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निहंग नाराज, अलग हो सकते हैं किसान आंदोलन से 

पिछले ग्यारह महीनों से जारी किसान आंदोलन में एक दलित युवक की सिंधु बॉर्डर पर हुई हत्या बाद बैकफुट पर आता नजर आने लगा है। लखबीर सिंह की हत्या आंदोलन में शामिल निहंगों द्वारा की गई। जिसके बाद से किसान आंदोलनकारी आपस में ही भिड़ते नजर आ रहे हैं जिसके चलते किसान आंदोलन की पकड़ अब कमजोर होने लगी है।

लखबीर सिंह की हत्या के बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने अपनी अहम बैठक में निहंगों से दूरी बनाने का एलान कर डाला है। जिसके बाद अब निहंगों और संयुक्त किसान मोर्चा में भिड़ंत के आसार बन गए हैं। निहंगों ने अब सिंघु बार्डर यानी किसान आंदोलन से पैर पीछे खींचने को लेकर आगामी 27 अक्टूबर को निहंग महापंचायत बुलाई है। निहंगों ने इस महापंचायत को धार्मिक एकता नाम दिया है। महापंचायत में यह तय होगा तीनों कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे प्रदर्शन में रहेंगे या फिर वापस पंजाब चले जाएंगे।

गौरतलब है कि 15 अक्टूबर को दलित युवक लखबीर सिंह की हत्या का मामला सामने आया था। जिसके बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने बयान जारी कर निहंगों से दूरी बनाने की बात कही। घटनास्थल पर मौजूद एक निहंग समूह ने इसकी जिम्मेदारी लेते हुए कहा था कि यह घटना मृतक के सिख धर्म ग्रन्थ की बेअदबी करने की कोशिश के कारण हुई।

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इस हत्या से मचे बवाल बाद जिसके बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा था कि हम इस भीषण हत्या की निंदा करते हैं और यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि इस घटना के दोनों पक्षों, निहंग समूह और मृतक व्यक्ति का संयुक्त किसान मोर्चा से कोई संबंध नहीं है। साथ ही सयुंक्त किसान मोर्चा  ने यह भी कहा कि हम किसी  धार्मिक पाठ या प्रतीक की बेअदबी के खिलाफ है। संयुक्त किसान मोर्चा किसी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं देता है। संयुक्त किसान मोर्चा मांग करता है कि हत्या और बेअदबी के पीछे साजिश के आरोप की जांच कर दोषियों को कड़ी सजा दी जाए। हमेशा की तरह संयुक्त किसान मोर्चा किसी भी कानूनी कार्रवाई में पुलिस और प्रशासन का सहयोग करेगा।

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संयुक्त किसान मोर्चा के बयान के बाद निहंग अपने आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। बताया जा रहा है कि 27 अक्टूबर को निहंग द्वारा आयोजित महापंचायत में निहंग या तो आंदोलन से दूरी बना लेंगे या फिर आंदोलन की अगुवाई करेंगे। इस पर राजनितिक जानकारों का कहना है संयुक्त किसान मोर्चा के सामने एक बड़ी विडंबना है कि अगर वह निहंगों का साथ दे तो किसान आंदोलन की छवि धूमिल हो सकती है। वहीं दूसरी तरफ निहंगों के चले जाने से किसान आंदोलन बेजान हो जाएगा। दोनों ही स्थितियां में राजनितिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले के बाद किसान आंदोलन पर बड़ा असर पड़ेगा।

आंदोलनरत निहंग इस बात से बहुत नाराज हैं कि संयुक्त किसान मोर्चा के बयान बाद ही पुलिस कार्रवाई हुई है। जिसके कारण अब किसान मोर्चा और निहंग संगठनों अलग-अलग रणनीति तैयार कर रहे हैं। अखिल भारतीय किसान सभा महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा है कि 10 महीने से किसान आंदोलन को बदनाम करने का एक संयोजित प्रयास चल रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा से इसका कोई संबंध नहीं है। कृषि कानूनों को लेकर सिंघु बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन के बीच निहंग कई बार संयुक्त किसान मोर्चा के लिए समस्या बन चुके हैं। यही वजह है कि दो महीने पहले किसान नेता बलवीर सिंह राजेवाल को कहना पड़ा था कि निहंगों का यहां कोई काम नहीं है, उन्हें यहां से चले जाना चाहिए।

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फिलहाल पंजाब के युवक लखबीर की हत्या में तीन और आरोपी पुलिस के रडार पर हैं। उनमें से दो की पहचान करने का दावा किया जा रहा है। पुलिस टीम उनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है। साथ ही इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के अलावा भी कई अहम वीडियो पुलिस के हाथ लगे हैं। पुलिस क्षेत्र में लगे सीसीटीवी की फुटेज भी खंगाल रही है। लखबीर सिंह की हत्या के आरोपित निहंग सरबजीत सिंह, भगवंत सिंह, गो¨वद प्रीत व नारायण सिंह आत्मसमर्पण कर चुके हैं।

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