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वोटों की खातिर बांग्लादेश के मंदिरों में गए मोदी , टीएमसी का आरोप 

पांच राज्यों पश्चिम बंगाल , केरल ,तमिलनाडु ,असम और पुड्डुचेरी  के विधानसभा चुनावों को लेकर पूरे देश की राजनीति चरम पर है। लेकिन पश्चिम बंगाल इनमें सबसे आगे दिख रहा है। यहां हर दिन चुनाव को लेकर कुछ ना कुछ सियासी हलचल होती रही है। राज्य में  जहां सत्ताधारी पार्टी टीएमसी के सामने  नाक बचाने का सवाल है, तो भाजपा की लड़ाई अपनी साख बढ़ाने  की है। इस सब के बीच दोनों पार्टियां एक दूसरे पर आरोप -प्रत्यारोप लगाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही हैं। हाल ही में पीएम मोदी के बांग्लादेश दौरे को लेकर तृणमूल कांग्रेस लगातार प्रधानमंत्री को घेर रही है। अब इस मामले को लेकर पार्टी के नेताओं ने चुनाव आयोग से शिकायत की है और पीएम मोदी पर आचार संहिता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। टीएमसी का कहना है कि बांग्लादेश में प्रधानमंत्री  मतुआ समुदाय के मंदिर ओराकांडी गए थे, जिससे चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन हुआ है। टीएमसी ने पीएम मोदी के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने की मांग की है।

तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने साथ पश्चिम बंगाल से सांसद शांतनु ठाकुर को ले गए थे, जो किसी भी सरकारी पद पर नहीं हैं। टीएमसी का आरोप है कि बांग्लादेश के मंदिरों में जाने का एकमात्र मकसद मतदाताओं को प्रभावित करना था।

दरअसल , पीएम मोदी 26 मार्च को दो दिवसीय दौरे पर बांग्लादेश गए थे। उस दौरान उन्होंने मतुआ समुदाय के मंदिर ओराकांडी का भी दौरा किया था। साथ ही, मतुआ समुदाय के संस्थापक हरिश्चंद्र ठाकुर के जन्मस्थान पर भी गए थे। दरअसल, पीएम मोदी बांग्लादेश के स्वतंत्रता दिवस की 50वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उस दौरान उन्होंने मतुआ समुदाय के लोगों को संबोधित किया। साथ ही, एक शख्स से हुई बातचीत का हवाला देते हुए कहा था कि किसी ने नहीं सोचा था कि कोई भारतीय प्रधानमंत्री यहां आएगा और मतुआ समुदाय के मंदिर में पूजा करेगा।

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बता दें कि पीएम मोदी की बांग्लादेश यात्रा पर शिवसेना भी निशाना साध चुकी है। शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा कि पीएम नरेंद्र मोदी को बांग्लादेश मुक्ति आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए ‘ताम्रपत्र’ दिया जाना चाहिए। बता दें कि पीएम मोदी ने कहा था कि बांग्लादेश मुक्ति आंदोलन का समर्थन करने पर उन्हें गिरफ्तार किया गया था। शिवसेना ने कहा कि उत्तर प्रदेश में चुनाव के दौरान पीएम मोदी को नेपाल के एक मंदिर में देखा गया था। वहीं, पश्चिम बंगाल में मतदान के दौरान पीएम मोदी बांग्लादेश के एक मंदिर पहुंच गए। यह संयोग नहीं है।

जानकारी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में मतुआ समुदाय की आबादी करीब 2 करोड़ है। माना जाता है कि इस समुदाय का प्रभाव पश्चिम बंगाल की करीब 50 सीटों पर है और यह समुदाय पश्चिम बंगाल चुनाव में वोटों के लिहाज से काफी मायने रखता है। ऐसे में मतुआ समुदाय के लोगों को लुभाने के लिए भाजपा, टीएमसी और अन्य राजनीतिक दल लगातार कोशिश कर रहे हैं।

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