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28 अगस्त को ध्वस्त हो जाएगा,नोएडा का सुपरटेक ट्विन टॉवर

नोएडा स्थित सुपरटेक टूईन टावर को गिराने का काम जोरों से चल रहा है। इसे ध्वस्त करने का जिम्मा एडिफिस नाम की कंपनी को दिया गया है। यह एजेंसी पहले भी बड़ी-बड़ी इमारतों को गिराने का काम कर चुकी है।बिल्डिंग गिराने के लिए वैज्ञानिक तरीके इस्तेमाल किए जाएंगे। इसमें 3,500 किलोग्राम विस्फोटक इस्तेमाल किया जाएगा। साइट पर 100 लोग मौजूद रहेंगे। आस-पास की बिल्डिंग को एहतियात के तौर पर खाली करा लिया जाएगा। इसके अलावा बिल्डिंग गिरने से उठने वाले धूल के गुब्बार को कंट्रोल करने के लिए खास इंतजाम कर दिए गए हैं।

 

भारत में पहली बार इतनी बड़ी इमारत गिराई जा रही है। इस बिल्डिंग को गिराने का काम कर रही एजेंसी एडिफिस के उत्कर्ष मेहता ने कहना है कि, ऐसी 32 मंजिला इमारत देश में पहली बार गिरने जा रही है। इसके साथ उन्होंने कहा है कि ‘देश में अभी तक किसी भी कंपनी ने ऐसा काम नहीं किया है। हमारी सहयोगी एजेंसी जेट डेमोलिशन अफ्रीका में 108 मीटर की बिल्डिंग गिरा चुकी है। कुछ वर्ष पहले भी हमने कोच्चि में 16 माले के 3 टावर गिराए थे। इसी तरह नोएडा स्थित में सुपरटेक के ट्विन टॉवर को 28 अगस्त को गिरा दिया जाएगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक,न्यायालय ने अपने फैसले में यह भी कहा कि,अगर कोई तकनीकी या मौसम से जुड़ी समस्या होती है तो इस इमारत को ढहाने की तारीख 4 सितंबर तक बढ़ाई जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने 31अगस्त को ‘नोएडा के अधिकारियों के साथ मिलीभगत में इमारत मानदंडों के उल्लंघन के लिए तीन महीने के भीतर निर्माणाधीन टावरों को ध्वस्त करने का आदेश दिया था, यह जानते हुए कि कानून के शासन का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए अवैध निर्माण से सख्ती से निपटा जाना चाहिए।

इस बिल्डिंग को ढहाने के लिए वॉटरफॉल इंप्लांट मेथड का इस्तेमाल किया जाएगा और इमारत अंदर की ओर गिरेंगी। विस्फोटकों का विस्फोट बाहरी दबाव का एक तेज विस्फोट पैदा करेगा और एक शॉकवेव की तरह पूरे ढांचे में फैल जाएगा, कंक्रीट को चकनाचूर कर देगा, जिसके बाद इमारत ढह जाएगी। इस पर उत्कर्ष मेहता कहते है कि, विस्फोट के बाद यह बिल्डिंग पानी की तरह गिरेगी। इस मेथड के तहत बिल्डिंग धीरे-धीरे करके जमीन पर गिरेगी ताकि एक साथ जमीन पर इसका भार न पड़े। यह प्रक्रिया पूरी तरीके से विज्ञान पर आधारित है। इस मेथड के तहत बिल्डिंग अपने आप अंदर की तरफ गिरेगी। इमारत का ढांचा और आस-पास की चीजों को ध्यान में रखते हुए हमने इस तरीके को पेश किया था।

एक रिपोर्ट के मुताबिक,बिल्डिंग को ढहाने का काम कर रही एडिफिस इंजीनियर्स की टीम का कहना है कि 250 से 300 किलोग्राम की दर से प्लास्टिक विस्फोटक बिल्डिंग में रखे जा रहे हैं। इसके साथ ही बिल्डिंग में 3,500 किलोग्राम विस्फोटक भी रखा जाना है। इमारत के अंदर और इमारत के बाहर की बाहरी हिस्से को तोड़ना और विस्फोटक डालने के लिए इमारत में छेद करना और जियोटेक्सटाइल और चेन लिंक फेंसिंग से लपेटने का काम 25 जुलाई तक ही पूरा हो गया था। इस दौरान चीफ इंजीनियर उत्कर्ष मेहता कहते है कि ,इस बिल्डिंग को ढहाने में सिर्फ 15 मिनट ही रहेंगे। इसे लगभग 6 महीने में साफ कर दिया जाएगा।

अगस्त 28 तक पूरा होगा काम

एडिफिस कंपनी ने यह भी दावा किया है कि 24 अगस्त तक सियान और एपेक्स बिल्डिंग में विस्फोटक लगाने का काम पूरा कर लिया जाएगा। टॉवर सियान में तो पूरी तरह से विस्फोटक लग चुके हैं। वहीं एपेक्स का काम अभी बाकी है। एपेक्स टावर में 32 और सियान में 29 फ्लोर हैं। टॉवर गिराने के लिए बिल्डिंग के कॉलम और बीम में विस्फोटक भरे जाते हैं। बिल्डिंग के कॉलम और बीम को वी शेप में काटा जाता है। फिर उसके अंदर विस्फोटक सामान रख दी जाती है। इसके अलावा बिल्डिंग को गिराने के लिए विस्फोटक ग्राउंड फ्लोर से लेकर 1 और 2 फ्लोर तक तो लगातार रखा जाता है,लेकिन उसके बाद फ्लोर में गैप रखा जाता है। विशेषज्ञों मुताबिक,किसी भी बिल्डिंग को गिराने के लिए उस बिल्डिंग के कॉलम और बीम में भी विस्फोटक भरा जाता  है। बिल्डिंग के एपेक्स टावर में 11 और सियान में 10 प्राइमरी विस्फोट किए जाने हैं। इसके अलावा दोनों टावरों में सात-सात सेकेंडरी ब्लास्ट होंगे। बिल्डिंग को गिराने से  पहले आस – पास के टावर एटीएस ग्रीन विलेज में 736 फ्लैट और एमराल्ड कोर्ट में 650 फ्लैट खाली किए जाने हैं। यहां रहने वाले लगभग 700 हजार परिवारों को सेक्टर-93 ए स्थित पाशर्वनाथ प्रेस्टीज सोसाइटी, सेक्टर-93 की पूर्वांचल सिल्वर सिटी और सेक्टर-137 की पूर्वांचल सोसाइटी में ठहराया जाएगा।

