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अब ड्रोन के जरिए आतंकवाद का खतरा

आगामी दिनों में ड्रोन का उपयोग घरों में दूध, ब्रेड, मक्खन जैसी जरूरी चीजों को डिलीवर करने में होगा, लेकिन दिक्कत यह है कि विध्वंसक दिमाग इससे पहले ही ड्रोन का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए करने लगे हैं

किसी भी अविष्कार या तकनीक का उपयोग इंसान की जिंदगी को बेहतर बनाने या मानवता की भलाई के लिए होता है, लेकिन जब तकनीकी या आविष्कार का गलत इस्तेमाल होने लगे तो स्थिति चिंतनीय हो जाती है। मसलन कि ड्रोन आज हमारी टेक्नोलाॅजिकल दुनिया का एक अहम हिस्सा बन चुके हैं। बदलते परिवेश के साथ ही तकनीक ने हमारी जिंदगी में वो जगह बना ली है जिसके बिना अब पार पाना बहुत मुश्किल है। सुबह से लेकर शाम तक आपका तकनीक से सामना होता रहता है। आपने सुना होगा कि भविष्य में आपके घर में दवाइयां, पिज्जा यहां तक कि ब्रेड, मक्खन, अंडे ड्रोन से डिलीवर किए जाएंगे। लेकिन जरा सोचिए कि अगर आपके घर आने वाला एक ड्रोन जो आपके यहां पिज्जा डिलीवर करने वाला हो उसमें यदि बम रखा हो तो आप क्या करेंगे? भविष्य में ड्रोन से हमले किए जाएंगे और लोगों की हत्याएं भी। हाल ही जम्मू में एयर फोर्स स्टेशन पर हुए ड्रोन हमले ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। जो इस बात का प्रमाण है कि ड्रोन अब एक हथियार बन चुके हैं। पिछले कुछ समय से ड्रोन खतरा रहे हैं, लेकिन इन पर बहुत कम ध्यान दिया गया। जिसके कारण ड्रोन अब आतंकवाद का नया हथियार बन रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (29 जून, 2021) को ड्रोन हमलों के मद्देनजर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ एक आपात बैठक की थी। बैठक में 27 जून को वायु सेना के जम्मू एअर बेस पर हुए ड्रोन हमलों पर चर्चा के साथ ही देश की सुरक्षा और भविष्य की चुनौतियों के खतरों से निपटने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। सरकार जल्द ही विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के साथ मिलकर उभरती चुनौतियों से सामूहिक रूप से निपटने की रणनीति तैयार करेगी। रक्षा मंत्रालय और तीनों सेनाएं इसमें अहम भूमिका निभाएंगी। अब जबकि ड्रोन हमले हो रहे हैं, तीनों बलों को इन नई चुनौतियों से निपटने में कमियों को दूर करने और आवश्यक सामग्री की खरीद पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा गया है। तीनों बलों को मानव रहित हवाई वाहनों द्वारा हमलों को विफल करने के लिए एंटी-ड्रोन सिस्टम को संपादित करने पर ध्यान केंद्रित करने का भी निर्देश दिया गया है। सबके जेहन में उठने वाला पहला सवाल तो यही है कि एक ड्रोन खतरनाक क्यों है? क्यों ये आतंकवाद का खतरा बन सकते हैं। इसके क्या कारण हो सकते हैं? सबसे पहली बात तो यही है कि यह दूसरे हथियार से ज्यादा सस्ते हैं। ज्यादा महंगे नहीं हैं और तो और ड्रोन को कोई भी आनलाइन खरीद सकता है।

अब किसने किस उद्देश्य से ड्रोन लिया है इसका अंदेशा लगाना बहुत असंभव कार्य है। साथ ही एक और वजह है जो बेहद खतरनाक है, वो है इसकी गुमनामी। कुल मिलाकर ड्रोन का इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति कौन है इसका पता लगाना बहुत मुश्किल है। ड्रोन को आपरेट करने के लिए किसी एक्सपर्ट की कोई जरूरत नहीं होती है। जीपीएस का इस्तेमाल करके इसे नेविगेट करने और एक छोटा सामान ढोने के लिए बहुत ज्यादा तकनीकी जानकारी की जरूरत नहीं है। अगर एक ड्रोन से पिज्जा और दवाएं डिलिवर की जा सकती हैं, तो उसी से कम मात्रा में विस्फोटक भी लाए जा सकते हैं। चैथी वजह है, ड्रोन के आतंकी इस्तेमाल से लोगों पर गलत मनोवैज्ञानिक असर पड़ना। सुरक्षाकर्मियों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। पांचवीं वजह, जो ड्रोन को खतरनाक बनाती है, वह है इसका खुला प्रयोग। केवल सैन्य ठिकाने ही नहीं, बल्कि आतंकवादी देश में कहीं भी ड्रोन इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसी सूरत में महंगे हथियारों और भारी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती का बहुत मतलब नहीं रह जाएगा।

तो फिर इनसे निपटने का उपाय क्या है?

