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अब पंजाब कांग्रेस की गुटबाजी खत्म करेंगे राहुल गांधी

पंजाब के विधानसभा चुनाव का समय महज 8 माह का रह गया है। इस दौरान सत्तासीन कांग्रेस सरकार को जहां अपनी उपलब्धियों को प्रचारित करना था। कार्यकर्ताओं को गांव – गांव जाना था। वही पार्टी के बड़े नेता आपसी लड़ाई में ही उलझे हुए हैं। इसने कांग्रेस हाईकमान को चिंता में डाल दिया है।

 

पार्टी हाईकमान ने पंजाब कांग्रेस की गुटबाजी को खत्म करने के लिए पहले उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को प्रभारी बनाकर भेजा । उसके बाद पार्टी के तीन सीनियर नेताओं की समिति बनाई गई । इसके बावजूद भी समाधान नहीं निकल पाया है। अभी भी पार्टी के दो स्तंभ मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू आपस में एक दूसरे को नीचा दिखाने का कोई अवसर नहीं छोड़ रहे हैं।

 

फिलहाल दोनों के बीच आपसी सुलह कराने के लिए पार्टी हाईकमान ने राहुल गांधी को मामला हैंड ओवर किया है। राहुल गांधी आज इस मामले पर दिल्ली स्थित अपने आवास पर पंजाब में पार्टी के विधायकों से मुलाकात करेंगे। इन विधायकों से राहुल गांधी सरकार का फीडबैक लेंगे।

 

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यहां यह भी बताना जरूरी है कि राहुल गांधी ने 2 दिन पहले ही पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ और सरकार में वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल से मुलाकात की थी। तब पार्टी के प्रदेश मुखिया सुनील जाखड़ ने सिद्धू और कैप्टन के बीच चला आ रहा विवाद को जल्द समाप्त कराने की बात कही थी। इसी दौरान पंजाब में 2 विधायकों के बच्चों को सरकारी नौकरी देने के मामले पर भी नवजोत सिंह सिद्धू मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से उलझ गए हैं। बैठे-बिठाए ही विपक्ष को मुद्दा मिल गया है ।

 

यहां यह भी बताना जरूरी है कि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री हरीश रावत जब से पंजाब के प्रभारी बने हैं तब से ही वह नवजोत सिंह सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच पैदा हुए विवाद को सुलझाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं । इस दौरान बताया यह भी जा रहा है कि हरीश रावत ने एक रिपोर्ट पार्टी हाईकमान को सौंपी है। जिसका जवाब 8 से 10 जुलाई के बीच में दिया जाएगा । इससे पहले सोनिया गांधी की तरफ से गठित की गई 3 सदस्य समिति के सामने नवजोत सिंह सिद्धू उपस्थित होंगे और उन्हें अपनी बात रखनी है ।

 

 

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याद रहे कि कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पंजाब में अपनी पार्टी की चल रही आपसी गुटबाजी को खत्म करने के लिए 3 सदस्य कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी में मलिकार्जुन खडगे, जयप्रकाश अग्रवाल के साथ ही हरीश रावत भी शामिल है । यह कमेटी पिछले काफी दिनों से विधायकों से अलग-अलग मीटिंग करके फीडबैक ले चुकी है। यही नहीं बल्कि कमेटी ने कैप्टन और सिद्धू के बीच आपसी सुलह कराने की भी कोशिश की। जिसमें उन्हें एक पखवाड़े पूर्व आंशिक सफलता भी मिली । लेकिन इसके बाद नवजोत सिंह सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर सिंह फिर से एक दूसरे पर कटाक्ष करते नजर आए।

 

कांग्रेस के लिए पंजाब बहुत महत्वपूर्ण है। क्योंकि यहां किसान आंदोलन के चलते फिलहाल भाजपा बहुत पिछड़ी हुई है। कांग्रेस को उम्मीद है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी पंजाब में एक बार फिर अपना परचम लहराएगी। लेकिन जिस तरह से पंजाब में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच गुटबाजी चल रही है, उससे कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसका असर उन दूसरे राज्यों पर भी पड़ सकता है, जहां 2022 में पंजाब के साथ ही विधानसभा चुनाव होने हैं।

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