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अब मरने के बाद भी जिंदा हो सकेगा इंसान !

आज के दौर में विज्ञान नए-नए प्रयोग कर रहा है। आए-दिन शोध हो रहे हैं जो न केवल आम इंसान बल्कि बड़े बड़े बुद्धिजीवियों को भी आश्चर्य में डाल देते हैं। लेकिन इतनी तरक्की के बाद भी विज्ञान मृत इंसान को जीवन देने में सफल नहीं हुआ है। बेशक ये होना बेहद असंभव प्रतीत होता हो लेकिन कुछ कंपनियों ने दावा किया है कि वो मृत इंसान को जीवन दे सकती हैं उन्हें फिर से जिन्दा कर सकती हैं। बस मरे हुए लोगों की देह को लंबे समय तक फ्रीज़ करना होगा। इस तकनीक का नाम है क्रायोनिक्‍स। जिसके बारे में सुनकर हर किसी को अचंभा है।

इस तकनीक के बारे में वैज्ञानिकों का कहना है कि मृत लोग फ्रीज करने के बाद सिर्फ बेहोशी की अवस्था में हैं। क्रायोनिक्‍स तकनीक से हम इन्हें फिर जिंदा कर सकते हैं। दुनिया भर से लोग खुद को और अपने परिजनों को दोबारा जिंदा करने के मकसद से मृत शरीर को फ्रीज करके उन्हें सुरक्षित करवाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। अब तक 600 लोगों द्वारा अपने शवों को क्रायोनिक्स तकनीक के जरिये सुरक्षित रखने के लिए फ्रीज करवाया गया है। सबसे अधिक यानी 300 शवों को अमेरिका और रूस में में फ्रिज कराया गया है। काफी लोग इसे अंतिम इच्छा के तौर पर अपने परिवार को बता रहे हैं कि यदि वह मर जाए तो उन्हें क्रायोनिक्स तकनीक के जरिये सुरक्षित रखें ताकि वो फिर जिन्दा हो सके।

क्रायोनिक्स तकनीक क्या है ?

कुछ समय पहले एक ऑस्ट्रेलियाई कंपनी सदर्न क्रायोनिक्स (Southern cryonics) की ओर से दावा किया गया था कि वो 200 डिग्री सेल्सियस तापमान पर इंसानी शवों को सुरक्षित रखेंगे और जब भविष्य में ऐसी कोई तकनीक बनेगी जिससे इंसान को जिन्दा किया जा सकेगा तो इन लाशों को निकालकर इन्हें जिंदा कर दिया जाएगा।

अमेरिका के एक साइंटिस्ट डॉ. आर. गिब्‍सन का इस तकनीक पर कहना है कि अभी तक ऐसी कोई तकनीक नहीं बनी है जो मृत इंसान को फिर से जीवित कर सके ऐसे में लोग भविष्य में केवल फिर से जिन्दा होने की एक उम्मीद में अपने शवों को फ्रीज करा रहे हैं। पहले इस तकनीक में डॉक्टर इस बात पर ध्यान देते हैं कि बॉडी के दिमाग तक ऑक्सीजन और ब्लड सप्लाई अच्छे से होता रहे। दूसरा मृत शरीर की कोशिका से पानी निकालकर एक ग्लिसरॉल से बना एक रसायन डाल दिया जाता है। उसके बाद ऐसी दवा के जरिए उसे बर्फ में पैक किया जाता है कि खून न जमे। इस प्रक्रिया में मृत शरीर को क्रायोनिक्स तकनीक में सुरक्षित रखने के लिए लिक्विड नाइट्रोजन में उल्टा रखा जाता है।

बन रही है स्पेशल प्राइवेट लैब्‍स

क्रायोनिक्स तकनीक से लैस लैब्‍स अमेरिका और रूस ही नहीं बल्कि भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी कई नई प्राइवेट कंपनियों द्वारा बनाई जा चुकी हैं। गौरतलब है कि भारत में मृत शरीर को फ्रीज करके सुरक्षित रखने के लिए अब तक कोई स्पष्ट कानून मौजूद नहीं है। याद हो कुछ साल पहले एक संत के शव को फ्रीज करने पर भारत में हंगामा हो गया था। क्योंकि इसके लिए कोर्ट से मंजूरी मिलना नामुमकिन है। हालांकि वर्ष 2016 में लंदन के एक हाईकोर्ट में कैंसर की मरीज द्वारा दायर अपील में कहा गया था कि अब मेरी मौत होने वाली है। कैंसर के कारण समय से पहले मौत हो रही है इसलिए मुझे फिर से जीने का हक है जो वो मिलना चाहिए। याचिका दायर करने वाली लड़की और उसके परिवार को भरोसा था कि भविष्य में ऐसी तकनीक होगी तो वह जीवित हो सकेगी।

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अब आपके मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि इसकी कीमत कितनी होगी, तो हम बता दें कि लोगों को अपने मृत शरीर को फ्रीज करने और सुरक्षित रखने के लिए 1 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान करना होगा।

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