जाहिर तौर पर सबसे कारगर उपाय है, इनका पता लगाना, पकड़ना और फिर बेकार कर देना। लेकिन इनका पता लगाना इतना आसान नहीं और यह मुश्किल क्यों है, इसे यूं समझिए। पहला कारण है, ड्रोन का बैटरी से चलना। इसके चलते इनमें बहुत कम आवाज होती है। इन्हें हवा में कम ऊंचाई पर उड़ने के लिए प्रोग्राम कर सकते हैं या फिर मैनुअली कंट्रोल किया जा सकता है। बचाव करने वाले के पास बहुत कम समय बचता है। दूसरा कारण है, सामान्य सिविल या सैन्य रडार से इनको पकड़ने की मुश्किल। इनका रडार क्राॅस सेक्शन बहुत छोटा होता, ऐसे में पता लगाना बेहद कठिन है। छोटे आकार की वजह से जल्दी नजरों में भी नहीं आते।

ड्रोन की पहचान ऐसे हो सकती है आसान

स्पेशल मिलिमीट्रिक वेव रडार, इलेक्ट्रो आप्टिक और इंफ्रारेड सेंसर्स का नेटवर्क तैयार करना होगा। एक बार ड्रोन की पहचान हो गई, तो अगला स्टेप होगा, उसे पकड़ना या बेकार करना। स्पेशल नेट या बंदूकों का प्रयोग हो सकता है। कोई इलेक्ट्राॅनिक उपाय कर सकते हैं ताकि ड्रोन को कंट्रोल करने वाले मैसेज, उस तक पहुंच ही न पाएं। हाई पावर लेजर का इस्तेमाल करके ड्रोन को खत्म भी कर सकते हैं। लेकिन यह सब इतना आसान नहीं होने वाला। जब ड्रोन का इस्तेमाल रात में किया जाता है या डिफेंस को चकमा देने के लिए झुंड में प्रयोग हो, तो तुरंत रिस्पाॅन्स करना कठिन हो जाता है। इसका नमूना जम्मू में देख चुके हैं।

सरकार को क्या करना चाहिए

जानकारों के मुताबिक सरकार को पांच कदम उठाने चाहिए। सबसे पहला कदम है महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा। अब हर जगह को सुरक्षा के कड़े घेरे में लाना मुश्किल है। ऐसे में एक लिस्ट बनाई जाए उन संस्थानों की, जो अति महत्वपूर्ण हैं। दुर्भाग्य से इस लिस्ट में शख्सियतें भी होंगी। हम अतीत में देख चुके हैं कि किस तरह मानव रहित हथियारों का इस्तेमाल करके हत्याएं की गईं। इनमें ड्रोन भी शामिल रहे हैं। भारत में अभी एंटी-ड्रोन सिस्टम पर रिसर्च, डिवेलपमेंट और निर्माण का काम शुरुआती चरण में है। ऐसे में दूसरी चीज सरकार को यह करनी चाहिए कि कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए बाहर से यह सिस्टम मंगवा ले। डीआरडीओ ने कुछ एंटी-ड्रोन सिस्टम बनाए हैं। इनका इस्तेमाल राष्ट्रीय दिवस समारोहों में वीआईपी लोगों की सुरक्षा में किया जाता है। तो सरकार का तीसरा कदम यही होना चाहिए कि डीआरडीओ जम्मू की घटना को एक चुनौती के रूप में ले और एंट्री-ड्रोन सिस्टम के रिसर्च और डिवेलपमेंट में तेजी लाए ताकि इनका प्रयोग फील्ड में भी किया जा सके।

डीआरडीओ के काम करने की रफ्तार बहुत धीमी है। सरकार को चाहिए कि इसमें प्राइवेट इंडस्ट्री को भी शामिल करे। यही होगा हमारा चैथा कदम। हमारे देश में बहुत से युवा और उत्साही आईटी उद्यमी हैं, जिनके स्टार्टअप्स को रिसर्च-डिवेलपमेंट के लिए आर्थिक सहायता की जरूरत है। एक एंटी-ड्रोन सिस्टम में बहुत सारे पुर्जे होते हैं। किन्हीं एक या दो कंपनियों से उम्मीद नहीं की जानी चाहिए कि वे पूरा सिस्टम बना देंगी। इससे काम में देरी ही होगी। कई कंपनियों को शामिल करना होगा। सरकार के लिए पांचवां कदम होगा ऐसा मैकेनिजम बनाना, जिससे ड्रोन और एंटी-ड्रोन टेक्नाॅलजी की निगरानी की जा सके। ऐसी नीति बने, जिससे कानूनी रूप से काम करने वालों को अधिकार मिलें और तकनीक को गलत हाथों में जाने से रोका जा सके।

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