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‘मुरलीधारी’ आ रहे हैं, ‘भगवाधारी’ घबरा रहे हैं?

समाजवादी पार्टी ने 15 जून को एक ट्वीट जारी किया । जिसमें उन्होंने समाजवादी पार्टी का संदेश देता गीत प्रसारित किया गया। समाजवादी पार्टी के ट्विटर पर लिखा गया कि “माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी ने सपा नेता श्री राजकुमार भाटी द्वारा रचित गीत ‘अखिलेश आ रहे हैं’ का वीडियो को समाजवादी पार्टी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी किया।” इस गीत के जारी होने के साथ ही उत्तर प्रदेश में सियासी हलचल मच गई। कई न्यूज़ चैनल ने इस गीत को दिखाते हुए इस पर बडी डिबेट करा दी।
मीडिया को इस गीत की एक लाइन  ” मुरली धारी भेष बदलकर आ रहे हैं”  पर समाजवादी पार्टी का 2022 का एजेंडा दिखाई देने लगा। विपक्ष की नजर में भी इस गीत के जरिए सपा की आगामी 2020 की रणनीति दिखाई दी है।
भाजपा अभी तक श्री राम के नाम पर सत्ता में आती रही है। चाहे उत्तर प्रदेश हो या अन्य कोई प्रदेश। लेकिन इस बार राम नाम पर भाजपा की राजनीति बटती नजर आ रही है। सबसे पहले राम की राजनीति को बांटने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल रहें।  जिन्होंने भाजपा के ‘राम’ के सामने दिल्ली में ‘हनुमान’ को खड़ा कर दिया।
इसी के साथ ही केजरीवाल ने एनआरसी पर हाईकोर्ट की टिप्पणी किए जाने के बाद भी मौन साध कर तुष्टिकरण की राजनीति पर सियासी चाल चली। उन्होंने  एक तीर से दो निशाने मार दिए। पहला यह कि दिल्ली में उन पर अल्पसंख्यकों को सपोर्ट करने के आरोप नहीं लगे तो। दूसरी तरफ यह भी तय था कि अल्पसंख्यक मतदाता आखिर जाना तो आप के ही पाले में था।

