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पुराने रूप में आए #केजरीवाल 

दिल्ली के मुख्यमंत्री #अरविंद केजरीवाल फिर से जनता से पूछकर काम करने लगे हैं। 29 जुलाई को आईजी स्टेडियम में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आरडब्लूए और बाजार एसोसिएशन की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में मुख्यमंत्री अपने पुराने अवतार में नजर आए। उन्होंने मंच से #सीसीटीवी कैमरों पर एलजी की रिपोर्ट को फाड़ दिया। हालांकि ऐतिहासिक जीत के बाद से ही वे जनता से पूछकर काम करने के अपने वादे को भूला दिए थे। उनमें आए इस बदलाव को कुछ राजनीतिज्ञ विश्लेषक 2019 की तैयारी बता रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट का दिल्ली सरकार बनाम एलजी अधिकार संबंधी फैसले आने के बाद से मुख्यमंत्री केजरीवाल जनता के बीच जाना शुरू कर दिए हैं। वे एलजी को विकास कार्यों में रोड़ा अटकाने के लिए जिम्मेवार साबित करने में लगे हैं। इसी सिलसिले में उन्होंने सीसीटीवी कैमरे पर एलजी की रिपोर्ट को मंच पर पाड़ दिया और कहा, ‘जनता की मर्जी है कि इस रिपोर्ट को फाड़ दो। जनतंत्र में जनता जनार्दन है।’
मुख्यमंत्री का कहना है कि एलजी की समिति के मुताबिक, अगर कोई भी दिल्ली में सीसीटीवी कैमरा लगाना चाहता है। चाहे वह अपने पैसे से हो। उसे दिल्ली पुलिस से लाइसेंस लेना होगा। लाइसेंस पर तंज कसते हुए मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा, ‘लाइसेंस मतलब पैसा चढ़ाओ, लाइसेंस ले जाओ।’
एलजी हाउस से भी मुख्यमंत्री के आरोपों का जवाब आया। एलजी हाउस ने जवाब में कहा, ‘सीसीटीवी लगाने को लेकर जारी ड्राफ्ट रूल्स पर गलतफहमी फैलाई जा रही है। इसमें सीसीटीवी लगाने के लिए रिपोर्टिंग मैकेनिज्म की बात कही गई है, न कि लाइसेंसिंग मैकेनिज्म की। सीसीटीवी के दुरुपयोग की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। उसमें पाया गया है कि इसके जरिए लोगों की निजता का हनन किया जा रहा है। एलजी हाउस ने यह भी कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी निजता को मौलिक अधिकार माना है। इसी वजह से दुनिया में हर जगह सीसीटीवी कैमरे लगाने को लेकर एक नियामक या पॉलिसी फ्रेमवर्क बनाया गया है।
#एलजी की रिपोर्ट पाड़ते हुए केजरीवाल ने कहा जनता ने फाड़ने का आदेश दिया है। इसलिए इसे फाड़ दिया। चुनाव में उतरने से पहले केजरीवाल इसी तरह लोगों के घरों में जाकर बिजली मीटर से तार काटकर विरोध करते थे। केजरीवाल का वह रूप लोगों को खूब भाया ओर दिल्ली की जनता ने पहले चुनाव में 70 में से 28 तो एक साल बाद फिर हुए विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक 67 सीट दे दी। केजरीवाल सरकार का तीन साल से ज्यादा का समय हो गया है।
ऐतिहासिक जीत के बाद केजरीवाल ने जनता से पूछकर काम करना छोड़ दिया था। चाहे दिल्ली में तीन सौ से ज्यादा नए शराब के ठेके का लाइसेंस हो या राज्यसभा सांसद का चुनाव। इस तरह के किसी भी मामले में केजरीवाल सरकार ने जनता से पूछना मुनासिब नहीं समझा। जबकि आम आदमी पार्टी ने पार्टी गठन के दौरान कहा था कि वह चुनाव के लिए उम्मीदवार का चयन जनता से पूछकर करेंगे।
केजरीवाल के इस परिवर्तन के पीछे कुछ राजनीति विश्लेषक #2019 की तैयारी बता रहे हैं। #2014 के आम चुनाव में केजरीवाल की पार्टी के एक भी सांसद लोकसभा नहीं पहुंचे। इस बीच दिल्ली सरकार और एलजी विवाद से केजरीवाल की लोकप्रियता दिल्ली में घटने लगी थी। अपनी खोई हुई लोकप्रियता को फिर से पाने के लिए मुख्यमंत्री केजरीवाल फिर से जनता के बीच पहुंचने लगे हैं। उनसे पूछकर फैसला लेने लगे हैं।
देखना यह दिलचस्प होगा कि 2019 में लोकसभा और #2020 में विधानसभा चुनाव के दौरान भी क्या केजरीवाल लोगों से पूछकर अपने उम्मीदवार उतारेंगे। ऐसे 2015 के विधानसभा चुनाव के समय से ही उन्होंने अपनी इस नीति पर ‘झाड़ू’ चला दिया है।

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