किए जाएंगे खास इंतजाम

इस दौरान सुपरटेक ट्विन टावर के चारों ओर कुछ दूरी तक आना- जाना को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। बिल्डिंग के उत्तर में ‘एमराल्ड कोर्ट’ के सामने बने रोड,राजधानी दिल्ली की ओर जाने वाली एक्सप्रेसवे की सर्विस रोड और टावर के पूर्व में सृष्टि और एटीएस विलेज के बीच बनी सड़क आए पश्चिम में पार्क से जुड़ी फ्लाईओवर तक एक्सक्लूशन जोन निर्धारित किया गया है। साथ ही 28 अगस्त को ध्वस्तीकरण के दौरान आधे घंटे के लिए नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेवे को भी बंद किया जाएगा। दोपहर 2:15 से लेकर 2:45 बजे तक एक्सप्रेवे बंद रहेगा। इसकी पूरी तैयारी भी कर ली है। इस दौरान आने वाले लोगों के लिए ट्रैफिक पुलिस डायवर्जन व्यवस्था करेंगी।  सुरक्षा को देखते हुए इस दौरान फायर की गाड़ियां और एम्बुलेंस को भी तैनात किया जाएगा।इसके अलावा इमारत गिरने से पैदा होने वाले धूल के गुबार को कंट्रोल करने के लिए भी खास इंतजाम किए गए हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक,एडिफिस कंपनी ने बताया कि, बिल्डिंग के हर एक माले पर जीओ फाइबर क्लॉथ का जाल लगाया गया है। जिसके लगने से बिल्डिंग का मलबा इधर-उधर नहीं जाएगा। यहाँ तक कि यह जाल बिल्डिंग के मलबे के धूल को उड़ने से रोकने में पूरी तरीके से मदद करेगा। बिल्डिंग के मालवा रोकने के लिए चारो तरफ आसपास लोहे की दीवार भी खड़ी की जा रही है। इस पर मेहता का कहना है कि,एहतियात बरतने के लिए जहां-जहां विस्फोटक लगाए जाते हैं उसे कवर किया जाएगा और आस-पास की इमारतों को भी कवर किया जाएगा।

गौरतलब है कि,सुपरटेक बिल्डिंग का निर्माण नोएडा सेक्टर 93 में किया जा रहा था। जिसका बंटवारा 2004 में किया गया और इसका एक नक्शा जारी किया गया। सेक्टर 93 का कुल क्षेत्रफल 48 हजार हेक्टेयर है तो उस समय इस क्षेत्र के नक्शे में 9 मंजिलों के 14 टावर का बनाने की मंजूरी दी गई। जिसमे समय समय पर संशोधन किए गए।सुपरटेक टावर को गिराए जाने का मूलभूत कारण इसकी ऊंचाई क्योंकि इसकी ऊंचाई नियमित स्थिति से बढ़ती गई और आरडब्ल्यूए से परमिशन लिए जानें की बात को बिल्डर ने अनदेखा किया जिसके कारण आरडब्ल्यूए के सदस्यों ने बाद में इसका विरोध भी किया। एक दूसरा कारण इन दोनों टावर्स के बीच की दूरी है जो आमतौर पर काम से काम 16 मीटर होनी चाहिए लेकिन इनके बीच 16 मीटर से कम गैप है। सुपरटेक के इस मामले की शुरुआत उस समय हुई जब उस क्षेत्र पर 40 40 मंजिला दो इमारतों को उस स्थान पर खड़ा किया जाने लगा जिसे नोएडा अथॉरिटी ने ग्रीन लैंड घोषित कर रखा था। जिस जमीन पर इस प्रकार के टावर या बिल्डिंग आदि बनाना बाधित था। इसके बावजूद इन टावरों को बनाने का कार्य शुरू किया गाया। लेकिन इसकी केवल 32 मंजिलें ही बनी थी की इसे ढहा देने का आदेश मिला है। क्योंकि वहा के ‘‘रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन’ से जुड़े लोगों ने इस बात का फैसला लिया की इस प्रोजेक्ट के खिलाफ आवाज उठाएगी। जिसमें लगभग 660 लोगों के समूह ने एक साथ मिल कर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। क्योंकि ये बिल्डिंग अवैध तरीके से बनाई जा रही है जो सही नहीं है। क्योंकि इसमें ग्रीन लेंड पर कब्जा किया जा रहा था और यही नहीं नोएडा अथॉरिटी भी इसमें पूर्ण रूप से अपना सहयोग कर रही थी। यह स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था कि इसमें नोएडा अथॉरिटी की मिलीभगत है। क्योंकि शुरुआत में जिसे उन्होंने ही खुद ग्रीनलैंड बताया अब उसपर इतना बड़ा प्रोजेक्ट शुरू कर दिया है । शुरुआत में इस योजना पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था जिस फैसले के खिलाफ बिल्डरों सुप्रीम कोर्ट गए और 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक को गिराने की मांग को स्वीकार कर लिया था।

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