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एनसीपी+काग्रेस+शिवसेना =सीएम आदित्य ठाकरे !

 

अब तक के शिवसेना के मुखिया उद्धव ठाकरे का रुख और बयानबाजी रहे उससे यह तो स्पष्ट हो गया है कि वह हर हाल में अपने बेटे आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं। आज तो उन्होंने शिवसेना का ही मुख्यमंत्री बनने की बात कहकर अपने तेवर स्पष्ट कर दिये। शिवसेना भले ही केंद्र में भी एनडीए में शामिल हो पर वह समय-समय पर भाजपा के खिलाफ मोर्चा संभालती रही है।

उधर, महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आज इस्तीफा देने से यह तो स्पष्ट हो गया है कि वहां पर भाजपा की सरकार नहीं बनने जा रही है। ऐसे में दो ही विकल्प बचे हैं। एक सूबे में राष्ट्रपति शासन लगे और दूसरा एनसीपी और कांग्रेस के समर्थन से शिवसेना की सरकार।

बहरहाल, उद्धव ठाकरे एक तीर से दो निशाने साध रहे हैं। एक से तो वह अपने बेटे को पहली बार विधायक बनते ही मुख्यमंत्री के पद पर बैठाना चाहते हैं दूसरे वह भाजपा को भी आईना दिखाना चाहते हैं। जिस तरह से शिवसेना के ढाई साल के मुख्यमंत्री पद मांगने पर और फडनवीस का पांच साल तक मुख्यमंत्री बने रहने की जिद पर अड़े रहे, ऐसे में यह शिवसेना को ज्यादा अखर रहा था।

वैसे भी नैतिकता के आधार पर शिवसेना की बात भाजपा को मान लेनी चाहिए थी। भाजपा की सरकार केंद्र के अलावा कई सूबे में चल रही है। शिवसेना भाजपा का मजबूत सहयोगी दल माना जाता है। ऐसे में भाजपा को शिवसेना की बात मानकर बड़े भाई का धर्म निभाना चाहिए था।

दरअसल उद्धव ठाकरे भी जानते हैं कि एनसीपी और कांग्रेस के साथ उनकी सरकार ज्यादा दिन नहीं चल पाएगी, पर इन सब परिस्थितियों में वह अपने बेटे को मुख्यमंत्री जरूर बना ले जाएंगे और भाजपा को भी अपनी ताकत दिखा देंगे। यदि किन्हीं कारणों से सरकार गिरती भी है और एनडीए की बनती है तो भाजपा पर शिवसेना का दबाव रहेगा।

मुंबई कांग्रेस के स्थानीय नेताओं का शिवसेना के रुख को सही बताया और जिस तरह से आज सुबह से संजय राउत शरद पवार के साथ रहे। जिस तरह से शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस नेताओं की सरकार बनाने की कवायद शुरू हो गई है उससे उससे लगने लगा है कि महाराष्ट्र में भाजपा को सबक सिखाने के लिए एनसीपी और कांग्रेस समर्थन देकर शिवसेना की सरकार बनवा सकते हैं।

गौरतलब है कि 288 सीटें वाली महाराष्ट्र विधानसभा में भाजपा के 105, शिवसेना के 56, एनसीपी के 54 और कांग्रेस के 44 विधायक हैं। सरकार बनाने के लिए 145 विधायक चाहिए। शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के विधायक मिलाकर 154 बैठ रहे हैं, जो सरकार बनाने के लिए पर्याप्त संख्या से ज्यादा हैं।

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