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अभी भी मुस्लिम पक्ष के पास है दो कानूनी विकल्प खुले

सुप्रीम कोर्ट ने आज ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए अयोध्या की विवादित भूमि रामलला विराजमान को दे दी है। आपको बता दें कि 9 साल पहले 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा जमीन को तीन हिस्सों में बांटने का फैसला सुनाया गया था जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पंहुचा। हालांकि अब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में 5 जजो की टीम ने फैसला हिन्दू पक्ष में सुनाया है लेकिन अभी भी मुस्लिम पक्ष के पास दो कानूनी विकल्प खुले हैं।

आपको बता दें कि फैसले के 30 दिन के भीतर पुनर्विचार याचिका यानी रिव्यू पिटिशन दाखिल की जा सकती है। यही नही इसके बाद क्यूरेटिव पिटिशन भी दाखिल की जा सकती है। फैसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल करने से पहले ये बताना होगा कि कोर्ट के फैसले में कहां त्रुटि है। पुनर्विचार याचिका के दौरान वकील कोई जिरह नही कर सकते। कोर्ट जो फैसला दे देता है उसी फैसले की फाइलों और रिकॉर्ड्स पर ही विचार किया जाता है। अगर रिव्यू पिटिशन के दौरान दिए गए फैसले से भी किसी को ऐतराज होता है तो वह क्यूरेटिव पिटिशन दाखिल कर सकता है। क्यूरेटिव पिटिशन में सिर्फ कानूनी पहलुओं पर ही विचार किया जाता है.

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