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योगी जी ! यूपी में क्यों बुरी मौत मर रही हैं गायें ?

भारत देश जहाँ गाय को पशु नहीं बल्कि माता का दर्जा दिया जाता है। खासकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ , गौमाता की रक्षा और उनकी देखभाल के प्रति काफी सजग नजर आते हैं।  अपनी गौशाला में गायों की सेवा  करते हुए अक्सर इनके कई वीडियो देखने को मिलते हैं।
पर क्या राज्य में गायों की स्थिति को लेकर उनकी  सरकार सचमुच में जागरूक है ? क्या उनकी सरकार गौशालाओं में पल रही गायों की देखभाल करने वाले ज़िम्मेदार लोगों की जवाबदेही सुनिश्चित कर रही है ?
क्योंकि उत्तर प्रदेश के ही जिला औरैया से आज ऐसी तस्वीरेँ सामने आयी हैं जहाँ गौ माता ज़मीन पर मरणासन्न स्थिति में पड़ी हैं, कौवे और कुत्ते गाय की आँखों को नोच कर खा रहे हैं।

गायों की देखभाल करने वाला कोई नहीं

इतना ही नहीं जानकारी के अनुसार , औरैया के गाँव अमावता में लापरवाही के चलते अभी तक लगभग सौ गाय मर चुकी हैं।
 गाँव अमावता में अव्यवस्थाओं के चलते गायों की स्थिति बद  से बद्द्तर है , एक कर्मचारी के अनुसार , यहाँ रोज एक से दो गाय मर रहीं हैं। ज़मीन पर पड़ी अधमरी गायों की देखभाल करने वाला कोई नहीं है।
आपको बता दें कि ये ये वही गाँव हैं जहां राष्ट्रीय गौ रक्षा वाहिनी के अध्यक्ष संजीव सिंह सेंगर का घर भी है।  ऐसे में क्या यह उनकी भी ज़िम्मेदारी नहीं थी कि उन्हें समय रहते इन गायों को सही सुविधा और चारा उपलब्ध करा देना चाहिए था।

 

‘दि सन्डे पोस्ट ‘ ने जब ‘गौ रक्षा वाहिनी’ के अध्यक्ष संजीव सिंह सेंगर से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि,’इस गौशाला की ज़िम्मेदारी सरकार ने प्रधान को दी थी जिसके लिए उन्हें गायों की देखभाल करने के लिए बजट भी दिया जाता है।
गायों की इस स्थिति को देखकर लगता है कि प्रधान ने बड़ी लापरवाही की।  उनको चाहिए कि अगर उनसे ये ज़िम्मेदारी नहीं उठायी जा रही है तो उसे किसी और को सौंप दें। ‘
उन्होंने आगे कहा कि,’गौ रक्षा वाहिनी इस पूरे मामले पर अब ज़मीनी स्तर से काम करेगी।  इस संदर्भ में जो भी लापरवाही की गयी है उस पर ज़िम्मेदार लोगों से सवाल पूछा  जायेगा। उन पर कार्यवाही की मांग की जाएगी। ‘

‘दि संडे पोस्ट’ को इस पूरे मामले की जानकारी स्वतंत्र पत्रकार शाह आलम ने  दी।  जो मौके पर वहां पर उपस्थित रहे और उन्होंने ही गायों की इस स्थिति को देखकर गौ रक्षा वाहिनी के अध्यक्ष को फोन करके बुलाया।

उन्होंने बताया कि,’यहाँ की स्थिति बेहद ख़राब है , गायों की देखभाल करने वाला कोई नहीं है। प्रधान द्वारा जिन कर्मचारियों को इन गायों की देखभाल करने के लिए रखा गया था उन्हें लगभग नौ महीने से कोई तनख्वाह नहीं मिली है। ‘
   गौ रक्षा वाहिनी के प्रदेश उपाध्यक्ष राहुल सेंगर ने जानकारी दी कि उनकी टीम ने सबसे पहले डॉक्टर को बुलाया है और अब वे गायों की देखभाल की जिम्मेदारी स्वयं निभायेंगें।  जब तक प्रधान राम नरेश इस पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लेते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि,’यह पूरे मामले के पीछे का किस्सा बेहद दर्दनाक है , मुझे यहाँ के स्थानीय निवासियों ने बताया कि ये लोग मरी हुई गाय के कान काट कर प्लास्टिक का बिल्ला निकलकर उसे फिर से गला कर दूसरी ज़िंदा गाय के कान में लगा देते थे ताकि किसी को शक न हो कि गायों की संख्या कम हो रही है। ‘

गायों की देखभाल करने वाले ज़िम्मेदार लोगों की जवाबदेही सुनिश्चित हो ?

गौ रक्षा वाहिनी के  मीडिया सचिव वीरेंद्र सिंह सेंगर ने भी इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जिले के डीएम , एसडीएम एवं आदि अधिकारीयों को फोन कर सूचित करने की बात कही।
सवाल यह है कि जब गौ रक्षा वाहिनी के अध्यक्ष खुद कह रहे हैं कि सिर्फ इसी जिले में नहीं बल्कि पूरे देश में लगभग 80 प्रतिशत गायों का यही हाल है , तो फिर सरकार  गौरक्षा के नाम पर राजनीति क्यों करती है ? गौमाता क्या सिर्फ वोट के लिए माता हैं ?

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