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दि संडे पोस्ट’ से जुड़े गैरसरकारी संगठन लीगल एंड फाइनेंसशियल एड फाउंडेशन (लफाफ) द्वारा आजादी के 75वें वर्ष में मनाए जा रहे अमृत महोत्सव से प्रेरणा लेकर एक कार्यक्रम का आयोजन मुंबई में किया गया। इस कार्यक्रम ‘एक शाम देश के नाम’ की शुरुआत गत् 14 अक्टूबर को ‘वर्ल्ड विजन डे’ के अवसर पर राजभवन मुंबई में की गई। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण सुप्रसिद्ध गायक मुनि रमन के म्यूजिकल बैंड के पांच सदस्य रहे जो जन्म से ही पूरी तरह दृष्टि दोष का शिकार होने के बावजूद पूरे जज्बे और शिद्दत के साथ अपने सपनों को साकार करने में जुटे हुए हैं। इस म्यूजिकल बैंड ने राजभवन मुंबई में महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री भगत सिंह कोश्यारी की गरिमामय उपस्थिति में एक से बढ़कर एक देशभक्ति से ओत-प्रोत गीत प्रस्तुत कर गर्वनर कोश्यारी समेत सभी उपस्थित अतिथियों का मन मोह लिया। कार्यक्रम की शुरुआत सुप्रसिद्ध कत्थक नृत्यांगना सुश्री ईशानी अग्रवाल द्वारा गणेश वंदना पर एक मोहक नृत्य से हुई। पूरी तरह दृष्टिहीन इन संगीतकारों में बांसुरी वादक किरन विनकर, पिआनो वादक सरफराज कुरैशी, ढोलक वादक सचिन रामाचंद्रन, ड्रम वादक
ऑगस्टीन चेट्टिआर, गिटार वादक सैम हल्दर शामिल रहे।

राष्ट्रगान से कार्यक्रम की शुरूआत

मुनि रमन के गीतों और इन संगीतकारों के संगीत से मुग्ध हो राज्यपाल श्री भगत सिंह कोश्यारी ने अपने संबोधन में इस म्यूजिकल ग्रुप की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए इन्हें अपने आर्थिक कोष से दो लाख की धनराशि देने की घोषणा की। राज्यपाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि ‘मैं कोई नाचने गाने वाला नहीं हूं, बचपन में जब मेरे घर में नाचने गाने वाले चैत के महीने में आते और प्रांगण में उत्सव होता, तब मैं अंदर चला जाता था। मुझे नाच का मतलब यह लगता था राम जी का नाम लो, रघुपति राघव राजाराम बोलो तो सब कुशल है। मेरे पिता जी पढ़े- लिखे तो नहीं थे पर मैं आज जितना पढ़-लिख चुका हूं, शायद उससे ज्यादा पढ़े थे। तो वे मुझ पर नाराज हो कहते बाहर आओ, क्यों अंदर जाते होे। मैं कहता मुझे अच्छा नहीं लगता, मैं नाच नहीं देखता हूं। तब उन्होंने मुझे समझाया कि देखो यह भी हमारे यहां एक विद्या है। इसको हमारे यहां गंदर्भ विद्या कहा जाता है। सच- मुच इस देश के अंदर कला का हमेशा सम्मान होता है। यहां जो हमारे मूल गुण है वो कभी खत्म नहीं हो सकते।

कथक नृत्य प्रस्तुत करती ईशानी अग्रवाल

आपको प्रयाग में वट वृक्ष दिखे या न दिखे लेकिन ये जो हमारे संस्कार हैं ये वट वृक्ष के समान है जो कभी समाप्त नहीं होंगे। मैं संघ का कार्यकर्ता हूं। जो मंत्र मुझे पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी के व्याख्यान से मिला उसमें कहा गया था कि ‘चरैवेति-चरैवेति’ यानी चलते रहो, चलते रहो। उन्होंने कहा था कि जिसका नाम कलिकाल है इसमें केवल सोना होता है, जो द्वापर होता है तो थोड़ा हिलना पड़ता है और जब त्रेता आता है तो मनुष्य खड़ा होता है और जब सतयुग आता है तो चलने लगते हैं। जैसे मुनि रमन गा रहे थे कि ‘मुसाफिर हूं यारों न घर है न ठिकाना, बस चलते जाना है…’ यह हमारे देश का चिंतन है। वही चिंतन गीतकार ने अपने गीत में रखा है।

स्मृति-चिन्ह देकर राज्यपाल का स्वागत करती रमा उप्रेती

 

ये जो मुसाफिर हैं रुकते कहां है? चलते रहो, चलते रहो। मंजिल कहीं हैं जरूर जो तुम्हें नहीं मिलेगी तो किसी दूसरे या तीसरे को मिलेगी। यह जीवन का लक्ष्य है। जब एक बड़ा लक्ष्य होता है तो तब आदमी एक अलग लक्ष्य की ओर बढ़ता है। उसमें केवल यह रहता है कि हमको इस मार्ग पर चलना है। चलते-चलते हमें उस मार्ग पर पहुंचना है जहां हमारे श्रेष्ठ लोग पहुंचे थे। स्वर और नाद ब्रह्म है हमारे यहां ये जो नाद नृत्य कर रहे थे इसको भी हमारे यहां ब्रह्म की संज्ञा दी गई है। ये जो कह रहे थे कि जो हमारे विजन नहीं है। उनकी आंखें नहीं है, मैं कहना चाहता हूूं कि उनके अंदर बहुत विजन होता है। आंखों से ही विजन नहीं होता है, जो आप आंख खोलकर देखते हैं। अगर ध्यान लगाकर देखें तो आंख बंद करके सौ गुणा ज्यादा बेहतर देख सकते हैं। इसकी मैं आपको गारंटी देता हूं। जो आत्मा है वो अजर-अमर है। अगर सचमुच उस दिशा में चिंतन करते हैं तो उसकी सुगंध चारों तरफ फैलती है। इन संगीतकारों की ये जो कला है वह अलंकृत करती हैं जब हमारे स्वर अलंकृत होते हैं। तो फिर हमारे कलाकारों और संगीतकारों को ताली बजाओ कहने की जरूरत नहीं पड़ती है।’

 

सभाागार को संबोधित करते राज्यपाल

 

धन्यवाद ज्ञापन देते टीसी उप्रेती

 

कार्यक्रम में देश की कई प्रतिष्ठत हस्तियों को उनके सामाजिक एवं व्यवसायिक योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया। सम्मान पाने वाले में ख्याति प्राप्त वनस्पति वैज्ञानिक, जामिया हमदर्द (दिल्ली) के प्रोफेसर एमजेड आबदीन, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर एवं एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सह प्रबंध निदेशक श्री प्रकाश चंद्र कांडपाल, बनारस के ख्याति प्राप्त सर्जन, पॉपुलर ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ एके कौशिक, इंक्रेडिबल आर्ट फाउंडेशन के प्रोमोटर श्री टीसी उप्रेती एवं उनकी धर्मपत्नी रमा उप्रेती, एयरट्रीप डॉट कॉम के प्रमोटर अजय एवं लवकेश अग्रवाल तथा तत्सत् फाउंडेशन की अध्यक्ष श्रीमती सुमी गुप्ता शामिल थीं।

राज्यपाल द्वारा गायक मुनि रमन को एक उपाधि ‘मन रमन’ एवं प्रतीक चिन्ह से सम्मानित किया गया। मुनि रमन की टीम के सदस्यों को भी स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में श्री टीसी उप्रेती ने समस्त आयोजकों की तरफ से राज्यपाल को धन्यवाद ज्ञापित किया।

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