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बिहारी मजदूरों के लिए नीतीश कुमार ने जारी की हेल्पलाइन नंबर, 100 करोड़ राहत कोष का ऐलान

कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए 22 मार्च की रात से देश को पूरी तरह से लॉकडाउन किया गया। ये लॉकडाउन 21 दिनों तक जारी रहेगा। हर राज्य में इसका सबसे बुरा असर दिहाड़ी मजदूरों को हुई। उनके पास कोई काम नहीं। काम नहीं तो पैसा भी नहीं। जब पैसा नहीं है तो न रहने की जगह बचती है उनके पास और न ही खाना खाने को। ऐसे में मजबूरन लोग अपने बच्चों और परिवारों के साथ पैदल ही अपने गांव पहुँचने के लिए मजबूर हुए हैं। ये जानते हुए कि उनका सफर आसान नहीं। महीने लग सकते हैं। उसके बाद भी वो घर के लिए निकल पड़ें। क्योंकि बस, ट्रेन सब बंद हैं। कुछ बस चलें भी लेकिन पूरे परिवार को ले जाने के लिए किराये के पैसे नहीं थे। इस विपदा के समय बस वालों की ओर से मनमाना किराये की मांग से लोग परेशान हुए। जिसके कारण उनके पास सिर्फ एक ही रास्ता सुझा वो था पैदल यात्रा।

हर राज्य में बिहारी भारी मात्रा में हैं। दिल्ली में खासकर इतने बिहारी हैं कि चुनाव के वक़्त सभी की नजरें बिहारी वोट पर होती है। लेकिन जब उन्हें जरूरत पड़ी तो किसी भी पार्टी या सरकार ने इन सभी के बारे में नहीं सोचा। उत्तराखंड के कई परिवार और मजदूर में दिल्ली में फंसे थे। उत्तराखंड सरकार को जब इस बात की जानकारी मिली तो वो सारी व्यवस्था कर सभी लोगों को उत्तराखंड सुरक्षित पहुचाई।

हर चैनल हर न्यूज़ साइट पर इन खबरों को दिखाया गया। इतना ही नहीं राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पूर्व सहयोगी रहे प्रशांत कुमार को भी इसको लेकर बयान देना पड़ा कि मुख्यमंत्री को अपनी जनता की सुध नहीं, उन्हें शर्म आनी चाहिए। तब जाकर असर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर दिखा। नीतीश सरकार अब प्रदेश से बाहर फंसे बिहारियों की मदद के लिए आगे आए हैं।

बिहार सरकार ने राज्य के बाहर फंसे लोगों की मदद के लिए अधिकारियों की एक टीम बनाई है। ये टीम घर से फंसे बिहार के लोगों के रहने-खाने की व्यवस्था देखेगी। राज्य सरकार की तरफ से दो नंबर जारी किए गए हैं। ये दो नम्बर 981831252 और 9773711261 हैं। इस नम्बर पर कॉल कर आप सहायता मांग सकते हैं। आपको इन दिए गए नंबरों पर कॉल करके जानकारी देनी होगी। इसके बाद टीम आपकी मदद की व्यवस्था करेगी।

इन दो नंबरों के अलावा भी सरकार ने कुछ अन्य नंबर भी जारी किए हैं। बिहार के श्रम मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कोषांग पदाधिकारियों का नंबर जारी की है।9476191436 नंबर पर कॉल कर आप मुख्य सचिव सुधीर कुमार से बात कर अपनी समस्या बता सकते हैं। इसके अलावा 9431019731, 7631499034, 9973904546 इन तीन नंबरों पर भी कॉल कर सकते हैं। बिहार सरकार आपकी मदद के लिए आगे आएगी।

वहीं दूसरी तरफ बिहार सरकार ने लॉकडाउन से परेशान राज्य के गरीब जनता के लिए 100 करोड़ रुपये देने का ऐलान किए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को गरीबों के लिए 100 करोड़ राहत पैकेज का ऐलान की है। उन्होंने कहा, “वैसे बिहार के लोग जो लॉकडाउन की वजह से दूसरे राज्यों में फंसे हैं उनको लेकर राज्य सरकार ने विशेष योजना तैयार की है। जो भी लोग जहां फंस गए हैं, उनको वहां पर ही रखकर खाने-पीने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।”

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आगे कहा कि दिल्ली स्थित रेजिडेंट कमिश्नर विपिन कुमार को सभी व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है। लॉकडाउन होने की वजह से कई लोग फंस गए हैं। वो अपने घर वापस आना चाहते हैं। सबकी व्यवस्था की जाएगी। इनका सारा खर्च बिहार सरकार उठाएगी।

राज्य सरकार के मुताबिक, स्वास्थ्य की दृष्टि से उचित यही होगा कि जो जहां हैं उन्हें वहीं रोक दिया जाए। जहां तक राज्य के अंदर रह रहे रिक्शा-ठेला चालकों की बात है और वैसे मजदूर जो फुटपाथ पर दिन गुजार रहे हैं, उन सब के भोजन के लिए आपदा केंद्र बनाए गए हैं।

बिहार सरकार ने दिल्ली में मौजूद बिहार सरकार के पदाधिकारियों को यह निर्देश दिया है कि वहां फंसे हुए बिहार के मजदूरों को तत्काल राहत पहुंचाई जाए। बता दें कि दिल्ली में काम करने वाले तकरीबन 250 से ज्यादा मजदूरों ने श्रम विभाग को फोन कर मदद की गुहार लगा चुकी है। दिल्ली के अलावा कई राज्यों में बिहार के लोग फंसे हुए हैं।

अररिया जिले के नरपतगंज के रहने वाले मजदूरों ने एक वीडियो बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मदद की गुहार लगाई थी। वीडियो बनाने वाले मजदूर दिल्ली और पंजाब में मजदूरी करते हैं। उनके साथ दस और मजदूर थे। ये मजदूर अपने घरों की स्थिति को दिखाते हुए बता रहे थे कि राशन से लेकर गैस सिलेंडर तक खाली है और ऐसे समय में हमारी मदद मालिक भी नहीं कर पा रहा है।

आपको बता दें कि अमृतसर में लगभग 2000 मजदूर फंसे हुए हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र, जम्मू, राजस्थान और तमिलनाडु समेत कई प्रदेशों में बिहार के प्रवासी मजदूर फंसे हुए हैं। ऐसे में नीतीश कुमार की सरकार की पहल इनकी मजबूरी में सहायक तो बन पाएगी।

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