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राहुल गांधी ही संभालेंगे कांग्रेस की कमान

राहुल ने ग्राफिक्स शेयर कर केंद्र से पूछा- कोविड के खिलाफ लड़ाई में भारत की स्थिति अच्छी है?

राहुल गांधी के एक बार फिर से कांग्रेस अध्यक्ष बनने की प्रबल संभावनाएं हैं। लगता है कि सत्ताधारी भाजपा को भी इसका अहसास है। यही वजह है कि जब भी राहुल किसी मुद्दे पर बोलते हैं तो भाजपा के बड़े नेता उनके खिलाफ मोर्चा खोल देते हैं। बताया जाता है कि कांग्रेस के कई बड़े नेताओं की यही राय है कि राहुल फिर से पार्टी के अध्यक्ष बन जाएं। कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो वास्तव में राहुल गांधी पार्टी के भीतर उस परिवार के प्रतिनिधि हैं जिस परिवार से पूरे देश की जानता भलीभांति परिचित है। आज के हालात बेशक बदल गए हों, लेकिन दक्षिण भारत से लेकर उत्तर भारत तक और पूर्वोत्तर के राज्यों में भी हर जगह इसी परिवार की छत्रछाया में कांग्रेस ने लंबे समय तक राज किया है। कांग्रेसी इस सच्चाई से अच्छी तरह वाक़िफ़ हैं।

यही वजह है कि वे इसी परिवार को अपने नेतृत्व का केंद्र बिन्दु बनाए रखते हैं। सन1994-95 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंह राव से नाराज होकर नारायण दत्त तिवारी और अर्जुन सिंह जैसे दिग्गज नेताओं ने कांग्रेस से अलग होकर नई पार्टी बनाई तो तब भी उन्होंने जनता में यहीं संदेश दिया था कि उनकी पार्टी ही असली कांग्रेस है और इसे सोनिया गांधी जैसी वरिष्ठ नेता का आशीर्वाद प्राप्त है। उस वक्त कांग्रेस के भीतर इस बात की मांग जोर-शोर से उठी थी कि सोनिया गांधी आगे आकर पार्टी का नेतृत्व संभालें। हालांकि, उस वक्त तो नहीं, लेकिन बाद के वर्षों में यही हुआ और सोनिया के नेतृत्व में कांग्रेस मजबूत होकर केंद्र की सत्ता में भी आई। डाक्टर मनमोहन सिंह जैसे नेता उन्ही के पार्टी नेतृत्व संभालते पीएम बने। शायद अतीत के इन्हीं अनुभवों को देखते हुए ही आज भी कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता यही चाहते हैं कि राहुल गांधी को ही अध्यक्ष पद संभालना चाहिए।

बताया जाता है कि इस वक्त कांग्रेस में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत जैसे पुराने और अनुभवी नेता यही चाहते हैं कि राहुल फिर से पार्टी की बागडोर संभालें। खबर है कि अशोक गहलोत ने हाल में हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में जब यह मांग उठाई कि राहुल गांधी को एक बार फिर से पार्टी अध्यक्ष बनाया जाए तो बैठक में मौजूद कई नेताओं ने एक स्वर में इसका समर्थन किया। युवा कांग्रेस अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी ने तो लगे हाथ सुझाव भी दे दिया कि ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी को एक वर्चुअल सत्र बुलाकर राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप देनी चाहिए। गौरतलब है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए राहुल ने अध्यक्ष पद छोड़ दिया था। तब कई पार्टी नेताओं ने भी अपने पदों से इस्तीफे दे दिये थे। राहुल से अपने फैसले पर पुनर्विचार की जोरदार मांग उठी थी , लेकिन वे नहीं माने और तब से सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर काम कर रही हैं।

सोनिया अंतरिम अध्यक्ष अवश्य हैं, लेकिन जनहित के मुद्दों और केंद्र सरकार की नीतियों के मामले में राहुल ही ज्यादा मुखर नजर आ रहे हैं। कोरोना महामारी को लेकर उनके द्वारा लगातार किये गए ट्वीट सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए। कोरोना के साथ ही भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर भी राहुल गांधी ही सबसे ज्यादा आक्रामक तेवर अपनाए हुए हैं। ऐसे में भाजपा नेताओं को भी अहसास है कि राहुल ही कांग्रेस के भावी खेवनहार होंगे। शायद इसीलिए राहुल भाजपा नेताओं के निशाने पर हैं। गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित तमाम अन्य नेता मौका मिलते ही उन पर हमले करने से नहीं चूक रहे हैं।

-दाताराम चमोली

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