवन लीला खत्म कर ली।
यदि यह सत्य है तो फिर इक्कीसवीं सदी, मंगल ग्रह पर जीवन, चांद पर शहर बसाने की वैज्ञानिक शोध को धक्का लगा है, क्योंकि वैज्ञानिकों, बुद्धिजीवियों आदि को सबसे पहले अपने लोगों के दिलो-दिमाग से तंत्र-मंत्र, काला जादू, मोक्ष की प्राप्ति जैसे शब्दों को इरेज करने के लिए काम करना होगा।

सबसे आश्चर्य वाली बात है कि यदि भाटिया परिवार ने मोक्ष की प्राप्ति के लिए सामूहिक आत्महत्या की है तो इन्हें मोक्ष दिलाने वाले तांत्रिक ने पूरे परिवार को इसके लिए कैसे तैयार किया होगा। मरने वाले में सबसे बड़ी 77 वर्षीय नारायणी देवी हैं तो सबसे छोटा 15 वर्षीय धु्रव और शिवम है। धु्रव और शिवम नई पीढ़ी के हैं। टैब पर फेसबुक, ट्वीटर, यू ट्यूब देखने वाले ध्रुव, शिवम जैसे न्यू जनरेशन के बच्चों को कैसे ‘मोक्ष की प्राप्ति’ के लिए तैयार किया गया होगा।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, खुदकुशी वाली जगह पर यानी जहां 10 लोगों के शव लटके हुए मिले उसके पास के कमरे से पुलिस को दो रजिस्टर मिले हैं। इनमें कई पेजों पर लिखा गया है तो कुछ खाली हैं। ये पेज हाथ से लिखे गए हैं।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक रजिस्टर के पेज पर लिखा है- ‘रात में एक बजे के बाद जाप शुरू करो।
मौत के पहले अपनी आंखें बंद करो, कपड़े और रुई रखकर।
मरते समय छटपटाहट होगी इसलिए अपने हाथ काबू करने के लिए उन्हें बांध लो।
ये काम शनिवार और गुरुवार को अच्छा रहेगा।’

रजिस्टर में लिखी इन लाइनों से अंदाजा लगाया जा रहा है कि मौत और मोक्ष को लेकर बने भ्रम से इतना बड़ा कांड हुआ होगा। रजिस्टर में किसी आध्यत्मिक गुरु का नाम नहीं है। मगर मौत की क्रियाओं को लेकर एक बड़ा हिस्सा उस रजिस्टर में दर्ज है। पुलिस ये भी पता लगा रही है कि रजिस्टर में लिखी हैंडराइटिंग पूरे परिवार में किसकी है। परिवार के सभी 11 लोग हर व्रत साथ करते थे। छोटे बेटा ललित के बारे में बताया जा रहा है कि वह पिछले पांच साल से मौन व्रत पर था। परिवार किसी आर्थिक तंगी में नहीं था। इससे यह नहीं कहा जा सकता कि परिवार कर्ज या आर्थिक तंगी से बचने के लिए तांत्रिक की शरण में गया होगा।

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