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नेपाल सरकार ने दो भारतीय पर्वतारोहियों पर लगाया 6 साल का बैन

दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट एवरेस्ट पर चढ़ना हर किसे के बस की बात नहीं है। कई पर्वतारोहियों ने इस पर चढ़ते समय अपनी जान तक गंवा दी है। हर साल दुनियाभर से आने वाले पर्वतारोही माउंट एवरेस्ट को फतेह करने के लिए आते है। लेकिन उनमें से कुछ ही ऐसे होते है जो इस को फतेह कर पाते है। इसी बीच भारत के दो पर्वतारोहियों पर झूठी जानकारी देने का आरोप लगा है। नेपाल के सांस्कृति मंत्रालय ने दो भारतीय पर्वतारोहियों पर 6 साल का बैन लगा दिया है। दोनों पर्वतारोही अब नेपाल में 6 साल तक  एवरेस्ट या नेपाल में मौजूद अन्य किसी पहाड़ी पर नहीं चढ़ पाएंगे।

झूठी जानकारी देने वाले पर्वतारोही भारत के हरियाणा राज्य के रहने वाले है। एक का नाम नरेंद्र सिंह यादव और सीमा रानी है। इन दोनों ने करीब चार साल पहले यह दावा किया था कि उन्होंने माउंट एवरेस्ट को फतेह कर लिया है। जिसके बाद नेपाल सरकार ने उन्हें सर्टीफिकेट दे दिया था। लेकिन अब मामले की जांच से पता चला की दोनों ने माउंट एवरेस्ट को फतह करने का दावा झूठा था। नेपाल के मंत्रालय ने बताया है कि उनकी जांच में ये पाया गया है कि दो भारतीय पर्वतारोही (नरेंद्र, सीमा) ने नकली डॉक्यूमेंट जमा किए थे। जिसमें माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की फोटो भी नकली थी। ऐसे में अब उनको दिए सर्टिफिकेट को वापस लिया जा रहा है, साथ ही उनपर प्रतिबंध लगाया जा रहा है।

इतना ही नहीं नेपाल सरकार ने दोनों को गाइड करने वाले कोच पर भी 10 हजार नेपाली रूपयों का जुर्माना लगाया हैं। दोनों ने नेपाल टूरिज्म एक्ट का उल्लघंन किया है। नरेंद्र और सीमा जिस टीम में शामिल थे, उनमें टोटल 14 लोग शामिल थे। बता दें टीम लीडर की शिकायत पर ही नेपाल सरकार ने जांच शुरू की थी, जिसके बाद मामले की सच्चाई सामने आई है। साल 2016 में जब नरेंद्र और सीमा के माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने की बात सामने आई थी, तब काफी सुर्खियां बनी थीं। सीमा तो नेपाल में फंस भी गई थी, तब तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर उन्हें वापस लाने की बात कही थी।

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