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सुषमा हत्याकांड के आरोपी को बचा रहे बुलंदशहर के विधायक ?

बुलंदशहर और गौतमबुद्ध नगर बॉर्डर पर बसा गांव नेकपुर। जहा आज तक 36 मर्डर हो चुके है। बकौल ग्राम प्रधान नवीन कुमार ” आज तक हमारे गांव में 36 हत्याए हो चुकी है। लेकिन सुषमा की हत्या से पूरा गांव हतप्रभ है”। नेकपुर गांव पिछले एक सप्ताह से चर्चा में है।चर्चा में इस लिए कि यहां की एक बेटी सुषमा की गत एक अक्टूबर को ग्रेटर नोएडा की मित्रा सोसायटी में सरेआम हत्या कर दी गई। सुषमा लोकगायकी के क्षेत्र में नाम कमा रही थी। उसका गाया हुआ ‘डाली – डाली पर अनार’ गाना ग्रामीण पृष्ठभूमि के लोगो की जबान पर था। अभी वह लोकगीत संगीत की सीढिया चढ़ ही रही थी की उसके ही पति गजेंद्र भाटी ने उसकी सुपारी देकर हत्या करा दी।

 

गौतमबुद्ध नगर के नियाना गांव निवासी गजेंद्र भाटी नामक व्यक्ति उसकी जिंदगी में चार साल पहले तब आया था जब वह अपने पहले पति से तलाक ले चुकी थी। जिस व्यक्ति को वह अपनी जिंदगी समंझती थी उसने ही उसकी साँस बंद करा दी। हालांकि इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस के दो अलग अलग जिलों की पुलिस का वह चेहरा सामने आया है जिसमे एक जिला गौतमबुद्धनगर की पुलिस ने हत्याकांड का पर्दाफास छठे दिन ही कर दिया। जबकि बुलंदशहर पुलिस ने 40 दिन तक भी सुषमा के उन हमलावरों को गिरफ्तार नहीं किया, जिन्होंने गत 19 अगस्त को उसपर हमला किया था।

 

यह हमला भी सुनियोजित था और उसके पति गजेंद्र भाटी के षड्यंत्र का ही एक हिस्सा था। सुषमा ने अपने उप्पर हुए हमले की न केवल बुलंदशहर पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई बल्कि हमलावरों से अपनी जान की रक्षा की गुहार लगाती रही। वह अपनी जान की सलामती के लिए बार बार बुलंदशहर के एसएसपी ऑफिस जाती रही।  लेकिन दूसरी तरफ बुलंशहर पुलिस एक विधायक के दवाब में सुषमा के हमलावरों को गिरफ्तार करने से बचती रही। दि संडे पोस्ट के पास मौजूद एक्सक्लूसिव वीडियो में शुषमा यह कहती हुई स्पष्ट नजर आ रही

 

बुलंदशहर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के सामने शुषमा ने पत्रकारों के सामने अपनी व्यथा व्यक्त की थी। जिसमे उसने कहा था कि वह तीन बार पुलिस से मिल चुकी है। लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हो रही है। बुलंदशहर के एक सब इंस्पेक्टर सरताज का नाम सुषमा ने जिन्दा रहते हुए मिडिया के समक्ष लिया था। वह सरताज का नाम लेते हुए बता रही है कि उन्होंने मुझसे कहा था कि पुलिस एक स्थानीय विधायक के दवाब में है और उसकी एफआईआर पर कार्यवाही नहीं कर रही है। सुषमा की छोटी बहन सोनू सम्राट ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि वह भी उसके साथ एसएसपी बुलंदशहर के ऑफिस गई थी। लेकिन पुलिस ने उसकी कोई सुनवाई नहीं की।

एसएसपी बुलंदशहर से मिलकर आने और अपनी जान की गुहार लगाने के इसके करीब एक सप्ताह बाद ही सुषमा की ग्रेटर नोएडा में हत्या हो जाती है। हालाँकि गौतमबुद्ध नगर के एसएसपी वैभव कृष्ण ने इस मामले का एक सप्ताह में खुलासा करने की बात कही थी। लेकिन पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सुषमा हत्याकांड का 6 दिन मे ही खुलासा कर दिया। गौतम बुद्ध नगर पुलिस ने प्रेस कांफ्रेंस करते हुए कहा कि गजेंद्र भाटी ने सुषमा को सुपारी देकर मरवा दिया। जिसको सुपारी दी गई वह बुलंदशहर का प्रमोद था। प्रमोद ही वह शख्श था जिसने 19 अगस्त को सुषमा पर बुलंदशहर में हमला किया था। इस मामले में किसी तरह जान बचाकर निकली सुषमा ने एसएसपी एसएसपी बुलंदशहर के समक्ष एफआईआर दर्ज करा दी थी।

लेकिन एफआईआर दर्ज होने के 40 दिन बाद भी कुछ नहीं हो सका। सुषमा के हमलावर गिरफ्तार नहीं हो सके। क्योकि स्थानीय विधायक ने सुषमा के हमलावरों को शह दी हुई थी। जिसके चलते हमलावरों के हौसले बुलंद हो गए। जिसका नतीजा सुषमा की हत्या के रूप में सामने आया। हालांकि गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने इस मामले में हत्यारोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया । सवाल यह है कि क्या बुलंदशहर पुलिस अभी भी उस स्थानीय विधायक के दवाब में है जिसने 19 अगस्त के दिन सुषमा के हमला मामले में आरोपियों पर कार्यवाही नहीं करने दी थी ?

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