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पत्रकार अहसान के पक्ष में मातृ सदन,कहा पुलिस ने निकाली व्यक्तिगत दुश्मनी

हरिद्वार में गंगा की अविरल धारा और स्वच्छता के लिए लड़ाई लड़ रहे मातृ सदन ने अब पत्रकारों पर प्रदेश में हो रहे जुल्म के खिलाफ हुंकार भरी है । मातृ सदन ने पहली बार मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के शासनकाल में पत्रकारों पर हो रहे उत्पीड़न को लेकर पुलिस पर सवालिया निशान लगाए हैं । इससे त्रिवेद्र सिंह रावत सरकार की काफी किरकिरी हो रही है।

हरिद्वार के वरिष्ठ पत्रकार एवं ‘दि संडे पोस्ट’ के गढवाल ब्यूरो चीफ एहसान अंसारी की गिरफ्तारी को लेकर मातृ सदन ने प्रदेश की पुलिस को कटघरे में खड़ा किया है । मातृ सदन के ब्रह्मचारी दयानंद ने एक प्रेस रिलीज जारी करके हरिद्वार पुलिस पर एहसान अंसारी की गिरफ्तारी करने के पीछे व्यक्तिगत दुश्मनी को मुख्य कारण बताया है। इस तरह मातृ सदन ने अहसान अंसारी के पक्ष मे त्रिवेद्र सिंह रावत सरकार की खुलकर खिलाफत कर दी है।

 

 

मातृ सदन के ब्रह्मचारी दयानंद के अनुसार एहसान अंसारी एक जिम्मेदार पत्रकार रहे हैं, जो पत्रकारिता की गरिमा को रखते हुए समाज में फैले कदाचार और भ्रष्टाचार को अपनी लेखनी में प्रमुखता देते रहे हैं। यही वजह है कि बहुत से भ्रष्ट अधिकारी उनके कार्यों को लेकर स्वंतः ही द्वेष करने लगे और मौके की तलाश में रहे कि कब इनको दबोचा जाए।

ब्रह्मचारी  दयानंद कहते हैं कि लॉक डाउन की इस कठिन घड़ी में जब पूरा विश्व कोविड 19 से त्रस्त है, इन भ्रष्ट अधिकारियों ने अपनी भड़ास निकालने का उचित समय पाया और एक जिम्मेदार पत्रकार पर यह कथित आरोप होना बताकर कि वे सरेआम किसी महिला के साथ छेड़खानी कर रहे थे , बिना कोई नोटिस , पूछताछ और सूचना के गिरफ्तार कर मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न कर जेल भेज दिए गए। साथ ही वह इस अहसान अंसारी की फर्जी गिरफ्तारी को लेकर चकित है। वह कहंते है कि ताज्जुब की बात यह है कि जिस तहरीर को आधार बनाकर उनके विरुद्ध यह कार्रवाई होना बताया गया है उसमें उसका नाम तक नही है।

एक तरफ पत्रकारों को संरक्षण देने की बात की जाती है और दूसरी तरफ एक मंजे हुए मान्य पत्रकार के साथ इस तरह का सौतेला व्यवहार इसलिए किया जाता है, क्योकि वह पत्रकारिता की गरिमा को रखते हुए भ्रष्टाचार को प्रमुखता से उजागर करने का साहस दिखाते है । एक पुलिस अधिकारी का इस तरह से व्यक्तिगत दुश्मनी निभाना निंदनीय ही नही बल्कि घोर भृतस्नीये है।

 

 

मातृ सदन के अनुसार वह मांग करते है कि इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच किसी उच्चपदस्थ ईमानदार अधिकारी के द्वारा हो । जिससे दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाई सुनिश्चित हो, ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था पर आंच न आये। इस तरह मातृ सदन पुनः बदले की भावना से की गई पुलिस कार्यवाई की घोर निंदा करती है ।

मातृ सदन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कुछ दिन पूर्व ही पत्रकारिता की स्वतंत्रता और विमर्शता पर अपने विचार रखे है । जिसमें मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत कहते हैं कि स्वयं पत्रकारिता का विद्यार्थी होने के नाते मैं हमेशा से प्रेस की स्वतंत्रता का पक्षधर रहा हूं । लोकतंत्र के एक आधारभूत स्तंभ होने के नाते आप सभी समालोचना एवं आलोचना के अधिकारी है। सरकार और प्रशासन के काम के वाच डॉग होने के नाते आपका यह अधिकार भी है और कर्तव्य भी।

 

 

इस बयान को लेकर किया गया मुख्यमंत्री त्रिवेद्र सिंह रावत का ट्वीट फिलहाल प्रदेश में हास्यापद बनकर रह गया है। क्योंकि जिस समय वह पत्रकारिता की स्वतंत्रता के पक्षधर होने की बाते करते हुए कह रहे हैं कि लोकतंत्र के आधारभूत स्तंभ होने के नाते पत्रकार आलोचना के अधिकारी है। ऐसे में उनका यह ट्वीट प्रदेश में सात पत्रकारों की गिरफ्तारी पर सरकार को कटघरे में खड़ा करता दिखाई दे रहा है।

आरोप है कि इन सभी सात पत्रकारों पर सरकार ने फर्जी मामले दर्ज किए हैं। जिनमें से एक अहसान अंसारी है जिन्हें 16 मई को हरिद्वार की ज्वालापुर थाने की पुलिस ने फर्जी तरीके से गिरफ्तार किया था। हालांकि इस मामले में अपनी फजीहत होते देख सरकार ने ज्वालापुर के थानाधिकारी योगेश देव सिंह को स्थानांतरित कर अपनी इज्जत बचाने का प्रयास किया है।

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