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नागालैंड के लोकायुक्त ने दिया इस्तीफा,सरकार से था जबर्दस्त टकराव

राज्यों में भ्रस्टचार पर नजर रखने  के लिए लोकायुक्तों  को नियुक्त किये जाने की मांग देशभर से हो रही हैं|  लेकिन जनता को यह भी समझ लेना होगा की लोकायुक्तों और सरकारों के बीच टकराव भी हो सकते  हैं पूर्वोत्तर के नागालैंड राज में तो लोकायुक्तों और सरकारों के बीच टकराव के इतने ख़राब हालत बने की  मामला सुप्रीमकोर्ट तक जा पहूचा | नगालैंड के लोकायुक्त जस्टिस उमा नाथ सिंह ने सरकार के साथ टकराव के चलते  सोमवार 1 फरवरी को अपना इस्तीफा दे दिया। दो साल से चल रहे इस नाटकीय ड्रामे  के बाद उमानाथ सिंह के इस्तीफे की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दे दी है। नगालैंड सरकार ने राज्य में लोकायुक्त के कामकाज पर सवाल खड़ा किया था।  सरकार के मुताबिक वह अपने लोकायुक्‍त की ‘असंगत और मनचाही’ मांगों से इतनी तंग आ गई क‍ि उसने पिछले साल अगस्त में सुप्रीम कोर्ट से मांग कर डाली कि लोकायुक्‍त की समस्‍त शक्तियां उनसे छीन ली जाएं।

दरअसल, लोकायुक्‍त के रूप में नियुक्ति के दो महीने के भीतर ही सरकार और लोकायुक्त जस्टिस सिंह  के बीच टकराव शुरू हो गया था । सरकार के मुताबिक  टकराव तब जयादा हो गया जब जस्टिस सिंह ने सिनर्जी इस्‍पात प्राइवेट लिमिटेड बनाम बारबरा एलिबेथ सिमोस मामले में मध्‍यस्‍थ की भूमिका निभाने की अनुम‍ति मांगी। हालांकि, नियमानुसार लोकायुक्‍त को उसके संवैधानिक पद के दायित्‍वों के अलावा कुछ और करने की साफ मनाही है। इसके बाद टकराव तब जायदा बढ़ गया जब जस्टिस उमा नाथ सिंह  ने रहने के लिए मुख्यमंत्री के पुराने बंगले की मांग के अलावा अपनी सुरक्षा के लिए सेना के जवान भी नियुक्‍त करने की मांग की थी। इतना हे नहीं  नगालैंड सरकार के अनुसार लोकायुक्‍त ने   पुलिस कमिश्‍नर से हर बार उन्‍हें एयरपोर्ट से लेने और छोड़ने जाने को कहा था।

आखिर अब इस टकराव का अंत हो गया हैंसर्वोच्च न्यायलय के मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने लोकायुक्त की अपील को स्वीकार करते हुए उन्हें पद से इस्तीफा देने की मंजूरी दी। साथ ही सु्प्रीम कोर्ट ने नगालैंड सरकार को भी इस्तीफे को तत्काल प्रभाव से मंजूर करने का निर्देश दिया।

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