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चीन के साइबर हमले से अंधेरे में डूबी थी मुंबई: न्यूयॉर्क टाइम्स का खुलासा

लॉकडाउन के दौरान महाराष्ट्र में बढ़े साइबर अपराध, 410 मामले दर्ज 213 गिरफ्तार

परमाणु बमों, न्यूक्लियर हथियारों के बाद अब एक नए तरह के हथियार आ चुके है। जिसे साइबर हथियार कहते है। हर देश आज किसी भी देश पर साइबर हथियारों के जरिये नजर रखता है, और साइबर हथियारों से ही दूसरे देशों की खुफिया रिपोर्ट को हैक करके चोरी करता है। आज के समय में यह बोलबाला इतना ज्यादा बढ़ गया है कि हर देश इस हमले से सतर्क रहता है। भारत और चीन के बीच जिस समय सीमा पर विवाद चल रहा था, तब चीन ने भारत पर साइबर हमला किया था। इस बात का खुलासा अमेरिका के चर्चित अखबार न्यू्यॉर्क टाइम्स ने किया है। अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने भारत के मुंबई में पावर सप्लाई को पुरी तरह बाधित किया था।

जब हम लॉकडाउन के दौरान अपने घरों में कैद थे, तब भारत और चीन के सैनिकों के बीच गलवान घाटी में हिंसक झड़प हुई थी। हिंसक झड़प में भारत और चीन ने अपने कई सैनिकों को खो दिया था। इस घटना के कुछ महीनों बाद 13 अक्टूबर को मुंबई पूरी अधेंरे में डूब गई थी, यानि मुंबई की पावर सप्लाई कट हो गई थी। उस दौरान मुंबई को रोशन करने वाली कंपनी ने कहा था कि मुंबई को बिजली पहुंचाने वाले प्लांट में ग्रिड फैल हो गए है। जब मुंबई के पावर प्लॉट में ग्रिड फैल हो गए थे, उस समय लोकल ट्रेनें वही थम गई थी, शेयर मार्केट तक प्रभावित हो गई थी, अस्पतालों को अपने एमरजेंसी जरनेटर चलाने पड़े, क्योंकि कई मरीज जीवन रक्षक मशीनों पर मौत और जिंदगी के बीच झूल रहे थे।

अब न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में खुलास किया है कि जिस समय भारत और चीन के बीच गलवान घाटी में सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हो रही थी, तब मुंबई में बिजली गुल होने के बीच कनेक्शन हो सकता है। अखबार इसे चीन का भारतीय ग्रिड पर साइबर हमला बता रहा है। विशेषज्ञ मानते है कि चीन की यह भारत को धमकी थी, कि अगर वह सीमा पर ज्यादा सख्ती दिखाएंगे तो वह पूरे देश की बिजली आपूर्ति रोक सकते है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जब दोनों देशों के बीच संघर्ष चल रहा था, उस वक्त चीन साइबर हमले की तैयारी में लगा हुआ था। उसने मैलवेयर (हैकिंग सॉफ्टवेयर) को उस कंट्रोल सिस्टम (या नोड) में पहुंचाने में सफलता पा ली थी, जिसके जरिए भारत भर में पावर सप्लाई को मैनेज किया जाता है। इतना ही नहीं, मैलवेयर के दायरे में हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन वाले सब-स्टेशन और कोयले से चलने वाले पावर प्लांट भी थे। रिकॉर्डेड फ्यूचर’ के सीओओ स्टुअर्ट सॉलोमन का कहना है कि चीनी सरकार की ‘रेड एको’ नाम की एक फर्म ने इस काम को अंजाम दिया है। उसने खास साइबर तकनीक का इस्तेमाल करते हुए भारतीय पावर जेनेरेशन और ट्रांसमिशन ग्रिड के तकरीबन एक दर्जन महत्वपूर्ण नोड्स में हस्तक्षेप कर लिया है। इस खुलासे के बाद सवाल उठने लगे हैं कि 13 अक्टूबर को मुंबई में हुआ ब्लैक आउट क्या भारत को संदेश देने के लिए था। रिपोर्ट के मुताबिक, एक भारतीय अधिकारी ने बताया कि चीनी साइबर हमले पर इस महीने ही रिपोर्ट आने वाली है। हालांकि वह और अन्य अधिकारी इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं। उधर, साइबर एक्सपर्ट्स अब भी उस मैलवेयर कोड का पता लगाने में जुटे हैं, जो इस खुराफात के लिए जिम्मेदार है। साइबर हमलों में रूस का नाम सबसे ऊपर आता है क्योंकि उसने अपने पड़ोसी देश यूक्रेन में दो बार साइबर हमला करके ब्लैक आउट कर दिया था।

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