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अब ‘ कोवैक्सीन ‘की पहली खेप पहुंची दिल्ली, देश के अलग -अलग हिस्सों में भी भेजी जा रही वैक्सीन 

दुनिया के कई देशों में कोरोना टीकाकरण  शुरू हो गया है। भारत में भी तीन जनवरी को एक साथ दो वैक्सीनों को आपातकालीन मंजूरी मिलने के बाद कोरोना वैक्सीनेशन की तैयारी शुरू हो गई है। हालांकि देश में 16 जनवरी से इसका टीकाकरण होना है। लेकिन इससे पहले सरकार की ओर से सारी तैयारियों को पूरा कर लिया है।राज्यों के लिए कल 12 जनवरी  से ही पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट से देश के अलग-अलग हिस्सों में वैक्सीन की सप्लाई शुरू होने के बाद अब आज 13 जनवरी को भारत बायोटेक की कोवैक्सीन भी देश के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचने लगी है। भारत बायोटेक की कोवैक्सीन की पहली खेप आज दिल्ली पहुंची है। आज सुबह हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से एक विमान के जरिए भारत बायोटेक की वैक्सीन की पहली खेप दिल्ली पहुंची।  देश में कोरोना टीकाकरण के महाअभियान के आगाज से पहले देशभर में टीकों को पहुंचाने का काम जारी है।

बता दें कि देश में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की वैक्सीन कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को भारत के औषधि महानियंत्रक से आपात इस्तेमाल की मंजूरी मिल चुकी है।कल 12 जनवरी को सबसे पहले सीरम इंस्टीट्यूट ने वैक्सीन की डिलीवरी शुरू की और देश के 13 जगहों पर चार एयरलाइंस की विमानों के माध्यम से पहुंचाया गया। बता दें कि 16 जनवरी से भारत में दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण का आगाज हो रहा है।

आज 13 जनवरी को हैदराबाद से कोवैक्सीन के तीन बॉक्स दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचे, जिनका वजन 80.5 किलोग्राम है। बता दें कि केन्द्र सरकार ने देश में 16 जनवरी से शुरू होने वाले टीकाकरण अभियान से पहले ‘सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया’ (एसआईआई) और ‘भारत बायोटेक’ को कोरोना वायरस टीके की छह करोड़ से अधिक खुराक के लिए ऑर्डर दिया था। इस ऑर्डर की कुल कीमत करीब 1,300 करोड़ रुपए  होगी।

अधिकारियों ने कहा कि ‘ हैदराबाद से भारत बायोटेक के टीकों की पहली खेप 11 स्थानों के लिए रवाना हो रही है। कोवैक्सीन का विकास भारत बायोटेक ने स्वदेश में ही भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) के साथ मिलकर किया है। जबकि कोविशील्ड का विकास ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और ब्रिटिश-स्वीडिश कंपनी एस्ट्राजेनेका ने किया है।  भारत में इसका उत्पादन पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया कर रही है।

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