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मुकेश अंबानी पर लगे हेराफेरी के आरोप, रिलायंस समूह सकते में

देश के सबसे ताकतवर उद्योगपति पर लगे हेराफेरी करने के आरोपों का असर आने वाले समय पर रिलायंस समूह की कई बड़ी परियोजनाओं पर लगने के आसार हैं। यदि सुप्रीम कोर्ट पहले मामले में ‘सेबी एपिलेट ट्रिब्यूनल’ के आदेश को सही करार देता है तो रिलायंस समूह को न केवल एक हजार करोड़ की राशि का नुकसान होगा, बल्कि उसकी साख पर भी निगेटिव असर पड़ेगा।

 

दिन था शुक्रवार, तारीख थी 24 मार्च, वर्ष था 2017। इस दिन देश के सबसे रईस आदमी को तगड़ा झटका लगा था। इतना तगड़ा कि इस व्यक्ति का साम्राज्य थरथरा गया था। इस रईस आदमी का नाम है मुकेश धीरूभाई अंबानी और इन्हें तगड़ा झटका देने का काम किया था। शेयर बाजार की गतिविधियों पर नजर रखने वाली सरकार एजेंसी ‘सेबी’ ने। ‘सेबी’ के सदस्य जी महालिंगम ने मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस पेट्रोलियम लिमिटेड को अपने 12 स्टॉक ब्रोकर्स के साथ मिलकर धोखाधड़ी करके शेयर बाजार को प्रभावित करने और ऐसा करके 513 करोड़ रुपयों की अवैध कमाई का दोषी पाया था।

‘सेबी’ के विद्वान सदस्य ने रिलायंस पेट्रोलियम लिमिटेड और उसके 12 ब्रोकर्स कंपनियों को एक साल तक शेयर बाजार में काम करने से रोक दिया था। साथ ही आदेश दिया कि धोखाधड़ी, जालसाजी करके कमाई गई रकम 447.27 करोड़ को भय ब्याज ‘सेबी’ के खाते में जमा कराया जाए।

मुकेश अंबानी के लिए यह बड़ा झटका था। 447.27 करोड़ के जुर्माने से ज्यादा उन्हें धक्का फर्जीवाड़े के आरोप से लगा। शेयर बाजार में इसके चलते रिलायंस की साख को भारी धक्का पहुंचा। रिलायंस इसके खिलाफ ‘सेबी’ के उपर की संस्था ‘सेबी एपिलेट ट्रिब्यूनल’ में अपील के लिए चला गया। मामला इसके बाद लटक गया। 5 नवंबर 2020 को एपिलेट ट्रिब्यूनल ने अपना फैसला सुनाते हुए रिलायंस की अपील खारिज कर डाली। तब तक भय ब्याज यह रकम 447.27 करोड़ से बढ़कर हजार करोड़ तक पहुंच गई। रिलायंस ने ट्रिब्यूनल के आदेश को अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने रिलायंस की याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकारते हुए 18 अक्टूबर 2020 के दिन कंपनी को जुर्माने की मूल रकम का 50 प्रतिशत के करीब रकम 250 करोड़ तत्काल जमा कराने के आदेश दिए हैं। कोर्ट का इस मामले में फाइनल ऑर्डर आना अभी बाकी है।

फिर आया नए साल में अगला झटका। यह भी ‘सेबी’ ने रिलायंस समूह को लगाया है। ‘सेबी’ ने रिलायंस समूह के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी पर शेयर बाजार में हेराफेरी करने का दोषी पाते हुए 15 करोड़ का जुर्माना, उनकी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड पर 25 करोड़ का जुर्माना लगा डाला है।

देश के सबसे ताकतवर उद्योगपति पर लगे हेराफेरी करने के आरोपों का असर आने वाले समय पर रिलायंस समूह की कई बड़ी परियोजनाओं पर लगने के आसार हैं। यदि सुप्रीम कोर्ट पहले मामले में ‘सेबी एपिलेट ट्रिब्यूनल’ के आदेश को सही करार देता है तो रिलायंस समूह को न केवल एक हजार करोड़ की राशि का नुकसान होगा, बल्कि उसकी साख पर भी निगेटिव असर पड़ेगा।

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