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तीन देशों की यात्रा के लिए रवाना मोदी,कूटनीतिक दृष्टि से काफी अहम मानी जा रही है यात्रा

विशेष अतिथि के तौर आज फ्रांस जाएंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल जी-7 समिट में विशेष अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का न्योता भारत ने  स्वीकार कर लिया। जी-7 समिट 24 से 26 अगस्त के बीच फ्रांस के बिआरिट्ज में है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि फ्रांस की यह पहल हमारी गहरी कूटनीतिक साझेदारी का प्रमाण है। यह दुनिया में प्रमुख आर्थिक शक्ति के तौर भारत की स्वीकार्यता को दिखाता है।

फ्रांस, ब्रिटेन, रूस, बांग्लादेश समेत तमाम देशों ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 की वापसी और जम्मू-कश्मीर की वैधानिक स्थिति में बदलाव को भारत का आंतरिक मामला माना है। अमेरिकी राजनयिकों ने भी इसे भारत का आंतरिक मामला माना है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का कहना है कि उसके इस कदम से जम्मू-कश्मीर से लगती नियंत्रण रेखा, अंतरराष्ट्रीय सीमा तथा चीन से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा की स्थिति प्रभावित नहीं हुई है। ऐसे में दुनिया भर के देशों की निगाह 25 अगस्त को फ्रांस में होने वाली बैठक पर टिकी हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिनों की फ्रांस यात्रा के लिए आज  रवाना हो जाएंगे। अपनी यात्रा के दौरान वह फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और प्रधानमंत्री एडवर्ड फिलिप के साथ मुलाकात करेंगे। दोनों देशों के बीच इस मुलाकात में रक्षा, परमाणु ऊर्जा, समुद्री सहयोग और आतंकवाद-निरोध जैसे प्रमुख क्षेत्रों में रणनीतिक संबंध मजबूत करने पर बातचीत होगी।

फ्रांस से प्रधानमंत्री यूएई और बहरीन के साथ द्विपक्षीय दौरे के लिए जाएंगे। इसके बाद वह एक बार फिर 25 अगस्त को फ्रांस के शहर बियारिट्ज पहुंचेंगे जहां वह जी7 समिट में हिस्सा लेंगे। इस समिट में भारत को एक साझेदार देश के तौर पर आमंत्रित किया गया है। आज शाम को फ्रांस पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी मैक्रों से बात करेंगे। मैक्रों ने मोदी के आने पर एक डिनर का आयोजन किया है।
अगले दिन यानी कल शुक्रवार को मोदी फ्रांस के प्रधानमंत्री एडवर्ड चार्ल्स फिलिप से मुलाकात करेंगे। इसके बाद वह पेरिस के यूनेस्को मुख्यालय में भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे। साथ ही 1950 और 1966 में एयर इंडिया की दो विमान दुर्घटनाओं में मारे गए भारतीय पीड़ितों के लिए बनाए गए स्मारक का उद्घाटन भी करेंगे।
सचिव (आर्थिक संबंध) टी एस तिरुमूर्ति ने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच रक्षा साझेदारी को मजबूत करना, भविष्य में रक्षा अधिग्रहण, जैतपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र की स्थापना को लेकर प्रगति, भारत-प्रशांत और संबंधित परिचालन जरूरतों में रणनीतिक और राजनीतिक प्राथमिकताओं पर बातचीत होगी।

मौजूदा कूटनीतिक परिदृश्य में उनकी इस यात्रा को काफी अहम माना जा रहा है। अहम इसलिए क्‍योंकि ये दोनों देश आर्गेनाइजेशन ऑफ इस्‍लामिक कॉर्पोरेशन के सदस्‍य है। पाकिस्‍तान इस संगठन को लेकर काफी इतराता भी है। गौरतलब है कि यूएई ने अनुच्छेद 370 हटाने को भारत का अंदरूनी मामला मानते हुए इसका स्वागत किया था। यूएई की बात करें तो वह भारत का टॉप एक्‍सपोर्ट और इंपोर्ट डेस्टिनेशन भी है। इतना ही नहीं बीते कुछ दशकों में दोनों देशों के बीच व्‍यापारिक संबंध बेहद मजबूत हुए हैं। इसके अलावा करीब 30 लाख भारतीय इस देश में रहते हैं, जो यहां के विकास में योगदान दे रहे हैं। मार्च 2018 में यूएई के पीएम की अपील पर भारतीय तट रक्षक बल ने एक नौका को इंटरसेप्‍ट कर उन्‍हें इसकी जानकारी दी थी। इसके अलावा पिछले वर्ष अगस्‍त 2018 में केरल में आई बाढ़ में यूएई ने वित्‍तीय मदद कर राज्‍य को बिगड़े हालात से उबारने में मदद की थी। पीएम मोदी 2015 में भी यूएई जा चुके हैं।हाल के दिनों में यूएई और भारत के बीच व्यापारिक रिश्ते काफी मजबूत हुए है। व्यापार के क्षेत्र में यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा साझेदार देश बन गया है। दोनों देशों के बीच करीब 60 अरब डालर का वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार हुआ है। ऐसे में पीएम मोदी का वहां जाना और दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूती प्रदान करने में मददगार साबित होगा। इस यात्रा से भारत और बहरीन के बीच संबंधों में पिछले कुछ वर्षों में एक नया जोश देखने को मिलेगा।
इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच 25 अगस्त को होने वाली संभावित बातचीत में कश्मीर पर चर्चा होने की पूरी संभावना है। पहली बार राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने ट्वीट में कश्मीर में हिन्दू और मुसलमान दोनों का जिक्र करके ट्वीट किया है। भारतीय कूटनीतिक गलियारे में इसे बहुत अच्छा नहीं माना जा रहा है। समझा जा रहा है कि ट्रंप से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पाकिस्तान से प्रायोजित आतंकवाद और घुसपैठ का मुद्दा भी उठा सकते हैं। इसके अलावा दोनों शिखर नेताओं के बीच आपसी सहयोग, व्यापार, प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में निवेश तथा सहयोग, सामरिक साझेदारी समेत अन्य मसलों पर भी बातचीत होने की संभावना है।

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