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अब दलित मंदिर के नाम पर राजनीति शुरू

दिल्ली के तुगलकाबाद में रविदास मंदिर तोड़े जाने के खिलाफ दलित समाज के समर्थन में अब बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी उतर आयी है। ममता बनर्जी के समर्थन में आने के बाद विवाद अब सियासी रंग लेता जा रहा है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा राजधानी दिल्ली में गुरू रविदास मंदिर के ढहाए जाने पर गुरूवार 22,अगस्त को आक्रोश व्यक्त किया गया। बनर्जी ने एक ट्वीट कर कहा‘‘ राजधानी दिल्ली में गुरू रविदास मंदिर ढहाए जाने से हम काफी आहत हैं और इसे लेकर उनके अनुयाईयों में जो गुस्सा हैं उसे समझ सकते हैं, क्योंकि गुरू जी अपनी यात्रा के दौरान यहां रूके थे। हमारे मन में उनके लिए काफी सम्मान है और यह स्थान दलितों की अपने अधिकारों के लिए संघर्ष का प्रतीक है तथा इसे दोबारा बनाया जाना चाहिए।’’ गौरतलब है कि दिल्ली विकास प्राधिकरण द्वारा उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद 10 अगस्त को इस मंदिर को इस आधार पर ढहा दिया था कि यह सरकारी जमीन पर बना है।

भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर समेत 96 लोगो को तुगलकाबाद मंदिर हिंसा के आरोप में न्यायिक हिरासत में लिया गया है, इस पर चंद्रशेखर द्वारा कहा गया की उनकी तरफ से कोई हिंसा नहीं की गयी उन्हें साज़िश के तहत फंसाया जा रहा है साथ ही उन्होंने यह भी कहा की हम बाबा साहेब के संविधान को मानते है और हिंसा पर भरोसा नहीं करते। पुलिस का दावा है की इस हिंसा में करीब 90 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। हिंसा में दलित कार्यकर्ताओं द्वारा गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचाया गया है। गौरतलब है कि तुगलकाबाद में रविदास मंदिर तोड़े जाने के विरोध में गत बुधवार को दलितों द्वारा रामलीला मैदान में विशाल प्रदर्शन किया गया था इस विरोध प्रदर्शन में हरियाणा ,राजस्थान ,पंजाब और उत्तरप्रदेश से दलित समुदाय के सैकड़ो लोग शामिल हुए थे।इस दौरान कई घंटो तक जमकर बवाल हुआ और इस बीच रैली के बाद हज़ारो की संख्या में लोग वहां पहुंचे और पत्थरबाज़ी शुरू कर दी। जिसमें कई पुलिसकर्मियों सहित दर्ज़न भर लोग भी घायल हो गए थे। जिसके बाद पुलिस द्वारा जवाबी कार्रवाई में राउंड फायरिंग की गयी थी। पंजाब में 34 फीसद आबादी अनुसूचित जाति से आती है इसलिए 13 अगस्त को पंजाब बंद का आह्वान भी किया गया था।

फ़िलहाल केंद्र सरकार द्वारा आश्वासन दिया गया कि इस पर कोई न कोई हल निकाला जायेगा, परन्तु केंद्र सरकार के आश्वासन के बावजूद दलित समुदाय संतुष्ट नहीं है और घटना से नाराज़ लोग वहाँ अब भी फूल चढ़ाकर दोबारा मंदिर बनाने की ज़िद पर अड़े हुए है। जहाँ एक तरफ इस विवाद से दलित समुदाय की भावनाएं आहत है तो वही दूसरी तरफ विपक्ष बीजेपी को घेरने में लगा है। दिल्ली के केजरीवाल ने भी इस मुद्दे पर भाजपा को घेरना शुरू कर दिया है। केजरीवाल ने कहा कि सभी धर्मों के लोग संत रविदास का सम्मान करते हैं और इस मुद्दे पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। केजरीवाल ने सदन में ऐलान करते हुए कहा कि अगर केंद्र सरकार 4-5 एकड़ जमीन रविदास समाज को दे दे तो दिल्ली सरकार की ओर से उसी जगह पर संत रविदास का एक भव्य मंदिर बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों लोगों की आवाज है कि मंदिर को उसी जगह पर बनाया जाए। केजरीवाल ने कहा कि जमीन को लेकर कहा जा रहा है कि फॉरेस्ट की जमीन है तो ऐसे में सवाल यह है कि क्या पूरे देश का फॉरेस्ट इसी कुछ एकड़ जमीन पर निर्भर करता है। अगर डीडीए 4-5 एकड़ जमीन रविदास समाज को दें तो दिल्ली सरकार की ओर से 100 एकड़ जमीन केंद्र को देने के लिए भी तैयार हैं जिसपर पेड़ लगाकर हम वन्य क्षेत्र बना देंगे।

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