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किसान आंदोलन में अब काला झंडा, काला दिवस, गोरिल्ला और होगा हल्ला

 किसान संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले चले आ रहे किसान आंदोलन को 26 मई को 6 माह पूरे हो जाएंगे । इसी दिन केंद्र सरकार के भी सालगिरह है । ऐसे में किसान आंदोलन से जुड़े नेता सक्रिय हो गए हैं। खासकर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत।

राकेश टिकैत अब इस आंदोलन को धार देने की तैयारी कर रहे हैं। जैसे-जैसे कोरोना काल कमजोर होता जा रहा है वैसे ही किसान आंदोलन अब मजबूत होता चला जाएगा। इसके मद्देनजर ही अब किसान आंदोलन की नई रणनीति अख्तियार की गई है । जिसके तहत 26 मई को काले झंडे फहराए जाएंगे।

इस दिन देश के सभी किसान काला दिवस मनाएंगे। इसके साथ ही जैसे पूर्व में पंजाब और हरियाणा के जनप्रतिनिधियों को किसानों ने आईना दिखाया था । उसी तरह अब उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के जनप्रतिनिधियों को भी किसान आईना दिखाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए किसानों ने हल्ला बोल की रणनीति बनाई है। देखा जाए तो अब किसान आंदोलन गोरिल्ला आंदोलन के रूप में दिखाई देगा।

पिछले साल नवंबर माह में शुरू हुए किसान आंदोलन को अब लोग लचीला और ढीला पड़ता कह रहे हैं। ऐसे में किसान नेताओं ने अपनी सक्रियता शुरू कर दी है। बंगाल चुनाव में भाजपा को मिली अप्रत्याशित हार से किसान नेता उत्साहित है। वह अब यहां तक कहने लगे हैं कि यह आंदोलन अब भाजपा को हर प्रदेश में हराने का काम करेगा।

शायद यही वजह है कि किसान नेताओं ने 2024 तक इस आंदोलन को आगे बढ़ाने का एलान कर दिया है। साथ ही केंद्र और कई राज्यों में सत्तारूढ़ भाजपा चिंतित बताई जा रही है ।चिंतित इसलिए है कि अगले साल कई राज्यों में विधानसभा चुनाव है। जिनमें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड मुख्य है। इन राज्यों में भाजपा के लिए किसान मुसीबत बन सकते हैं। किसान नेता अब भाजपा की राह का रोड़ा बनने को आतुर है ।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान भाजपा के खिलाफ खड़े हो गए हैं। पश्चिम उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में भाजपा के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट रहा है। गत दिनों हुए पंचायत चुनाव इसका नतीजा है। जहां सत्तारूढ़ भाजपा दूसरे नंबर की पार्टी बनी है।

 

उत्तराखंड में भी भाजपा के जनप्रतिनिधियों के खिलाफ लोग अपना आक्रोश प्रकट करने लगे हैं । कुछ दिन पहले ही झबरेड़ा के भाजपा विधायक देशराज कर्णवाल को जिस तरह गांव वालों ने लताड़ा वह आने वाले दिनों की तस्वीर बताई जाने लगी है।

आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में ऐसे कई मामले सामने आ सकते हैं। जब लोग जनप्रतिनिधियों का विरोध करेंगे। जिनमें ज्यादातर किसान अग्रणी होंगे । किसान आंदोलन के नेताओं की यही रणनीति बनाई जा रही है।

इस बाबत किसान नेताओं का कहना है कि किसान संगठनों के नेताओं ने पश्चिम बंगाल में केंद्र सरकार की पोल खोली थी। वहां के लोगों ने किसानों की बात को ध्यान से सुना है। नतीजा आपके सामने है। अब लोगों को यह अहसास हो गया है कि भाजपा जनविरोधी नीतियों पर चल रही है।

जिस तरह हाल ही में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को उनके गृह जिले में काले झंडे दिखा दिए गए, वैसे ही सभी मंत्रियों को अपने अपने क्षेत्रों में काले झंडे देखने को मिलेंगे। समाज के बौद्धिक वर्गों को साथ लिया जा रहा है। रोजाना फेसबुक पर प्रात: 11 बजे से एक बजे तक परिचर्चा हो रही है।

किसान नेताओं का दावा है कि नॉर्थ जोन और साउथ जोन में इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उनमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जाता है। अलग अलग राज्यों के किसानों द्वारा अपनी बात रखी जाती है। किसान संगठन, कोविड 19 के नियमों को ध्यान में रखकर आंदोलन को आगे बढ़ाते रहेंगे

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