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कल के नतीजे तय करेंगे एनडीए गठबंधन का भविष्य

एनडीए में बिखराव की शुरुआत चंद्रबाबू नायडू से हुई

  पांच राज्यों के नतीजे बाद एनडीए में हो सकती है बड़ी उथल-पुथल

भाजपा के कई सांसद भी छोड़ सकते हैं पार्टी

दलित नेता सावित्री बाई फुले दे चुकी हैं भाजपा से इस्तीफा

 

ग्यारह दिसंबर का दिन भारतीय राजनीति के वर्तमान दौर में बड़े बदलाव का दिन हो सकता है। कल पांच राज्यों में हालिया संपन्न विधानसभा चुनावों के नतीजे आने वाले हैं। सात दिसंबर को राजस्थान में हुए मतदान पश्चात जारी हुए एक्जिट पोल के नतीजों ने कांग्रेसी खेमे में भारी उत्साह तो भाजपा भीतर बड़ी बेचैनी पैदा कर दी है। यदि कांग्रेस राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सरकार बना पाने में सफल होती है तो इसका सीधा असर 2019 के लोकसभा चुनावों में पड़ना तय है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन चुनावों के नतीजे एनडीए गठबंधन में शामिल उन दलों को भी अपनी रणनीति बदलने के लिए मजबूर कर सकते हैं जो भाजपा के कट्टर हिंदुत्व की राह पर चल पड़ने से खुद को असहज महसूस कर रहे हैं। 9 दिसंबर को यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के घर जन्मदिन की बधाई देने के लिए द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन का पहुंचना कांग्रेस के बढ़ते ग्राफ का एक महत्वपूर्ण संकेत है। पिछले काफी अर्से से भाजपा नेतृत्व स्टालिन को अपनी तरफ खींचने का जोरदार प्रयास कर रहा था। लेकिन मंझे हुए राजनेता स्टालिन ने कांग्रेस और भाजपा संग समान दूरी बनाए रखी। अब यकायक ही सोनिया गांधी को उनके जन्मदिन पर बधाई देने स्वयं दिल्ली पहुंचे स्टालिन के कदम को उनके राजनीतिक निर्णय से जोड़कर देखा जा रहा है।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में शामिल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर भी पिछले काफी अर्से से भाजपा विरोधी तेवर अपना चुके हैं। राजभर के करीबियों का दावा है कि जल्द ही वे योगी सरकार से अलविदा कह विपक्षी महागठबंधन में शामिल होने जा रहे हैं। बिहार में भी एनडीए का कुनबा बिखरने की कगार पर है। राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के नेता और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा खुलकर भाजपा नेतृत्व से अपनी नाराजगी जता चुके हैं। बहुत संभावना है कि वे मोदी सरकार से इस्तीफा दे एनडीए से विदा ले लें। यदि ऐसा होता है तो बिहार में भाजपा गठबंधन को भारी झटका लग सकता है। दरअसल, एनडीए में बिखराव की शुरुआत तेलगुदेशम पार्टी के गठबंधन से बाहर निकलने के साथ ही शुरू हो गई थी। जो अब परवान चढ़ती नजर आ रही है। यदि इन पांचों राज्यों, विशेषकर हिंदी पट्टी के तीन राज्यों में नतीजे भाजपा के खिलाफ जाते हैं तो न केवल एनडीए, बल्कि स्वयं भाजपा के कई दिग्गजों का पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावत करना तय माना जा रहा है।

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