चार जुलाई को केंद्र सरकार ने खरीफ फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की घोषणा की। इसकी घोषणा करते समय केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ‘हमने किसानों को फसल की लागत का कम से कम डेढ़ गुना दाम दिलाने का अपना वायदा पूरा किया। अब सरकार किसानों की आय दोगुना करने की दिशा में काम कर रही है।’ सरकार ने यह निर्णय ऐसे समय लिया है जब कई महीनों से आधा दर्जन से ज्यादा राज्यों के किसान आंदोलन कर रहे हैं। कर्ज ओर कृषि उपजों के दाम गिरने से किसान परेशान हैं। किसान सरकार से कर्ज माफी और स्वामीनाथन रिपार्ट को लागू करने की मांग कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने अपने कार्यकाल के अंतिम साल में एमएसपी बढ़ाने का फैसला लिया। इसलिए विपक्ष और कृषि विशेषज्ञ इसे चुनाव से जोड़ कर देख रहे हैं।
लोकसभा चुनाव 2019 से पहले केंद्र की मोदी सरकार ने किसानों को बड़ा तोहफा दिया है। खरीफ फसलों की लागत पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) डेढ़ गुना से ज्यादा बढ़ाने पर कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इस फैसले से किसानों को उनकी लागत का 50 फीसदी ज्यादा एमएसपी मिलेगा। सरकार ने धान, दाल, सोयाबीन, मूंगफली और मक्का जैसे 14 खरीफ फसलों पर एमएसपी को मंजूरी दी है। धान के लिए डेढ़ गुना से ज्यादा एमएसपी को मंजूरी दी गई है। धान का एमएसपी 200रुपए प्रति कि्ंवटल बढ़ाया गया है। सरकार के मुताबिक, धान की लागत 1166 रुपए है, जबकि न्यूनतम समर्थन मूल्य 1550 रुपए प्रति कि्ंवटल था। अब इसे बढ़ाकर 1750 रुपए प्रति कि्ंवटल कर दिया गया है। इससे पहले 2008-09 में धान की एमएसपी 155 रुपए प्रति कि्ंवटल बढ़ाई गई थी।
भारत में किसानों की दुर्दशा किसी से छुपी नहीं है। खासकर मध्यम और छोटे किसान कर्ज के तले दबा हुआ है। एक आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2001 से वर्ष 2015 तक (15 साल में) दो लाख 34 हजार से ज्यादा किसानों ने आत्महत्या किया है। केंद्र एवं प्रदेश सरकारें किसानों अपने को किसानों का हितैषी बता है, फिर भी किसाना की दशा में सुधार नहीं होता। इसका सीधा सा अर्थ है कि सभी सरकारों ने किसानों को छला और धोखा दिया है। जानकारी के मुताबिक देश में करीब 25 करोड़ लोग खेती- किसान करते हैं। जबकि 50 करोड़ लोग भारत में कृषक मजदूर हैं। बताया जा रहा है कि वर्तमान सरकार ए2$एफएल फॉर्मूला को अपनाने का प्रस्ताव लेकर आई है। फिलहाल, बाजरा, उड़द, अरहर जैसे कुछ फसलों के लिए ये फॉर्मूला लागू किया गया है।
सरकार से अभी भी कुछ किसान संगठन खुश नहीं है। उनका मानना है कि एमएसपी तय करने का जो फॉर्मूला स्वामीनाथन आयोग ने सुझाया था, उसे नहीं माना गया है। 18 नवंबर 2004 को तत्कालीन केंद्र सरकार ने एमएसपी तय करने और किसान के हितों के लिए एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय किसान आयोग का गठन किया था। इस आयोग ने साल 2006 में अपनी रिपोर्ट दी। जिसमें किसानों की दुर्दशा को दूर करने के लिए कई उपाय बताए गए हैं।
स्वामीनाथन आयोग के सुझाव के मुताबिक फसल उत्पादन मूल्य से पचास प्रतिशत ज्यादा दाम किसानों को मिले। किसानों को अच्छी क्वालिटी के बीज कम दामों में मुहैया कराए जाएं। गांवों में किसानों की मदद के लिए विलेज नॉलेज सेंटर या ज्ञान चौपाल बनाया जाए। महिला किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए जाएं। किसानों के लिए कृषि जोखिम फंड बनाया जाए, ताकि प्राकृतिक आपदाओं के आने पर किसानों को मदद मिल सके। इसके अलावा आयोग ने एमएसपी तय करने का जो फॉर्मूला दिया असल में स्वामीनाथ आयोग ने एमएसपी तय करने के लिए इनपुट कॉस्ट यानी लागत में खाद-बीज आदि पर खर्च, उसकी पूंजी या उधारी पर लगे ब्याज, जमीन के लिए यदि कोई किराया दिया गया है और किसान या उसके परिवार के श्रम का मजदूरी तय कर इसे जोड़ने का फॉर्मूला दिया है। इसे सी2 फॉर्मूला कहा जाता है। किसान संगठन एमएसपी सी2 फॉर्मूला से ही तय करने की मांग कर रही है। अभी एमएसपी तय करने के तीन फॉर्मूला है। पहला ए2 फॉर्मूला है। इसके तहत किसान की ओर से किया गया सभी तरह का भुगतान चाहे वो कैश में हो या किसी वस्तु की शक्ल में, बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरों की मजदूरी, ईंधन, सिंचाई का खर्च जोड़कर लागत तय किया जाता है। दूसरा है, ए2+एफएल। इसमें ए2 के अलावा परिवार के सदस्यों द्वारा खेती में की गई मेहतन का मेहनताना भी जोड़ा जाता है। तीसरा स्वामीनाथन आयोग का सुझाया सी2 फॉर्मूला है।
कुछ लोगों का मानना है कि कोई भी फार्मूला सटीक नहीं है। क्योंकि कहीं का किसान अपनी फसल में ज्यादा खाद और दवा डालता है और कहीं बहुत कम। ऑर्गेनिक खेती करने वाला किसान खाद नहीं खरीदता। एक ही फसल की लागत किसी प्रदेश में ज्यादा तो किसी में कम हो सकती है। इसलिए कोई भी फार्मूला सटीक नहीं हो सकता। वहीं सी2 के तहत जमीन का किराया भी अलग-अलग स्थानों पर अलग होता है।
एमएसपी तय करने का उद्देश्य यह माना जाता है कि अगर बाजार में सरकारी कीमत के नीचे किसी अनाज की कीमत जाती है, तो सरकार एमएसपी के आधार पर किसानों से अनाज खरीदेगी। आमतौर पर उम्मीद की जाती है कि किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य से ज्यादा कीमत मिले। मगर पिछले चार वर्षों में ऐसा कभी नहीं हुआ जब गेहूं और धान को छोड़कर किसी भी उत्पादन का बाजार भाव एमएसपी के बराबर भी पंहुचा हो।
‘यह छोटी जीत है’
स्वराज इंडिया के संस्थापक योगेंद्र यादव से बातचीत
 
