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भारत में 33 लाख से अधिक बच्चे कुपोषण का शिकार

एक ऐसे समय में जब इंसान चांद पर बसने की तैयारी कर रहा है, भूख से होने वाली मौतें भय पैदा करती हैं। भारत ग्लोबल हंगर इंडेक्स में101वें स्थान पर पहुंच गया है। यानी अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से भी पीछे। भारत की ग्लोबल हंगर इंडेक्स में खराब स्थिति के बाद अब कुपोषण से जुड़ा चौकाने वाला डाटा सामने आया है।

महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय के अनुसार, देश में 33 लाख बच्चे कुपोषित हैं और उनमें से आधे सबसे अधिक कुपोषित समूह में हैं।

देश में सबसे ज्यादा 6.16 लाख कुपोषित बच्चों की संख्या महाराष्ट्र में है। मध्यम कुपोषित बच्चों की संख्या 1.57 लाख है, जबकि गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की संख्या 4.75 लाख है।

बिहार 4.75 लाख कुपोषित बच्चों के साथ दूसरे स्थान पर है। 3 लाख 23 हजार 741 बच्चे सामान्य कुपोषित हैं और 1 लाख 52 हजार 083 बच्चे अधिक कुपोषित हैं।

गुजरात में कुपोषित बच्चों की संख्या 3.20 लाख है, जिनमें से 1.55 लाख सामान्य रूप से कुपोषित हैं और 1.65 लाख बच्चे कुपोषित हैं।

महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय के अनुसार 17 लाख 76 हजार 902 बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित हैं और 15 लाख 46 हजार 420 बच्चे सामान्य कुपोषित हैं। 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कुल 33 लाख 23 हजार 322 बच्चों का सर्वेक्षण किया गया। आंगनबाड़ियों में 8.19 करोड़ बच्चे हैं, जिनमें से 33 लाख कुपोषित हैं। यह अनुपात कुल बच्चों का 4.04 प्रतिशत है। गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की संख्या नवंबर 2020 से अक्टूबर 2021 तक बढ़ी है और अब 9 लाख 27 हजार 606 से बढ़कर 17.76 लाख हो गई है। लेकिन जानकारी जुटाने का तरीका अलग था.

सबसे अधिक कुपोषित बच्चे छह महीने से छह साल की उम्र के थे और डेटा 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से एकत्र किया गया था। वर्तमान आँकड़ों के अनुसार आंगनबाडी प्रणाली से सभी उम्र के बच्चों की पोषण संबंधी जानकारी एकत्र की गई है।

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चाइल्ड राइट्स एंड यू की पूजा मारवाह के अनुसार, इस स्थिति का मुख्य कारण कोरोना संकट है और सामाजिक और आर्थिक कारक नकारात्मक हैं।

एक आंकड़े के मुताबिक देश में हर रोज 18 करोड़ लोग भूखे पेट सोने पर मजबूर हैं। फोरम फॉर लर्निंग एंड एक्शन विद इनोवेशन एंड राइगर की रिपोर्ट कहती है कि भारत में 5 साल के कम उम्र के 50 फीसदी बच्चों की मौत कुपोषण की वजह से होती है। हेल्पेज इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 5 करोड़ लोग भूखे पेट सोने पर मजबूर हैं। यानी भूख उम्र में फर्क नहीं करती, चाहे बच्चे हों या बुज़ुर्ग भूख की मार सब पर पड़ती है। केंद्र और राज्य दोनों के स्तर पर भूख से होने वाली मौत को रोकने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। जिनमें बीपीएल योजना, अंत्योदय अन्न योजना और अन्नपूर्णा योजनाएं शामिल हैं। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून देश की दो तिहाई आबादी को सस्ता अनाज देने की गारंटी भी देता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। इस हकीकत को ऐसे समझा जा सकता है।

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