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251 रुपये में मोबाइल बेचने वाला अब कर रहा ड्राई फ्रूट का धंधा, 200 करोड़ की ठगी कर डाली

नोएडा के सेक्टर-62 में ‘एफएमसीजी प्राॅडक्ट्स’ नामक एक फर्जी ट्रेडिंग कंपनी बनाकर 200 करोड़ से ज्यादा की ठगी का मामला सामने आया है। पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। थाना, सेक्टर-58 पुलिस ने ‘रिंगिंग बेल’ के एमडी मोहित गोयल, निवासी मेघदूतम सोसायटी सेक्टर-50 व ओम प्रकाश जांगीड, निवासी जयपुर राजस्थान को 10 जनवरी की शाम मेघदूत सोसायटी के पास से गिरफ्तार किया गया। ‘रिंगिंग बेल’ वही कंपनी है जिसने वर्ष 2015 में महज 251 रुपये में एंड्रायड फोन देने का वादा किया और सैकड़ों लोगों को चूना लगाया। अब भी इस कंपनी के 12 आरोपी फरार हैं। पहले एंड्रायड फोन और अब ड्राइफ्रूट्स के नाम पर आरोपियों ने करोड़ों की ठगी की है।

अडिशनल पुलिस कमिश्नर लव कुमार ‘ला एंड आर्डर’ ने कहा कि आरोपियों ने सेक्टर-62 स्थित कोरेंथम टावर में ‘दुबई ड्राई फ्रूट्स एंड स्पाइस हब’ के नाम से एक फर्जी ट्रेडिंग कंपनी खोली है। ओम प्रकाश जांगिड़ को इस कंपनी का एमडी बनाया गया था। मोहित इसका प्रोमोटर था। ये लोग देश-विदेश भर की विभिन्न फर्मों से ड्राई फ्रूट्स, दाल, तेल, मसाले मंगाते थे। फर्म संचालकों का विश्वास जीतने के लिए उन्हें कुछ कैश एडवांस के रूप में दे देते थे। इसके बाद लाखों रुपये के ड्राई फ्रूट्स अन्य सामान लेकर पैसे नहीं देते थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह फर्जीवाड़ा करीब पांच सौ करोड़ रुपये से अधिक का हो सकता है। दुबई ड्राई फ्रूट्स एंड स्पाइस हब के 14 अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कारोबारी रोहित मोहन ने थाना सेक्टर-58 में केस दर्ज किया था। आरोपियों ने ड्राई फ्रूट्स व स्पाइसीस खरीदकर ठगी का धंधा 2018 में शुरू किया था। मुख्य आरोपी मोहित गोयल, सुमित यादव, राजीव कुमार उर्फ मुसर्फिल लश्कर, विजय कुमार, मनोज कादयान, प्रदीप पर्दे के पीछे से काम करते हैं। इन कंपनियों में एमडी, प्रेजिडेंट, प्रोपराटर ऐसे शख्स को बनाते हैं, जिसका उस कंपनी से कोई संबंध नहीं होता।

मोहित गोयल ठगी के पैसे को अपनी असली कंपनी में इन्वेस्ट करता था। मोहित ने 10 करोड़ से अधिक कैश अपनी ही सेक्टर-62 के कारेंथम टावर स्थित वीआरके गेम्स में इन्वेस्ट किए हैं। इस कंपनी की मालिक उसकी पत्नी धारणा गर्ग है। वहीं सुमित यादव अपनी सिक्यारिटी कंपनी में इन्वेस्ट करता है। दुबई फ्रूट्स कंपनी में एमडी बनाये गए ओम प्रकाश जांगिड़ की पत्नी को गांव में प्रधानी का भी चुनाव लड़ाया गया था, जिसमें वह हार गई थी। कंपनी में विदेशी महिला रिसेप्शनिस्ट के तौर पर रखी गई थीं। मोटे पैकेज पर हायर किया गया था। ऑफिस में रखे गये 56 कर्मचारियों को 25 लाख रुपये महीना की सैलरी दी जाती थी। इसके अलावा डील करने वाले शख्स को दो फीसदी कमिशन भी दिया जाता था। ऑफिस पर लगे कंपनी के बोर्ड की कीमत ही पांच लाख रुपये से अधिक है

उस शख्स को सैलरी देते हैं तथा उसी के नाम पर कंपनी चलाते हैं। ये लोग ठगी का शिकार हुए पीड़ित जब पैसा लेने के लिए इन्हें तंग करते हैं तो आरोपी गैंगस्टर व बाउंसरों का सहारा लेते हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर फर्जी मुकदमे दर्ज करवाते हैं। राजस्थान के पांच कारोबारियों को फंसाकर उनसे 25 लाख रुपये वसूलने के आरोप में मोहित गोयल दिल्ली के नेहरू प्लेस थाना से जेल जा चुका है। आरोपियों ने फ्राॅड के मुकदमे में पैरवी करने व जमानत दिलाने के लिए एक लीगल टीम बनाई हुई है। जिसमें एक दर्जन से ज्यादा वकील हैं। फ्राॅड से होने वाली कमाई का एक हिस्सा आरोपी लीगल टीम के लिए रिजर्व रखते हैं। शिकार हुए 50 से ज्यादा पीड़ित ग्यारह जनवरी को पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित पुलिस कान्फ्रेंस में पहुंचे।

पीड़ितों ने बताया कि ठगी का शिकार एक पीड़ित 2019 में सुसाइड कर चुका है। वहीं एक पीड़ित पिछले तीन साल से अपने घर ही नहीं जा रहा है। पुलिस पूछताछ में आरोपी मोहित ने खुलासा किया है कि वह होलसेलर कारोबारियों से मार्केट रेट से महंगे दामों पर माल खरीदते थे। ग्राहकों को 40 फीसदी पैसा एडवांस के तौर पर दे देते थे। बाकी 60 फीसदी पैसा चेक के माध्यम से देते थे। उस चेक की पेमेंट स्टाप करा देते थे। गाजियाबाद, गुड़गांव व दिल्ली की विभिन्न मंडियों व रिटेलर कारोबारियों को सस्ते दाम में माल बेचते थे। इसकी पेमेंट कैश में लेते थे और यह पैसा आपस में बांट लेते थे। मोहित गोयल ठगी के पैसे को अपनी असली कंपनी में इन्वेस्ट करता था।

मोहित ने 10 करोड़ से अधिक कैश अपनी ही सेक्टर-62 के कारेंथम टावर स्थित वीआरके गेम्स में इन्वेस्ट किए हैं। इस कंपनी की मालिक उसकी पत्नी धारणा गर्ग है। वहीं सुमित यादव अपनी सिक्यारिटी कंपनी में इन्वेस्ट करता है। दुबई फ्रूट्स कंपनी में एमडी बनाये गए ओम प्रकाश जांगिड़ की पत्नी को गांव में प्रधानी का भी चुनाव लड़ाया गया था, जिसमें वह हार गई थी। कंपनी में विदेशी महिला रिसेप्शनिस्ट के तौर पर रखी गई थीं। मोटे पैकेज पर हायर किया गया था। आॅफिस में रखे गये 56 कर्मचारियों को 25 लाख रुपये महीना की सैलरी दी जाती थी। इसके अलावा डील करने वाले शख्स को दो फीसदी कमिशन भी दिया जाता था। ऑफिस पर लगे कंपनी के बोर्ड की कीमत ही पांच लाख रुपये से अधिक है।

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