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संवेदनहीन विधायक की सियासत भरी कहानी ?

कहा जाता हैं कि एक असाधारण व्यक्ति जब किसी पद पर आसीन हो जाता है तो सबसे पहले वह अपने समाज को सबक सिखाने की चाल चलता हैं । उसका अहंकार सर चढकर बोलता है ।वह तानाशाही रवैया अपनाने लगता है । लेकिन दुसरी तरफ जमीन से जुडा एक जनप्रतिनिधि भी होता है जो अन्याय के विरुद्ध खड़ा होता है, और न्याय के लिए लड़ाई लड़ता है । दादरी विधानसभा क्षेत्र के कचैडा प्रकरण को देखेंगे तो पता चलेगा कि यहां के जनप्रतिनिधि की छवि इसके उल्ट बनती जा रही है । यही वजह हैं कि यहां के जनप्रतिनिधि मास्टर तेजपाल नागर अपनी संवेदनहीनता के लिए जाने जाने लगे हैं ।
कचैड़ा गांव में जो 27 अप्रेल को हुआ उसे संवेदनहीनता कहे या सियासत ? लेकिन चारों ओर भाजपा विधायक तेजपाल नागर के उस कदम की निंदा हो रहे हैं जिसमें वह रात के अंधेरे में बादलपुर थाने में दुरियाई गाँव के उन आरोपियों से मिले,जिन पर कचैड़ा के बेकसूर लोगों पर गोलियां चलाने के आरोप हैं । क्या एक जनप्रतिनिधि को यह करना चाहिए कि वह उन आरोपियों से मिले जो निहत्थे लोगों पर गोली चलाने के आरोपी है ? लेकिन पीडित युवक शक्ति सिंह और योगेश कुमार राजनीति का शिकार होकर ,गोलियां खाकर आज गंभीर अवस्था में गाजियाबाद को कोलंबस हॉस्पिटल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं । उनको देखने तक की फुर्सत विधायक तेजपाल नागर के पास नही है ?
कहा जाता है कि एक मास्टर के अंदर भावनात्मक दिल होता है । जो संवेदनाओं से भरा होता हैं । लेकिन मास्टर तेजपाल नागर हास्पिटल के आईसीयू में एडमिट गाँव के युवाओं को तीन दिन बीत जाने के बाद भी देखने नही गये । वह ऐसा क्यों कर रहे हैं ? जो कोई सुन रहा है वही उन पर थू थू कर रहा है। कचैडा और दुरियाई गाँव के दरमिया महज 400 मीटर का दायरा है । लेकिन आज दुरियाई गाँव सियासत के जाल में इस कदर जकड गया हैं कि दोनो गाँवो के लोगो के बीच हजारो मील की दुरी पैदा हो गयी हैं । आज हर कोई जानता है कि भाजपा नेताओं ने उनके मन में राजनीतिक द्वेष भाव पैदा कर कचैडा के लोगो पर अपना निशाना साधने का कुचक्र चला हैं । वह भाजपा नेता जिनको गाँव के लोगों ने सात माह पूर्व ही बहिष्कृत कर दिया था । उनकी गाँव में एंट्री बंद कर दी थी । गाँव में ‘एंट्री नाॅट एलाऊड’ के बोर्ड टग गये थे । वही नेता आज कचैडा और दुरियाई गाँव के लोगो को आपस में भिडाकर वह अपनी -अपनी राजनीतिक रोटिया सेक रहे हैं । लेकिन वह जानते नही हैं कि जाने – अनजाने कितनी बडी भूल कर रहे हैं । इसका नतीजा कुछ भी हो सकता है ।
इस मामले को चिंगारी देने वाले भाजपा नेता कचैडा और दुरियाई के लोगों को राजनीति के भ्रम जाल में फसाने से पहले दोनों गांव के इतिहास को जरूर जांच लें । आज से करीब साढे 450 वर्ष पूर्व कचैड़ा के पूर्वजो ने ही अपनी जमीन का आधा हिस्सा उस ब्राह्मण को दिया था , जिस को बुलाकर पास में दुरियाई गाँव बसाया गया था । बाद में उस ब्राह्मण ने अपने एक जजमान जाट को बुला लिया था । आज जो दुरियाई गाँव बसा हैं वह कचैडा की जमीन पर बसा हैं । कचैडा गाँव का एहसान वह कभी नही भूल सकते हैं । लोग कह रहे है कि माननीय विधायक जी मत भूलिए वोटो की राजनीति पाँच साल में एक बार आती हैं । लेकिन इस फसल को काटने में असफल रहने पर किसानों पर जूल्म नही ढहाए जाते हैं ।
सर्वविदित हैं कि 2017 में दादरी विधानसभा के भाजपा प्रत्याशी मास्टर तेजपाल नागर को कचैडा को लोगो ने बहुमत से वोट देकर जिताया था । जबकि इससे पूर्व 2014 में डाँ महेश शर्मा को सबसे अधिक वोट देकर लोकसभा में पहुंचाया था । लेकिन जब कचैड़ा के किसानों पर वेब सिटी आफत बनकर बरसी और 63 किसानों को अपनी फसलो को बर्बाद करने से रोकने के विरोध में जबरन जेल में ठूंस दिया गया तो भाजपा के विधायक और सांसद दोनों ने इनको न्याय दिलाना तक मुनासिब नहीं समझा । कई बार गांव के लोग विधायक तेजपाल नागर और सांसद डॉ महेश शर्मा के दर पर दरबदर हुए । लेकिन हर बार खाली हाथ लौटे । जैसे प्रदेश और देश में भाजपा की सरकार है । डबल इंजन की सरकार होते हुए अगर दोनों जन प्रतिनिधि चाहते तो कचैडा गांव के किसानों को न्याय जरूर मिलता । गाँव के लोग कहते हैं कि विधायक और सांसद ने कचैड़ा के किसानों की बजाय एक धनपति , बाहुबली बिल्डर ( वेवसिटी ) का साथ देना मुनासिब समझा । इनकी फितरत में ही कचैड़ा के खिलाफ रहे लोगों को उकसाने का काम रहा है । पहले कचैड़ा के खिलाफ वेव सिटी के गुंडों को उकसाते रहे है और अब जब कचैड़ा के बेकसूर युवाओं पर 27 अप्रेल को दुरियाई में गोलियां चलाई जा रही है सरियों से और राॅड से उनके सिर फाडे जा रहे हैं । उनके हाथ पैर तोडे जा रहे है । उनको सरेआम गोलियों का शिकार बनाया जा रहा है । तो ऐसे में विधायक तेजपाल नागर उनके गम में शरीक होने, उनके घाव पर मरहम लगाने की बजाय आरोपियों के साथ बादलपुर थाने में रात के अंधेरे में गलबैय्या कर रहे है ? लोग सवाल कर रहे है कि माननीय विधायक यह कैसा इंसाफ कर रहे हो ?

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