इसके बाद जब पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव हुए तो वहां पर भी भाजपा राम के नाम पर वोट बटोरने की कोशिश में जुट गई। लेकिन वहां पर टीएमसी की नेता ममता बनर्जी ने मां काली को सामने ला खडा किया। बकायदा ममता बनर्जी ने मां काली का पाठ करके लोगों में राम के प्रति राजनीति करने वालों को आईना दिखा दिया।
इस बार उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने भगवान राम के समक्ष श्रीकृष्ण को खड़ा कर दिया है। हालांकि समाजवादी पार्टी की ऐसी कोई मंशा नहीं है। लेकिन जिस तरह से विपक्षी दलों ने “अखिलेश आ रहे हैं” वाले गाने को मुद्दा बनाया है उससे लगता है की समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में हिंदू वोट बैंक में भाजपा के समानांतर खड़ी हो सकती है।
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने इस गीत को लिखा है। इस गीत के वीडियो में सपा सरकार में अखिलेश यादव की तरफ से जारी की गई योजनाओं की भी झलक दिखाई गई है।सपा के इस गीत के जरिए जनता से लुभावने वादे किए गए हैं और बताया गया है कि अखिलेश के आने से शिक्षा, किसान और अन्य सुविधाओं की स्थिति पहले से बेहतर होगी। इस गीत में सपा सरकार के पिछले कार्यकाल में किए गए विकास कार्यों का विवरण पेश किया गया है। इसके साथ ही 2022 के लिए पार्टी के घोषणा पत्र की ओर भी संकेत किया गया है।
इस गीत पर विवाद नहीं होना चाहिए । विवाद इसलिए भी नहीं होना चाहिए क्योंकि हम किसी इंसान के अंदर फरिश्ता देखते हैं। फरिश्ता ही इंसान बनकर किसी की सेवा करते हैं। अगर अखिलेश यादव के अंदर हमने मुरलीधारी का फरिश्ता देखा है तो यह गलत नहीं है।
– मुनि रमन ,अखिलेश आ रहें हैं गीत के गायक
 ‘मुरली धारी कृष्ण भेष बदलकर आ रहे हैं। अखिलेश आ रहे हैं, अखिलेश आ रहे है।’ समाजवादी पार्टी के इस गीत के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में सियासी तूफान खड़ा हुआ है। फिलहाल भाजपा को अपने हिंदू वोट बैंक के खिसकने का डर लगने लगा है। सभी जानते हैं कि अल्पसंख्यक वोट उधर ही जाता है जहां भाजपा के खिलाफ मजबूत दल सामने होता है । उत्तर प्रदेश की राजनीति को देखें तो फिलहाल भाजपा के सामने समाजवादी पार्टी ही मजबूती से खड़ी नजर आ रही है। पिछले माह पंचायत चुनाव में समाजवादी पार्टी ने यह दिखा भी दिया है। वह पहले नंबर पर अपना स्थान बनाने में कामयाब रही है।
बताया जा रहा है कि पंचायत चुनाव 2022 के विधानसभा चुनाव के रिहर्सल थे। वैसे भी समाजवादी पार्टी के अलावा भाजपा के विपक्ष में अब बसपा और कांग्रेस कहीं दिखाई नहीं दे रही है। बसपा के अधिकतर नेता समाजवादी पार्टी में जा रहे हैं। जबकि कांग्रेस अपना अस्तित्व बचाने में जुटी हुई है। ऐसे में अल्पसंख्यक वोट की मजबूरी है कि भाजपा को टक्कर देती दिखती समाजवादी पार्टी की तरफ उसका रुझान रहेगा। बहरहाल समाजवादी पार्टी को अल्पसंख्यक वोटों की नहीं बल्कि बहुसंख्यक वोटों की जरूरत है। इसके मद्देनजर ही भाजपा की बेचैनी बढ़ती नजर आ रही है।
‘मुरलीधारी कृष्ण बदलकर भेष आ रहे हैं,’ पंक्ति पर जिस तरह भाजपा के लोग अनर्गल और बेहूदा बातें कर रहे हैं इससे उनकी बौखलाहट साफ झलकती है l ये अखिलेश यादव की लोकप्रियता से घबराए हुए हैं l
गीत में कुल 22 पंक्तियां हैं, किंतु भाजपा वालों ने एक ही पंक्ति सुनी है l बाकी इक्कीस पंक्तियां नहीं सुनी l भाजपाई मित्रों से इन पंक्तियों का जवाब भी मांगा जाना चाहिए :-
मेट्रो चली 5 शहरों में कितना सुंदर काम किया।
पार्क बनाए, सड़क बनाई देश में ऊंचा नाम किया।
रोटी कपड़ा दवा पढ़ाई सबका नीचा दाम किया,
याद करो अखिलेश राज में जनता जो सुख पाती थी।
कन्या धन और मासिक पेंशन माता बहने लाती थी । सौ नंबर की सेवा थी तो पुलिस समय से आती थी।
बीमारों को एंबुलेंस घर घर से लेकर जाती थी।
कृष्ण हमारे आराध्य भी हैं और आदर्श भीl कृष्ण जैसा बनने की इच्छा करना कोई पाप नहीं है l राम और कृष्ण लोक नायक थे। जिन्होंने सदैव जनता के कष्ट दूर किए l  यदि अखिलेश यादव जनता के कष्ट दूर करते हैं तो उनकी कृष्ण से तुलना करना क्यों गलत है l यदुवंशी अखिलेश यादव में कृष्ण की छवि देखना हर तरह से उचित है l भाजपा राम और कृष्ण के नाम पर व्यापार करती है। हम उनके आदर्शों को अपनाना चाहते हैं।
– राजकुमार भाटी,  प्रवक्ता समाजवादी पार्टी और इस गीत के रचयिता
‘अखिलेश आ रहे हैं’ गाने ने भाजपा की इस बेचैनी को और बढ़ा दिया है। भाजपा की प्रवक्ता नूपुर शर्मा के विचारों में इस बेचैनी को बखूबी महसूस किया जा सकता है । वह कहती है कि अपने आपको कृष्ण अवतार बताकर समाजवादी पार्टी के मुखिया भगवानों का मजाक उड़ा रहे हैं। वह कहती है कि अब समाजवादी पार्टी भगवान कृष्ण के भरोसे ही है। साथ ही वह ‘अयोध्या तो झांकी है, मथुरा – काशी बाकी है’ को समाजवादी पार्टी का 2022 का एजेंडा बता रही है। वह कहती है कि एक ऐसा नेता जो कभी ब्रज की होली नहीं खेला वह अपने आपको कृष्ण अवतार बता रहा है तो यह हास्यापद दिख रहा है।
उधर, राजनीतिक विश्लेषण करते हुए शांतनु गुप्ता कहते हैं कि जिस तरह समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में आगे बढ़ रही है उस तरह से लगता है कि अगर वह 2022 के विधानसभा चुनाव में आ गई और उसकी सरकार बन गई तो वह उत्तर प्रदेश में राम मंदिर नहीं बनने देगी। राम मंदिर के मुद्दे को पीछे करने के लिए ही अखिलेश यादव को ‘मुरलीधारी’ के अवतार में पेश किया जा रहा है

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