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किंगमेकर नहीं होंगी मायावती

उत्तर भारत के तीन राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनावों को लेकर एक्टिज पोल के जो नतीजे आए हैं उन्हें देखते हुए लगता नहीं कि इन राज्यों में किंगमेकर बनने का बसपा सुप्रीमो मायवती का सपना पूरा होगा। यही नहीं यदि चुनाव परिणाम एक्जिट पोल के नतीजों के अनुरूप रहे तो उत्तर प्रदेश में बसपा कांग्रेस को जिस नजरिये से देखती रही है उसे बदलने के लिए उसे मजबूर होना पड़ सकता है। गौतरलब है कि विधानसभा चुनावों में एससी-एसटी वोट बैंक को अपने पक्ष में गोलबंद करने के लिहाज से बसपा सुप्रीमो मायवती सक्रिय रहीं। उन्होंने उन सीटों पर विशेष ध्यान दिया जहां एससी-एसटी वोट अधिक संख्या में हैं। मध्य प्रदेश में 15 प्रतिशत दलित वोटर हैं। बसपा चुनाव में इन्हीं वोटों के बूते अपना दमखम दिखाती रही है, लेकिन सच यह है कि पार्टी यूपी की तरह दूसरे राज्यों में इन वोटों को प्रभावित करने में ज्यादा सफल नहीं रही है। इतना अवश्य है कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में बसपा का जिन क्षेत्रों में जोर रहा वहां भाजपा के लिए चिंता का विषय है क्योंकि इन क्षेत्रों की ज्यादा सीटें भाजपा के कब्जे में हैं। छत्तीसगढ़ में एससी के लिए आरक्षित 10 में से 9 सीटें अभी भाजपा के पास हैं। एससी- एसटी वोट बैंक की18 सीटों पर कांग्रेस काबिज है। ऐसे में हाथी यदि आगे बढ़ा तो जाहिर है कि नुकसान कांग्रेस- भाजपा दोनों को होगा। हालांकि राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि अजित जोगी और मायावती का गठबंधन किंगमेकर की भूमिका में नहीं है। बसपा को सबसे ज्यादा उम्मीदें राजस्थान से थीं जहां एससी की 34 और एसटी की 25 सीटें हैं। यही वजह है कि कांग्रेस यहां बसपा से गठबंधन करना चाहती थी, लेकिन सीटों के बंटवारे पर बात नहीं बन सकी। जिस पर बसपा ने कहा कि इसका नुकसान अंतत: कांग्रेस को होगा। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बसपा ने राजस्थान में भले ही कांग्रेस-भाजपा दोनों दलों के वोट काटे, लेकिन इतनी सीटें नहीं ला सकती है कि किंगमेकर बनने की पार्टी सुप्रीमो की इच्छा पूरी हो जाए। एक्जिट पोल के नतीजे तो राज्य में सीधे कांग्रेस की सरकार बना रहे हैं। जाहिर है कि उत्तर भारत के तीन राज्यों में किंगमेकर की भूमिका में आने की कोशिश कर रही बसपा के लिए एक्जिट पोल के नतीजे अच्छे नहीं हैं। एक बात और महत्वपूर्ण है कि बसपा उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को बहुत हल्के में लेती रही है। आगामी लोकसभा चुनाव की दृष्टि से राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों के गठबंधन की कवायद शुरू हुई तो बसपा ने कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में बहुत कम सीटें देने की बात कही, लेकिन राजनीतिक विशलेष्क मानते हैं कि तीन राज्यों के नतीजे कांग्रेस के पक्ष में रहे तो बसपा और सपा को भी कांग्रेस को लेकर सोचना पड़ेगा।

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