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निजाम संपत्ति :भारत को मिली सारी रकम,पाकिस्तान को मिला गम 

अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को  एक बार फिर से झटका लगा है। इस मामले में ब्रिटेन के एक हाईकोर्ट ने भारत के पक्ष में फैसला सुनाया है। ब्रिटिश अदालत ने हैदराबाद के निजाम के करीब 306 करोड़ रुपये भारत को देने का फैसला किया है। ब्रिटेन की अदालत ने पाकिस्तान के दावों को अस्वीकार करते हुए कहा है कि इस धन पर निज़ाम के उत्तराधिकरियों और भारत का हक है।
लंदन के ‘रॉयल कोर्ट ऑफ जस्टिस’ के जज ‘मार्कस स्मिथ’ ने अपने फैसले में कहा कि हैदराबाद के सातवें निजाम उस्मान अली खान इस धनराशि के मालिक थे।
‘निजाम के बाद उनके वंशज और भारत इस रकम के दावेदार हैं। हैदराबाद के निजाम की ओर से मुकदमे की पैरवी कर रहे ‘पॉल हेविट’ ने कहा हमें खुशी है कि अदालत ने अपने फैसले में निजाम की संपत्ति के लिए उनके वंशजों के उत्तराधिकार को स्वीकार किया है।”
ये 306 करोड़ रूपये की कहानी शुरू होती है 1947 से,जब देश का बंटवारा हो चुका था। सिर्फ 3 रियासतें (जम्मू कश्मीर, हैदराबाद और जूनागढ़) छोड़कर तमाम रियासतों का भारत में विलय हो चुका था। लेकिन हैदराबाद के निजाम मीर उस्मान अली खान अपनी रियासत को आजाद मुल्क बनाने की तरकीब में थे।
निजाम ने पूरी कोशिश की, कि वो हैदराबाद को अलग मुल्क बनवा लें लेकिन देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल के कड़े रुख को देखते हुए वो सुरक्षित रास्ता भी तलाश रहे थे। साल 1947 में भारत-पाक विभाजन के दौरान हैदराबाद के सातवें  निजाम ने लंदन के एक बैंक में( 8 करोड़ 87 लाख रुपये) रकम जमा की थी। जो अब बढ़कर 35 मिलियन पाउंड (करीब 306 करोड़) हो चुकी है। 

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