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लॉकडाउन की अफवाहों के चलते घरों को लौटने लगे प्रवासी मजदूर 

कोरोना वायरस से हालात फिर खतरनाक होते जा रहे हैं। महाराष्ट्र, पंजाब, कर्नाटक समेत पांच राज्यों ने देश में संक्रमण को बेकाबू कर दिया है। अकेले इन राज्यों में 80 फीसद से अधिक नए मामले हैं। देश में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 40 हजार से अधिक नए मामले आने के बाद कुल पॉजिटिव मामलों की संख्या 1.16 करोड़ हो गई हुई। कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए कई राज्य सरकारों ने नाइट कर्फ्यू लगा दिया है, जबकि कुछ  ने लॉकडाउन  की घोषणा की है। इसके अलावा स्कूलों में होने वाली ऑफलाइन क्लासेज को एहतियातन बंद  कर दिया गया है।इस सब के बीच गुजरात के सूरत शहर में रह रहे प्रवासी मजदूरों को बढ़ते कोरोना मामलों के साथ लॉकडाउन का डर फिर से सताने लगा है। लॉकडाउन की अफवाह के चलते मजदूर  एक बार फिर से अपने घरों तक पहुंचने की आस में दोगुना किराया देकर अपने घरों की तरफ निकल रहे हैं। हालांकि महानगर पालिका और कई अन्य संगठनों ने प्रवासियों को समझाने की कोशिश की है कि लॉकडाउन लगने की केवल अफवाह मात्र है, लेकिन कोई भी मानने को तैयार नहीं है।

 बता दें कि पिछले कुछ दिनों से सूरत के अलग-अलग हिस्सों से मजदूरों का पलायन जारी है। लोगों में लॉकडाउन का डर इस कदर हावी हो गया है कि लोग मनमाने ढंग से एंठे जा रहे ज्यादा किराए के साथ भी  सफ़र कर रहे हैं।

इसी के चलते कल खटोदरा पुलिस ने कुछ ट्रैवेल अजेंट्स व बस कम्पनी संचालकों को हिरासत में लिया था। पुलिस को आशंका थी कि इन्ही लोगों ने मोटा मुनाफा कमाने के फेर में शहर भर में लॉकडाउन लगने की अफवाह फैलाई है। वहीं बस संचालकों का कहना है कि उन्होंने लोगों को बहकाया नहीं है बल्कि लोग खुद उनसे टिकट लेने के लिए आ रहे हैं। ऐसे में प्रशासन, नेता व कई संगठन मजदूरों को रोकने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन रोज करीब दर्जन भर बसों से करीब डेढ़ से दो हजार मजदूर अपने घरों को लौट रहे हैं।

प्रशासन कई लोगों की मदद से बस संचालकों को बस चलाने से रोक रहा है, लेकिन वे मानने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में उनके सामने भी समस्या है कि आखिर कैसे उन्हें बस न चलाने दिया जाए। जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने प्रवासियों को रोकने के लिए लगातार कार्रवाई शुरू कर दी है। अब तक 5 एजेंटों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा सभी अनधिकृत काउंटर बंद करवाए जा रहे हैं। पुलिस खुद लोगों के बीच जाकर अनाउंस कर रही है कि अफवाह पर ध्यान ना दें। लॉकडाउन नहीं लगेगा। विशेषतौर पर ऐसी जगहों पर जहां श्रमिकों की संख्या ज्यादा है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि लॉकडाउन की बात केवल अफवाह है।

बता दें कि कोरोना के बढ़ते मामलों के चलते गुजरात सरकार ने अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट जैसे शहरों में नाइट कर्फ्यू का ऐलान किया है। इसके अलावा कुछ पाबंदियां भी लगाई गई हैं ताकि कोरोना के बढ़ते मामलों को रोका जा सके। गुजरात में हर दिन करीब एक हजार  से ज्यादा नए कोरोना केस सामने  आ रहे हैं।

 लॉकडाउन और नाइट कर्फ्यू

कोरोना की रफ्तार को रोकने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने नागपुर में 31 मार्च लॉकडाउन लगाया है। इसके अलावा पुणे, औरंगाबाद और अमरावती समेत कई जगहों पर नाइट कर्फ्यू लगा हुआ है। महाराष्ट्र के अलावा पंजाब, गुजरात में भी  पाबंदियां लगाई गई हैं। गुजरात के अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत और राजकोट में 31 मार्च तक नाइट कर्फ्यू है, जबकि पंजाब के लुधियाना, पटियाला, होशियारपुर, जालंधर और फतेहगढ़ साहिब सहित कई शहरों में रात 9 से सुबह 5 बजे तक नाइट कर्फ्यू है।

उत्तर प्रदेश में भी स्कूल बंद

कोरोना के मामले बढ़ते देखते हुए अन्य राज्यों की तरह उत्तर प्रदेश सरकार ने भी स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया है। यूपी में कक्षा एक से आठ तक के सभी निजी और सरकारी स्कूलों को बुधवार से 31 मार्च तक बंद करने का आदेश है। इसके साथ ही जुलूस, कार्यक्रम और सार्वजनिक समारोह के लिए अब प्रशासन की अनुमति जरूर कर दी गई है। इससे पहले महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पंजाब और तमिलनाडु ने कोरोना के कारण स्कूलों को फिर से बंद कर दिया है।

 मध्य प्रदेश में सख्त हुए नियम

मध्य प्रदेश में कोरोना मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। महामारी की रफ्तार को देखते हुए जिला प्रशासन ने शहर में फिर सख्त कदम उठाए हैं। राज्य सरकार ने सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनीतिक कार्यक्रमों पर रोक लगा दी है। इससे पहले तीन शहरों इंदौर, भोपाल और जबलपुर में हर रविवार लॉकडाउन लगाया गया है। होली के बाद रंगपंचमी के दिन शहर में निकलने वाली परंपरागत गेर के आयोजन पर भी रोक लगा दी गई है। मास्क मुंह के नीचे लटकाकर चलने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा।

 देश में टीकाकरण का आंकड़ा

कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच टीकाकरण अभियान तेज हो गया है। देश में अब तक लाभार्थियों को वैक्सीन की 4.72 करोड़ से अधिक खुराकें दी जा चुकी हैं। इनमें 78.30 लाख स्वास्थ्यकर्मी (पहली खुराक), 49.30 लाख स्वास्थ्यकर्मी (दूसरी खुराक), 81.72 लाख फ्रंटलाइन वर्कर्स (पहली खुराक) और 27.93 लाख फ्रंटलाइन वर्कर्स (दूसरी खुराक) शामिल हैं। इनके अलावा लाभार्थियों में 1.94 करोड़ 60 साल से अधिक उम्र के और 40.72 लाख 45-60 साल आयु वर्ग के गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोग भी शामिल हैं, जिन्हें अब तक पहली खुराक दी गई है।

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