खरीफ फसलों का एमएसपी सरकार ने घोषित की है। क्या अब किसानों की समस्या खत्म हो जाएगी?
एमएसपी तो समय-समय पर तय होती रही है। कभी थोड़ा ज्यादा, कभी कम। किसानों की समस्या सिर्फ एमएसपी से जुड़ा हुआ नहीं है। किसानों को अपने हाल पर नहीं छोड़ा जा सकता। आखिर वह देशभर का पेट भरता है। एमएसपी तब लागू होता है जब फसल सरकार खरीदती है। आपको जानकर ताज्जुब होगा कि पूरे उपज का केवल 10 फीसदी ही सरकार खरीदती है। यानी 90 फीसदी किसानों की उपज बाजार के हवाले होता है।
लेकिन किसान खुश तो होंगे?
सरकार का यह फैसला किसान आंदोलन की एक छोटी जीत है। किसानों के ऐतिहासिक संघर्ष ने इस किसान विरोधी सरकार को मजबूर किया कि वो चुनावी साल में अपने पिछले चुनावी वादे को आंशिक रूप से लागू करे। सरकार ने जो नई एमएसपी घोषित की है, वो किसानों की मांग के मुताबिक नहीं है। ये एमएसपी वो ड्योढ़ा दाम नहीं है जो किसान आंदोलन ने मांगा था। ये वो दाम नहीं है, जिसका वादा मोदीजी ने किया था। ये सिर्फ वादा है, जो सरकारी खरीद पर निर्भर है। ये अस्थाई है, जो अगली सरकार की मर्जी पर निर्भर है। किसानों को संपूर्ण लागत पर डेढ़ गुने दाम की गारंटी चाहिए।
फसलों की कीमत बहुत ज्यादा बढ़ाई गई तो महंगाई नहीं बढ़ेगी?
देश में महंगाई न बढ़े, यह सरकार को देखना है। सरकार के पास ऐसी नीति बनाने की पूरी छूट है। किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिले और महंगाई भी न बढ़े। यही तो एक अच्छी सरकार की पहचान है। आप किसान को मार नहीं सकते।
यह कैसे संभव है?
इसे कई तरह से संभव किया जा सकता है। यदि किसान आलू एक रुपए किलो बेचता है तो शहर में खुदरा विक्रता उसे पंद्रह से बीस रुपए बेचता है। पंद्रह से बीस गुणा मुनाफा कौन कमा रहा है। इसे खत्म कर आप महंगाई ही, बल्कि आज से भी सस्ता खाद्यान्न लोगों को उपलब्ध करा सकते हैं।
‘हमने वादा पूरा किया’
भाजपा के किसान मोर्चा के अध्यक्ष विरेंद्र सिंह मस्त से बातचीत
खरीफ फसलों का एमएसपी घोषित होने के बाद भी किसान संगठन खुश नहीं हैं। क्यों?
किसने कहा किसान खुश नहीं हैं। मोदी सरकार ने किसानों से जो वादा किया था, उसे पूरा किया है। अब सरकार किसानों को उनकी लागत का दो गुना कीमत दिलाने पर काम कर रही है। यही नहीं सरकार ने एमएसपी तय करने के लिए जो फॉर्मूला इस्तेमाल किया है, उसमें किसान परिवारों का खेतों में काम करने की मजदूरी को भी शामिल किया गया है। किसान की यही सबसे बड़ी मांग थी, जिसे कांग्रेस सरकार ने नहीं माना था।
एमएसपी से किसानों को कितना लाभ मिलेगा?
इस सरकार ने कई फसलों का दाम करीब 50 फीसदी तय बढ़ाया है। मसल रागी का एमएसपी पहले 1900 रुपए प्रति क्विंटल था, वह अब करीब 2900 रुपए हो गया है। मूंग का पुराना एमएसपी 5575 रुपए प्रति क्विंटल था, उसे बढ़ाकर 6975 रुपए किया गया है। आप ही बताएं क्या इससे किसानों को लाभ नहीं मिलेगा।
पर सरकार तो किसानों से बहुत कम मात्रा में फसल खरीदती है। ऐसे में किसानों तो बिचौलिये के हवाले है?
एमएसपी सिर्फ सरकार द्वारा खरीदी गई फसल पर लागू नहीं होता। फसल की एमएसपी घोषित होने के बाद कोई भी व्यापारी उससे कम दाम पर उक्त फसल किसान से नहीं खरीद सकता। व्यापारी को कम से कम एमएसपी का दाम तो किसान को देना ही पड़ेगा। हां, व्यापारी फसल की जितना ज्यादा दे, उस पर कोई रोक नहीं है।
आपकी पार्टी ने 2014 में स्वामीनाथन आयोग का सुझाव लागू करने का वादा किया थी। पर वादा पूरा नहीं हुआ?
नहीं हमने स्वामीनाथन आयोग के कई सुझाव को लागू कर दिया है। एक-दो रह गए हैं। 2019 में हमारी सरकार आई तो इसे भी पूरा करने का कोशिश किया जाएगा।
6 Comments
  1. 夏艷防曬乳 SPF50 夏艷防曬乳 SPF50

