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सियासी षड्यंत्र तो नहीं जामिया में 4 दिन में 2 बार गोलीकांड?

दिल्ली में विधानसभा चुनाव के दौरान माहौल दिनों-दिन गड़बड़ा रहा है। खासकर जामिया कॉलेज को निशाना बनाया जा रहा है। जामिया में पिछले 4 दिन में दो बार गोलीकांड हो चुका है। इसे सियासी षड्यंत्र कहेंगे या उपद्रवियों द्वारा जामिया में पढ़ रहे छात्रों में खौफ पैदा करना।

हालांकि, दिल्ली पुलिस इस मामले में जांच कर रही है। लेकिन सवाल यह है कि जब जामिया में 4 दिन पहले ही दिनदहाड़े प्रदर्शनकारियों पर एक नाबालिग द्वारा गोली चलाई गई तो क्यों उसके बाद दिल्ली पुलिस सतर्क नहीं हो पाई? शायद दिल्ली पुलिस की लापरवाही का ही आलम है कि रात साढ़े बारह बजे एक बार फिर जामिया के गेट नंबर 5 पर उपद्रवियों ने गोलीबारी कर दी। इससे जामिया में पढ़ रहे छात्रों में आक्रोश उत्पन्न हो गया और उन्होंने रात में ही प्रदर्शन किया।

एक तरफ लोग कड़कड़ाती ठंड में अपने अपने घरों में रजाई में डूब के सो रहे थे तो वहीं दूसरी तरफ जामिया के छात्र रात में ही अपनी सुरक्षा को लेकर इतने भयभीत हुए की प्रदर्शन करने को मजबूर हुए। इससे एक दिन पहले की ही बात है जब पूर्वी दिल्ली के दल्लूपुरा निवासी कपिल गुर्जर ने शाहीन बाग के आंदोलनकारियों पर गोली चला दी थी। पुलिस वहां मौजूद थी और कपिल गुर्जर ने बेखौफ होकर हवाई फायर किए।

दिल्ली पुलिस का शायद उपद्रवियों में कोई खौफ नहीं रह गया है जिसके चलते राजधानी में आए दिन गोलियां चलना एक फैशन-सा बन गया है। 4 दिन पहले जेवर निवासी गोपाल ने जब प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई तो पुलिस इतनी भी मुस्तैद नहीं थी कि उसको धर-पकड़ कर सकें। गोपाल के हाथ में एक देशी कट्टा था जिसमें सिर्फ एक बार ही गोली चल सकती है। उसने गोली चला दी जो शादाब आलम के हाथ में लगी। अगर गोपाल के हाथ में देसी कट्टा न होकर पिस्टल होती तो वह शायद दोबारा भी गोली दाग सकता था। भगवान न करे वह गोली किसी के सीने के पार हो जाती पता नहीं किसकी जिंदगी तबाह हो जाती।

फिलहाल, रविवार की रात जामिया के गेट नंबर सात पर साढे बारह बजे जिन उपद्रवियों ने गोली चलाई उनके बारे में बताया जा रहा है कि वह लाल रंग की स्कूटी पर सवार थे गोली चलाने वाले दो युवक बताए जा रहे हैं। गोली चलने के बाद जामिया के छात्र दहशत में आ गए और पुलिस थाने का घेराव किया। हांलाकि, पुलिस थाने के एसएचओ ने जामिया के छात्रों को आश्वासन दिया कि वह 2 घंटे में गोली कांड के दोषियों को गिरफ्तार कर लेंगे।

लेकिन अब सुनने में आ रहा है कि दिल्ली पुलिस इस मामले में लीपापोती कर रही है। दिल्ली पुलिस यह सिद्ध करना चाहती है कि रविवार की रात साढ़े बारह बजे जामिया के गेट नंबर सात पर कोई गोलीबारी नहीं हुई। पुलिस बता रही है कि वहां कोई चश्मदीद गवाह नहीं मिला है जो यह कह सके कि दो युवक स्कूटी पर आए और जामिया के गेट नंबर सात पर फायरिंग करने लगे । इसके साथ ही पुलिस यह भी दावा कर रही है कि फायरिंग के बाद कारतूस घटनास्थल से बरामद नहीं हुए। इसी के आधार पर दिल्ली पुलिस यह सिद्ध करना चाहती है कि जामिया के गेट पर कोई गोलीबारी नहीं हुई।

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