  2. CO2激光(CO2 laser / 二氧化碳激光)的波長是10600nm,照射到皮膚上會被皮膚的水份吸收,瞬間將皮膚有問題的組織氣化。CO2激光可以用來消除各種皮膚問題包括疣、癦、痣、脂溢性角化、粉刺和汗管瘤等。當治療後,您的皮膚需要5至10天時間復原。期間保持傷口清潔便可。優點:CO2激光所切割的深度比刮除術較深,亦較精準。可以處理較深層的皮膚問題,例如去除癦、油脂粒、肉粒、疣、珍珠疣、角質增生等。其復原亦較快,減少留下疤痕的機會。它最大的優點在於,能夠進一步減少激光治療過程當中的熱損傷反應,提升了激光治療的安全性,治療過程中幾乎沒有疼痛感

  3. LOVE MORE 愛戀膜法 【國際直送系列】地中海紅石榴青春淨白羽柔面膜的商品介紹 UrCosme (@cosme TAIWAN) 商品資訊 LOVE MORE 愛戀膜法,國際直送系列,地中海紅石榴青春淨白羽柔面膜

  4. laura mercier 蘿拉蜜思 【臉部彩妝】迷妍頰彩霜 CREME CHEEK COLOUR的商品介紹 laura mercier 蘿拉蜜思,臉部彩妝,迷妍頰彩霜 CREME CHEEK COLOUR,有網友推薦最新1

  5. Manchester City players have been casting their votes for the 2015 FIFPro World XI. Players can pick any professional to make the team who have made 15 or more appearances during the calendar year. Manchester City stars Sergio Aguero, Vincent Kompany and Samir Nasri cast their vote for the FIFPro World XI

  6. England jet out to Russia for the World Cup and they certainly looked smart in their matching Marks and Spencer suits. A set of behind-the-scenes pictures captured the mood in the camp. From Harry Kane styling his hair to Danny Welbeck’s funny pose, brilliant pictures take fans behind the scenes of England’s pre-World Cup photoshoot

Leave a Comment

Your email address will not be published.

You may also like